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Saturday, August 13, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



---------- Forwarded message ----------
From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/13
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


पटना यूनिवर्सिटीःएमबीए एडमिशन में धांधली !

Posted: 12 Aug 2011 10:50 AM PDT

पटना विश्वविद्यालय के एमबीए प्रथम खंड में एक बार फिर नामांकन में गड़बड़ी होने की आशंका है. कोर्स को-ऑर्डिनेटर ने यह आरोप लगा कर पद से इस्तीफा दे दिया है.अप्लायड इकोनॉमिक्स एंड कॉमर्स विभाग में संचालित की 60 में से 30 सीटों पर आरक्षित श्रेणी के छात्रों का नामांकन होता है.
इनमें बीसी-1 के लिए चार और बीसी-2 के लिए सात सीटें हैं. कोर्स को-ऑर्डिनेटर डॉ एमसी प्रसाद का कहना है कि इन पर जेनरल कोटा के छात्रों का नामांकन लिया गया. नामांकन में कोर्स को-ऑर्डिनेटर की प्रमुख भूमिका होती है, लेकिन मेरिट लिस्ट तैयार करने में मुझसे राय नहीं ली गयी. इस कारण उन्होंने कुलसचिव को पत्र लिख कर इस्तीफा भेज दिया है.

मालूम हो कि वर्ष 2008-09 में भी एमबीए में नामांकन में गड़बड़ी हुई थी. तब तत्कालीन कुलपति डॉ श्यामलाल ने जांच कमेटी की रिपोर्ट पर दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया था. उन्हें बाद में बरखास्त कर दिया गया. हालांकि, राजभवन के हस्तक्षेप के बाद दोनों शिक्षकों की सेवा वापस कर दी गयी. दूसरी ओर, विभागाध्यक्ष डॉ बीएन पांडेय ने कहा कि डॉ प्रसाद को कोर्स को-ऑर्डिनेटर नियु किया गया था, लेकिन उन्होंने इस पद पर योगदान नहीं दिया, तो इस्तीफा कैसे दे सकते हैं. उन पर कई आरोप हैं. वे अपने कार्यो को छिपा रहे हैं.
विश्वविद्यालय ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है. जहां तक एमबीए की मेरिट लिस्ट की बात है, इसकी सूची नामांकन कमेटी की राय पर तैयार की जाती है. नामांकन में गड़बड़ी नहीं हुई है. उनका आरोप गलत है(प्रभात खबर,पटना,12.8.11).

झारखंडःदारोगा नियुक्ति लिखित परीक्षा 11 सितंबर से

Posted: 12 Aug 2011 10:47 AM PDT

दारोगा नियुक्ति की लिखित परीक्षा 11 सितंबर से शुरू होगी. जल्द ही इससे संबंधित विज्ञापन प्रकाशित किये जायेंगे. डीजीपी जीएस रथ ने बताया कि शारीरिक जांच में सफल हुए 13 हजार से अधिक उम्मीदवार लिखित परीक्षा में शामिल होंगे.
डीजीपी के मुताबिक परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए यह व्यवस्था की गयी है कि कोई भी उम्मीदवार उत्तर पुस्तिका का एक कार्बन कॉपी अपने साथ घर ले जा सकते हैं, ताकि वह घर जाकर खुद कॉपी की जांच कर सकें. उन्होंने बताया कि उम्मीदवार परीक्षा केंद्र में फोटो पहचान पत्र (ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड आदि) लेकर आयेंगे.
परीक्षा केंद्र में एडमिट कार्ड और पहचान पत्र के फोटो का मिलान किया जायेगा. एडमिट कार्ड भेजने की प्रक्रिया शीघ्र आरंभ होगी. एडमिट कार्ड में सभी उम्मीदवारों का रोल नंबर अलग से होगा. जिस प्रमंडल मुख्यालय में शारीरिक जांच हुई थी. उसी प्रमंडल मुख्यालय में लिखित परीक्षा होगी. हर प्रमंडल मुख्यालय में एक-एक परीक्षा केंद्र होगा. रांची में दो परीक्षा केंद्र होंगे. परीक्षा दो पालियों में होगी. डीजीपी ने बताया कि लिखित परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए कई कदम उठाये गये हैं. जिन उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड नहीं मिल पायेगा, उनके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी होगा. यह नंबर विज्ञापन के साथ प्रकाशित किया जायेगा. उम्मीदवार अपनी समस्या का समाधान संबंधित प्रमंडल के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके निकाल सकेंगे. उम्मीदवारों को डुप्लीकेट एडमिट कार्ड दिये जाने की भी व्यवस्था की गयी है(प्रभात खबर,रांची,12.8.11).

विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के करीब 6300 पद रिक्‍त

Posted: 12 Aug 2011 10:45 AM PDT

सरकार ने आज स्वीकार किया कि विभिन्न केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 16141 स्वीकृत पद हैं जिनमें 6374 पद खाली हैं.
मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डी पुरंदेश्वरी ने आज राज्यसभा को बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मिली सूचना के अनुसार केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 6374 पद रिक्त हैं.
उन्होंने जर्नादन बाघमरे के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस कमी को दूर करने के लिए शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने सहित कई कदम उठाए गए हैं. पुरंदेश्वरी ने हेमामालिनी और प्रभात झा के एक अन्य प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया कि वेतन समीक्षा समिति ने कहा है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में 45 से 52 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं(प्रभात खबर,12.8.11).

मुज्फ्फरपुरःकाम करेगी तदर्थ शिक्षा समिति

Posted: 12 Aug 2011 10:43 AM PDT

अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद विद्यालयों में तदर्थ शिक्षा समिति का गठन अनिवार्य कर दिया गया है.
सभी प्राथमिक विद्यालयों में समिति अनिवार्य रूप से काम करेगी. समिति का गठन सितंबर तक पूरा कर लेना है. मानव संसाधन विकास विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है.
अधिसूचना के आलोक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) राजेंद्र प्रसाद ने सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीइइओ ) को तदर्थ शिक्षा समिति के गठन का निर्देश दिया है.
शिक्षा समिति करेगी देखरेख
शिक्षा का अधिकार कानून लागू किये जाने के बाद सर्व शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, एनपीइजीइएल व पर्यवेक्षण के साथ-साथ विद्यालय विकास योजना का संचालन तदर्थ शिक्षा समिति/ विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से किया जाना है.

डीपीओ एसएसए श्री प्रसाद ने सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को मार्गदर्शन भेजा है. पत्र के अनुसार 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से समिति का गठन कर लिया जाना है.
तदर्थ शिक्षा समिति का निबंधन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी करेंगे. तदर्थ शिक्षा समिति बाल शिक्षा का अधिकार कानून के अधिनियम के प्रावधानों के अधीन शिक्षा समिति के गठन के पूर्व तक काम करेगी. तदर्थ शिक्षा समिति का गठन बिहार प्रारंभिक विद्यालय शिक्षा समिति अधिनियम 2011 के अंतर्गत किया जा रहा है(प्रभात खबर,मुजफ्फरपुर,12.8.11).

सी डब्ल्यू ए के तौर पर करिअर

Posted: 12 Aug 2011 09:30 AM PDT

उदारीकरण और कंपनियों के ग्लोबल कारोबार और भारत सरकार के कंपनी संबंधी नियमों में सुधारों के कारण सीए, सीएस और सीडब्ल्यूए की कॉरपोरेट जगत में मांग खासी बढ़ रही है। 
तेजी से ग्रोथ दिखाती भारतीय अर्थव्यवस्था में फाइनेंस एवं अकाउंट्स से जुड़े करियर लोगों के आकर्षण को केंद्र बनते नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से मल्टीनेशनल कंपनियों के देश में आने से इस क्षेत्र में जॉब की रौनक भी बढ़ी है। स्थानीय कंपनियां भी रोजगार के एक बड़े हब के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। आर्थिक उदारीकरण के बाद इसमें तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। लोगों को सभी बड़ी कंपनियों में आसानी से जॉब मिल रही है। इसमें सीए/सीएस और आईसीडब्ल्यूए प्रमुख हैं।
अक्सर छात्र सीए/सीएस और आईसीडब्ल्यूए को एक ही मान बैठते हैं। इन तीनों को लेकर उनके मन में तमाम तरह की शंकाएं भी होती हैं, लेकिन अपने कार्य के स्वरूप और भूमिका को लेकर ये तीनों अलग हैं। इसमें सीए और आईसीडब्ल्यूए एक जैसे होते हैं, लेकिन सीएस का काम इनसे अलग होता है। सीए और सीएस के कार्यों में भी जॉब के दौरान ही समानता होती है, लेकिन जैसे ही बात प्रैक्टिस की होती है, उसका स्वरूप बदल जाता है। जॉब के लिहाज से ये तीनों ही बूम पर हैं।
सीए करता है मनी मैनेजमेंट
किसी भी संस्थान में चार्टर्ड अकाउंटेंट अथवा सीए का काम बेहद सम्मानजनक एवं चुनौतीपूर्ण होता है। वे उस संस्थान अथवा कंपनी से जुड़े सभी अकाउंट एवं फाइनेंस संबंधी कार्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इसके अलावा इनका कार्य मनी मैनेजमेंट, ऑडिट अकाउंट का एनालिसिस, टैक्सेशन तथा फाइनेंशियल एडवाइज उपलब्ध कराने से भी संबंधित है। एक समय ऐसा था, जब सीए के कार्यक्षेत्र को अकाउंट तक ही सीमित माना जाता था। लेकिन धीरे-धीरे स्थितियां बदल रही हैं और इनका कार्यक्षेत्र भी बढ़ता जा रहा है और वे मैनेजमेंट और कॉरपोरेट केयर टेकर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनका कार्य मुख्यत: अकाउंटिंग, टैक्सेशन और ऑडिटिंग से संबंधित है।
ज्यादातर कंपनियां कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हैं और उन्हें ऑडिटिंग के लिए सीए की जरूरत पड़ती है। अब तो छोटे से छोटा संस्थान भी अपने यहां सीए प्रोफेशनल्स को रखना चाहता है, ताकि कंपनी को फायदे में पहुंचाया जा सके।


इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ही एकमात्र संस्था है, जो सीए का कोर्स कराती है और उसके बाद लाइसेंस प्रदान करती है। कंपनी एक्ट के अनुसार केवल सीए ही भारतीय कंपनियों में बतौर ऑडिटर नियुक्त किए जा सकते हैं। इसका फायदा देख कर ही कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चार्टर्ड अकाउंटेंट के क्षेत्र में कदम रख रही हैं।
सीएस होते हैं कंपनी कार्यों की महत्त्वपूर्ण कड़ी
सीएस एक्ट 1980 भी सीए की तरह ही संसदीय अधिनियम से पारित हुआ है। दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेकेट्ररीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) एकमात्र ऐसी संस्था है, जो कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स कराती है। बतौर सीएस प्रोफेशनल्स आप टॉप मैनेजमेंट और शेयर होल्डर्स के बीच अपनी सेवाएं दे सकते हैं। सीएस को कंपनी और स्टॉक होल्डर्स के हितों की रक्षा करते हुए कंपनी लॉ के अधीन कई महत्त्वपूर्ण कार्य करने होते हैं। जिस कंपनी का पेड अप शेयर कैपिटल दस लाख रुपए से ज्यादा और दो करोड़ रुपए से कम हो, उन्हें कम्प्लायंस सर्टिफिकेट के लिए सीएस की सेवाएं लेनी पड़ती हैं। स्टॉक एक्सचेंज में दर्ज होने के लिए भी कंपनियों को अपने यहां सीएस की नियुक्ति करनी होती है। कंपनी सेक्रेटरी को कम्प्लायंस सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार होता है। कंपनी सेक्रेटरी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सरकारी व गैर सरकारी एजेंसियों, शेयर होल्डर्स एवं सरकार के बीच एक कड़ी का काम करता है। कंपनी की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को समझने के साथ-साथ सीएस को लॉ मैनेजमेंट, फाइनेंस और कॉरपोरेट गवर्ननेंस सरीखे विषयों के बारे में जानकारी रखनी पड़ती है।
आईसीडब्ल्यूए: सामना करें बड़े लक्ष्य का 
आजकल कंपनियों में कॉस्ट कटिंग का चलन बढ़ गया है। इसका फायदा सीधे कंपनी को मिलता है। कॉस्ट कटिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट (सीडब्ल्यूए) कहलाते हैं। ये किसी भी कंपनी की बिजनेस पॉलिसी तैयार करने, स्ट्रेटिजिक डिसीजन उपलब्ध कराने, फाइनेंशियल रिपोर्ट प्रेजेंट करने संबंधी कार्य करते हैं। सीडब्ल्यूए किसी भी कंपनी के लाभ को बढ़ाते हैं तथा खर्च में कटौती का पूरा खाका भी खींचते हैं। इसके अलावा ये कंपनी के मैनेजर के साथ बैठ कर किसी विशेष प्रोजेक्ट के लिए बजट भी तैयार करते हैं। सीडब्ल्यूए का काम बहुत ही जिम्मेदारी भरा तथा चुनौतीपूर्ण होता है। जनरल मैनेजमेंट एवं कम्युनिकेशन स्किल इस फील्ड के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। लिखने-बोलने में दक्षता पॉलिसी तैयार करने तथा प्रेजेंटेशन के वक्त काम आते हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि एक सीडब्ल्यूए का काम बड़े लक्ष्य के समान है।
कॉस्ट कटिंग, वर्क अकाउंटिंग तथा अकाउंटिंग मैनेजमेंट जैसे विषयों की पढ़ाई पर अधिक जोर दिया जा रहा है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में हर बड़ी कंपनी के अंदर कॉस्ट एंड वर्क अकाउटेंट की नियुक्ति अनिवार्य हो जाएगी। मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स की ओर से जारी नई अधिसूचना के तहत अब बल्क ड्रग, टेलीकम्युनिकेशन, शुगर, इलेक्ट्रिसिटी, पेट्रोलियम सहित करीब एक दर्जन निर्माता इकाइयों में कॉस्ट ऑडिट अनिवार्य होगी। इससे उत्पाद निर्माण में गुणवत्ता तथा उत्पाद लागत में कमी आने का फायदा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को मिलेगा। अब ऐसी निर्माता कंपनियों को कॉस्ट ऑडिट के दायरे में लाया गया है, जिनकी नेटवर्थ पांच करोड़ से ऊपर तथा टर्नओवर 20 करोड़ से अधिक होगा।
प्रैक्टिस और जॉब, दोनों की तैयारी करें छात्र
एक्सपर्ट व्यू/राकेश सिंह
(वाइस प्रेसीडेंट), आईसीडब्ल्यूएआई, दिल्ली
वर्तमान समय में सीए/सीएस के लिए क्या संभावनाएं नजर आ रही हैं?
भारत में जिस तरह से ग्रोथ हो रही है, उसे देख कर कहा जा सकता है कि यहां पर संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं। भारतीय कंपनियां अपना प्रोडक्ट विदेशों में भेज रही हैं तथा विदेशी कंपनियां भी यहां आ रही हैं। यहां के प्रोफेशनल्स भी विदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सीए व सीडब्ल्यूए जहां फाइनेंस और ऑडिट का काम देख रहे हैं, वहीं सीएस कंपनी के लीगल इश्यू पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
जॉब अथवा प्रैक्टिस में से बेहतर विकल्प क्या हो सकता है?
दोनों में से किसी एक का चयन छात्र पर निर्भर करता है। मेरी नजर में दोनों ही अपनी जगह पर ठीक हैं। जॉब में जहां प्रोफेशनल्स एक ही जगह पर नियत समय के दौरान काम करते हैं, वहीं प्रैक्टिस में उन्हें नई-नई चुनौतियों और नए-नए विषयों की जानकारी होती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। छात्रों को यही सलाह है कि वे दोनों ही चीजों की जानकारी लें।
रेगुलर क्लास न कर पाने वाले छात्र इस फील्ड में कैसे आ सकते हैं?
इसमें रेगुलर व डिस्टेंस लर्निग, दोनों ही तरीकों से कोर्स कराए जाते हैं। सीएस में ई-लर्निंग व आईसीडब्ल्यूए में पोस्टल कोचिंग का कॉन्सेप्ट प्रचलन में है। ई-लर्निंग में जहां छात्रों को वेब बेस्ड ट्रेनिंग, वीडियो लाइब्रेरी और वचरुअल क्लास की सुविधा मिलती है, वहीं आईसीडब्ल्यूए में पोस्टल छात्रों को टेस्ट पेपर भेज दिया जाता है और वे उसे सॉल्व कर भेजते हैं। जो इसमें पास होता है, उसी को एग्जाम में बैठने की अनुमति दी जाती है।
सक्सेस स्टोरी
हार्डवर्क ने पहुंचाया मुकाम तक
सौरभ टंडन
(सीए/सर्किल फाइनेंस हैड) 
व्योम नेटवर्क लि., लखनऊ
यदि छात्र कठिन परिश्रम को अपने जीवन का आधार बना लें तो सीए बनने की राह काफी आसान हो जाती है। इसमें सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
मैंने कॉमर्स से ग्रेजुएशन की है। जब मैं फर्स्ट ईयर में था, तभी से सीए की तैयारी शुरू कर दी थी। कोर्स के दौरान 1998 में मुझे एक सीए के अंडर रह कर तीन पेपर क्लीयर करने पड़े। यह जिन्दगी का सबसे कठिन दौर लग रहा था, क्योंकि इसमें रेगुलर पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप भी करनी थी। दोनों ही चीजें एक साथ चल रही थीं तथा दोनों में 100 फीसदी रिजल्ट देना था। मैंने हार न मानते हुए इसे एक चुनौती के रूप में लिया तथा पूरा करके दिखाया। मेरे नंबर भी अच्छे आए थे। बतौर सीए रजिस्ट्रेशन करा लेने के बाद मैंने एक प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरू किया। धीरे-धीरे काम में मजा आता गया और मैं उसमें रमता गया। आज मेरे पास करीब सात साल का अनुभव है और इस समय मैं टाटा मोबाइल और फ्यूपो की ज्वॉइंट वेंचर कंपनी व्योम नेटवर्क्स लिमिटेड में कार्यरत हूं।
इस फील्ड में आने वाले छात्रों से मैं यही कहूंगा कि इसमें कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि सारी कहानी आपकी मेहनत के बलबूते लिखी जाएगी।
रेगुलर तथा पत्रचार कोर्स मौजूद
आज के दौर में केवल बीकॉम या एमकॉम से काम नहीं चलता। इसके साथ कुछ व्यावसायिक डिग्रियां भी जरूरी हो गई हैं। इनसे जॉब की राह काफी आसान हो जाती है। सीए/सीएस व आईसीडब्ल्यूए भी एक ऐसा ही व्यावसायिक कोर्स है। ये सभी कोर्स भारत सरकार की संसद के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित हैं। सीए में तीन लेवल के कोर्स मौजूद हैं, जिनमें दाखिला साल भर में दो बार होता है। एंट्री लेवल पर छात्रों को कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी) देना होता है। सेकेंड स्टेज पर प्रोफेशनल कंपिटेंस कोर्स (पीसीसी) होता है। इसके बाद उन्हें 100 घंटे की आर्टिकिल ट्रेनिंग इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग (आईटीटी) में बैठना होता है। तीसरा लेवल फाइनल कोर्स होता है। इसमें रजिस्टर होने के लिए पीसीसी क्लीयर करना होता है। तभी उसका दाखिला जनरल मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन स्किल्स कोर्स (जीएमएससी) में होता है। फाइनल एग्जाम पास करने के बाद छात्र सीए बनने के लिए दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) में रजिस्ट्रेशन कराते हैं। सीएस के लिए दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेकेट्ररीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) देश भर में संचालित सेंटरों के जरिए तीन लेवल पर कोर्स कराता है। पहले लेवल पर फाउंडेशन प्रोग्राम, दूसरे लेवल पर एग्जीक्यूटिव तथा तीसरे लेवल पर प्रोफेशनल प्रोग्राम होता है। सीएस कोर्स में दाखिला जून व दिसंबर में होता है। दाखिला प्रवेश परीक्षा अथवा इंटरव्यू के आधार पर न होकर रजिस्ट्रेशन पर निर्भर होता है।
विभिन्न प्रोग्राम में रजिस्ट्रेशन की अवधि भिन्न-भिन्न होती है। छात्रों को फाउंडेशन में चार पेपर, एग्जीक्यूटिव छह पेपर तथा प्रोफेशनल प्रोग्राम में अलग-अलग मॉडय़ूल के कुल आठ पेपर पढ़ाए जाते हैं। परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को कई तरह की ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ता है।
सीडब्ल्यूए बनने के लिए रेगुलर तथा डिस्टेंस लर्निग के कोर्स मौजूद हैं। इनके लिए दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। ये कोर्स तीन चरणों- फाउंडेशन, इंटरमीडिएट एवं फाइनल एग्जाम के रूप में होते हैं। इसमें दाखिले के लिए उम्र-सीमा का भी प्रावधान है।
फैक्ट फाइल
प्रमुख प्रशिक्षण संस्था
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)
वेबसाइट: www.icai.org
(हेड ऑफिस नई दिल्ली में स्थित है। इसके चार रीजनल ऑफिस मुंबई, कोलकाता, चेन्नई तथा कानपुर में हैं, जबकि पूरे देश में 87 ब्रांच और 9 चैप्टर मौजूद हैं)
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेकेट्ररीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई)
वेबसाइट: www.icsi.edu
(हेड ऑफिस नई दिल्ली में स्थित है। इसके चार रीजनल ऑफिस दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई में हैं।)
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएसआई)
वेबसाइट: www.icwai.org
(हेड ऑफिस कोलकाता में स्थित है। इसके चार रीजनल ऑफिस दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई में हैं। इसके कुल 90 चैप्टर हैं।)
योग्यता
सीए के सीपीटी लेवल प्रोग्राम में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए छात्र को 10वीं पास होना जरूरी है। बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद वह सीपीटी में बैठ सकता है। यह परीक्षा ऑनलाइन व ऑफलाइन, दोनों तरीके से होती है। इसके बाद वह दूसरे व तीसरे लेवल की परीक्षा देता है। सीएस में रजिस्ट्रेशन बारहवीं (फाइन आर्ट को छोड़कर) के बाद होता है। यदि छात्र के पास कॉमर्स में बैचलर और मास्टर डिग्री है तो वह फाउंडेशन की बजाय सीधे एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम में दाखिला ले सकता है। इसी तरह से सीडब्ल्यूए में प्रवेश के लिए बारहवीं पास होना तथा 17 साल की उम्र होना जरूरी है। तभी फाउंडेशन कोर्स में रजिस्ट्रेशन मिल पाता है।
स्किल्स
सीए/सीएस/सीडब्ल्यूए खासकर उन्हीं लोगों के लिए हैं, जो दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कठिन मेहनत की क्षमता रखते हों। इन प्रोफेशनल प्रोग्राम को कंपलीट करने में ही छात्रों को अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है। कॉमनसेंस, प्रशासनिक कौशल, लीगल एप्टीटय़ूड, गणितीय कौशल, निर्णय लेने की क्षमता, करेंट अफेयर्स से अपडेट होना जरूरी है।
वेतनमान
बतौर सीए/सीएस और सीडब्ल्यूए डोमेस्टिक कंपनियों में प्रोफेशनल्स को जूनियर लेवल पर 15000-20000 रुपए प्रतिमाह तथा सीनियर लेवल पर 30000-35000 रुपए प्रतिमाह मिलता है, जबकि दो-तीन साल का अनुभव होने पर यही राशि 55000-60000 रुपए प्रतिमाह के करीब पहुंच जाती है। विदेशी कंपनियां इन्हें लाखों के पैकेज पर रख रही हैं। इनकी सेलरी अनुभव बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती जाती है। यदि आप विदेश जाकर या अपनी प्रैक्टिस कर रहे हैं तो फिर आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती।
पॉजिटिव व निगेटिव
ग्रोथ की व्यापक संभावनाएं 
आकर्षक सेलरी व प्रतिष्ठा 
निजी प्रैक्टिस की संभावना 
अधिक परिश्रम 
जिम्मेदारी एवं चुनौतीपूर्ण कार्य(संजीव कुमार सिंह,हिंदुस्तान,दिल्ली,10.8.11)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से परीक्षाएं होंगी पारदर्शी

Posted: 12 Aug 2011 06:30 AM PDT

सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से देश के करोड़ों विद्यार्थियों को सुकून मिला है, जिसमें सूचना के अधिकार के तहत जांची गयी उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने का हक मिला है। अकसर ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं जब विद्यार्थियों को लगता है कि उनकी योग्यता का सही मूल्यांकन नहीं हुआ। यद्यपि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वाले सभी परीक्षकों की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं खड़े किये जा सकते, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। देखा गया है कि उत्तर पुस्तिकाओं की अधिक संख्या या फिर अच्छा सुलेख न हो पाने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के साथ न्याय नहीं हो पाता। कई बार भाषा की समस्या भी आड़े आती है। यह भी सही है कि कई राज्यों में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वालों को उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता है, अत: वे चलताऊ किस्म का मूल्यांकन कर बैठते हैं। हालांकि हालिया फैसले की कई व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं, लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि इसके बावजूद परीक्षार्थियों को उनका हक मिल सकेगा। जैसे उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब 38 लाख परीक्षार्थी दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में बैठते हैं तो ऐसे में लाखों परीक्षार्थियों को इस अधिकार की सुविधा प्रदान करना काफी कठिन होगा। जहां एक ओर शिक्षकों की सजगता से मूल्यांकन का स्तर सुधरेगा, वहीं दूसरी ओर कालेजों व विश्वविद्यालयों पर काम का अधिक बोझ भी पड़ेगा। सामान्य तौर पर ऐसे परीक्षार्थियों की संख्या काफी अधिक होती है जो अपने अंकों से संतुष्टï नहीं होते। हर किसी को लगता है कि उसे अधिक अंक मिलने चाहिए थे। लेकिन किसी सीमा तक यह पहल उपयोगी जरूर हो सकती है। इसका एक विकल्प यह भी है कि आईआईटी की तर्ज पर उत्तर पुस्तिका के उत्तरों को ऑनलाइन कर दिया जाये ताकि छात्र अपना मूल्यांकन खुद कर सकें।

बहरहाल, अब सुप्रीम कोर्ट के ताजातरीन फैसले से हर छात्र का उत्तर पुस्तिका को देख पाना एक हक जैसा हो जायेगा। वास्तव में यह किसी भी परीक्षार्थी के लिए मौलिक अधिकार सरीखा है। सबसे महïत्वपूर्ण बात यह है कि यह सूचना के अधिकार की अगली कड़ी है और इसकी व्यवस्था करना अधिकारियों का दायित्व है। इसका अभिप्राय: यह है कि देश में किसी परीक्षा की उत्तर पुस्तिका की जांच की जानकारी संबंधित एजेंसी को उपलब्ध करवायी जायेगी। कई मामलों में देखने में आया है कि किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में या शोध हेतु होने वाली प्रवेश परीक्षा के परीक्षार्थी की कापी हिंदी में होने के कारण जांची तक नहीं जाती। ऐसे परीक्षार्थी भी सूचना के अधिकार के तहत अपनी पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की स्थिति जान पायेंगे। अकसर परीक्षा का परिणाम आने पर विद्यार्थी अपने अभिभावकों से कहते नजर आते थे कि उसने पेपर तो अच्छा किया था, लेकिन नंबर नहीं आये। अब तमाम ऐसी शंकाओं के निराकरण का मार्ग प्रशस्त हो पायेगा। इस अधिकार से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले वे लोग भी सजग होंगे जो अब तक मूल्यांकन के कार्य को हल्के में लेते रहे हैं। अकसर देखा जाता है कि परीक्षा परिणामों के दिनों में कई छात्र-छात्राएं मनोनुकूल परीक्षा परिणाम न आने पर आत्महत्याएं तक कर लेते हैं, कई छात्र घर छोड़कर भाग जाते हैं। अब ऐसे विद्यार्थियों के जीवन में एक उम्मीद की किरण जगेगी कि पुनर्मूल्यांकन से वास्तविकता सामने आ सकती है। वास्तव में देश में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने व मूल्यांकन करने वालों को जवाबदेह बनाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट की यह पहल इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी(संपादकीय,दैनिक ट्रिब्यून,12.8.11)।

नई दुनिया का संपादकीय भी देखिएः
सूचना के अधिकार कानून ने हमारे व्यवस्था तंत्र में वर्षों से कायम रहस्य और गोपनीयता की कई दीवारें गिराने का काम किया है। इसी सिलसिले में स्कूलों, कॉलेजों और प्रतियोगी परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली भी अब रहस्य या गोपनीयता के दायरे से मुक्त हो गई है। यानी अब इन परीक्षाओं के नतीजे आने के बाद छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देख सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि परीक्षाओं की जांची गई उत्तर पुस्तिकाएं सूचना के दायरे में आती हैं और सूचना के अधिकार कानून के तहत परीक्षार्थियों को इन्हें देखने का अधिकार है तथा इसी कानून के तहत परीक्षाएं आयोजित करने वाली निकाय के अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे इन उत्तर पुस्तिकाओं को छात्रों को उपलब्ध कराएं। शीर्षस्थ अदालत ने यह व्यवस्था ५ फरवरी, २००९ को कलकत्ता हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए दी है। इस व्यवस्था को शिक्षा मंडलों, विश्वविद्यालयों तथा कुछ सार्वजनिक निकायों की प्रतियोगी परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली को साफ-सुथरा, जिम्मेदार और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सटीक व्यावहारिक पहल कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपील करने वाली परीक्षक संस्थाओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि जांची गई उत्तर पुस्तिकाएं छात्रों को दिखाने से समूची परीक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। अदालत की इस पहल से छात्रों को अपनी शंकाओं के वे जवाब मिल सकेंगे जिन्हें अब तक गोपनीयता कानून की आड़ में देने से इनकार कर दिया जाता था। हालांकि ऐसा नहीं है कि परीक्षाएं आयोजित करने वाले ज्यादातर संस्थानों के परीक्षा परिणामों में घपले ही घपले होते हों या ज्यादातर छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का गलत या पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन कर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जाता हो। लेकिन यह भी तथ्य है कि कई परीक्षाओं के परिणामों में प्रतिभा और मूल्यांकन के बीच कोई साम्य नहीं होता है। इसके पीछे कई वजहें हैं। मसलन मूल्यांकन करने वाले की संबंधित विषय में अपर्याप्त योग्यता, मूल्यांकन की पूर्वाग्रही मानसिकता, रसूखदारों की संतानों को ज्यादा नंबर देने की द्रोणाचार्य वाली परंपरा और पैसे के लिए नंबर घटाने-बढ़ाने का खेल लंबे अरसे से स्कूल-कॉलेजों में चला आ रहा है। इसी के चलते आमतौर पर जब भी स्कूल, कॉलेजों और प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजों में अच्छी पढ़ाई करने वाले छात्र यह पाते हैं कि नतीजे उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं तो उनके लिए इसकी वजह समझ पाना काफी मुश्किल होता है और कई छात्र तो निराश होकर गलत राह पर चल पड़ते हैं या आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट की इस ताजा पहल से ये सारे अप्रिय सिलसिले अब बहुत हद तक थम जाएंगे।

नवभारत टाइम्स के विचार देखिएः
परीक्षार्थियों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत परीक्षा की कॉपी देखी जा सकती है। एक परीक्षार्थी को इसका पूर्ण अधिकार है। असल में स्कूल, कॉलेज और खासकर प्रतियोगिता परीक्षाओं में अपने प्रदर्शन को लेकर स्टूडेंट्स हमेशा संशय में रहा करते थे। उन्हें समझ में नहीं आता था कि आखिर किन कारणों से उनके नंबर कम आए, या क्यों नहीं उनका नौकरी में चयन हो पाया। स्कूल-कॉलेजों में तो पुनर्मूल्यांकन की कुछ न कुछ व्यवस्था की गई है, पर विभिन्न नौकरियों के लिए चयन परीक्षाएं आयोजित करने वाले संस्थानों ने तो इसे रहस्य बना रखा था। उन्हें मंजूर नहीं था कि कोई उनकी चयन प्रक्रिया को जानने की कोशिश करे या उस पर सवाल उठाए। उनकी दलील रही है कि वे उत्तर पुस्तिकाओं के संरक्षक हैं, जो उनके पास विश्वास के आधार पर सुरक्षित रहती हैं। 

लेकिन अदालत ने इसे नहीं माना। दरअसल यह मामला पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में आया था। हाईकोर्ट ने भी यही कहा था कि परीक्षा आयोजित करवाने वाले निकाय उत्तर पुस्तिकाओं के संरक्षक होने का दावा कर उन्हें सार्वजनिक करने से इनकार नहीं कर सकते। उत्तर पुस्तिकाएं भी एक सूचना हैं, जिन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसमें गोपनीयता नहीं होनी चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी है। इस बात पर विशेषज्ञों में विवाद होता रहा है कि परीक्षा की वर्तमान पद्धति उचित है या नहीं। लेकिन तमाम बहसों के बावजूद अभी तक हम इसका विकल्प नहीं ढूंढ पाए हैं। 

ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि वर्तमान ढांचे को ही बेहतर बनाया जाए और इसी में यथासंभव प्रयोग किए जाएं। इसका एक रास्ता है -इसे पारदर्शी बनाना। जब एक परीक्षार्थी अपनी कॉपी देखेगा, तभी तो अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सकेगा। अपनी खूबियों-खामियों को समझ सकेगा। इससे उसे अगली तैयारी में सहायता मिल सकेगी। इससे परीक्षकों पर भी दबाव पैदा होगा। अभी कौन परीक्षक क्या करके निकल जा रहा है, इसकी मॉनिटरिंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। यह मानकर चला जाता है कि किसी विषय के विशेषज्ञ ने सही ही फैसला किया होगा। लेकिन जब जांची हुई कॉपियों के देखने की व्यवस्था होगी तो वे सचेत रहेंगे ताकि कोई उन पर कोई उंगली न उठा सके। 

अभी न जाने कितने परीक्षार्थी किसी परीक्षक की लापरवाही या अगंभीर रवैये का खमियाजा भुगतते होंगे। सच कहा जाए तो अदालत के इस फैसले ने कई बंद दरवाजे खोल दिए हैं। अब बहस सिलेबस और प्रश्नपत्र के पैटर्न से आगे बढ़कर जांच के तरीके पर भी जाएगी, खासकर सब्जेक्टिव प्रश्नों के संदर्भ में। शिक्षा और परीक्षा को जितना खोला जाएगा, उसमें उतनी ही वैज्ञानिकता, व्यापकता और ताजगी आएगी। दरअसल इस क्षेत्र को उन कूढ़मगज नौकरशाहों से मुक्त करने की जरूरत है, जो सारी चाबियां अपनी मुट्ठी में रखना चाहते हैं और इसलिए नई पहलों का रास्ता रोके रखते हैं।

दैनिक भास्कर ने इस विषय पर कल ही अपना संपादकीय लिखा थाः
अपनी उत्तर पुस्तिका मांगना अब हर विद्यार्थी का अधिकार है। इससे सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत नागरिकों के सशक्तीकरण की परिघटना एक कदम और आगे बढ़ी है। अब यह उम्मीद करने की पूरी वजह है कि इसका सकारात्मक प्रभाव शिक्षा के हर चरण पर पड़ेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि जांची गई कॉपियां 'सूचना' की परिभाषा के तहत आती हैं और इसलिए इसे आरटीआई के तहत उपलब्ध कराना सार्वजनिक अधिकारियों का कर्तव्य है। इस तरह अब कोई भी परीक्षा, जिसे चाहे कोई भी एजेंसी आयोजित करती हो, उसकी कॉपियां आरटीआई के तहत उस एजेंसी को देनी होंगी। 

इससे अनेक छात्रों की इस पुरानी शिकायत का निवारण हो सकेगा कि उन्होंने लिखा तो अच्छा था, लेकिन नंबर नहीं आए। ऐसे कई छात्रों की शिकायत में दम रहता है। इसका कारण यह है कि अक्सर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच को परीक्षा एजेंसियां गंभीरता से नहीं लेती हैं। 

कॉपी जांचने के लिए हास्यास्पद रूप से कम पैसा दिया जाता है। नतीजतन, शिक्षकों के लिए कॉपी जांचना किसी तरह निपटा देने का एक काम बन जाता है। बाहरी लोगों से कॉपी जंचवाने के बढ़ते चलन के साथ स्थिति और बदतर हो गई है। 

ऐसे में अब जबकि जांची कई कॉपियों पर गोपनीयता का आवरण नहीं रहेगा, परीक्षा एजेंसियां पहले जैसी 'आजादी' नहीं बरत पाएंगी। आरटीआई ने पहले से ही शिक्षा संस्थानों को ज्यादा जवाबदेह बनाया है, लेकिन अब खासकर उस क्षेत्र को ही ध्यान में रखकर दिया गया फैसला उन पर और परीक्षा व्यवस्था पर निगरानी का कारगर जरिया बन सकता है। 

सर्वोच्च न्यायालय ने इन एजेंसियों की यह दलील नहीं मानी कि अगर उत्तर पुस्तिकाएं मांगना छात्रों का अधिकार बन गया, तो ऐसी अर्जियों की बाढ़ आ जाएगी और उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। अदालत ने इन व्यावहारिक दिक्कतों पर पारदर्शिता को तरजीह दी। यह स्वागतयोग्य है।

वाइन टेस्टिंग में करिअर

Posted: 12 Aug 2011 04:30 AM PDT

वाइन और अल्कोहल के बढ़ते बाजार के बीच वाइन टेस्टिंग प्रोफेशनल्स की मांग भी बढ़ी है।


भले ही शराब पीना सेहत की दृष्टि से हानिकारक है, पर यह भी सच है कि इसके उपभोक्ताओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि इससे संबंधित जो भी उत्पाद बाजार में आएं, वह ऐसे हों, ताकि लोगों के स्वास्थ्य पर उनका विपरीत असर कम-से-कम पड़े और लोगों को उनका स्वाद भाए। इसी काम के लिए वाइन टेस्टर की जरूरत पड़ती है, जो किसी भी वाइन को मार्केट में उतारने से पहले उसे चखते हैं। यह पूरी प्रक्रिया वाइन टेस्टिंग कहलाती है। यह एक ऐसी विधा है, जिसमें शराब में एल्कोहल तथा उसकी क्षमता का बारीकी से परीक्षण किया जाता है। वाइनेक्सपो/ आईडब्ल्यूएसआर - 2010 के सर्वे पर गौर करें तो शराब की तेजी से खपत करने वाले देशों की श्रेणी में भारत का स्थान दसवां है। न सिर्फ शहरी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी काफी खपत है। स्वाभाविक है कि ऐसे माहौल में वाइन टेस्टिंग प्रोफेशनल्स के लिए मौके भी बढ़ते ही जा रहे हैं।

सूंघने व चखने का कौशल
शराब को चखना एक मजेदार कैरियर है, लेकिन इसमें कठिनाइयां भी कम नहीं हैं। जरा सी चूक पर कंपनी की साख खराब होने का खतरा रहता है। इसलिए यह सारा काम प्रैक्टिस और नॉलेज पर टिका होता है। ज्यादातर वाइन टेस्टर शराब बनाने की तकनीक, शराब को टेस्ट करने के तरीके एवं उसके तापमान, रंग, फ्लेवर आदि के बारे में जानकारी रखते हैं।

स्नातक के बाद मिलेगा दाखिला
इसके विभिन्न कोर्सेज के लिए जो मापदंड तय किया गया है, उसके हिसाब से छात्र को मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी स्ट्रीम में स्नातक होना आवश्यक है। कोर्स के पश्चात वाइन टेस्टर को सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। इसके कोर्सेज मुख्यतः दो लेवल में आयोजित होते हैं -
0 लेवल - ।- फाउंडेशन कोर्स
0 लेवल -।।- इंटरमीडिएट कोर्स
संबंधित पाठ्यक्रमों में शराब का इतिहास, शराब बनाने के तरीके, अंगूर की वैरायटी, शराब के विभिन्न प्रकारों, वाइन सर्विस, स्टोरेज आदि को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त शराब के शारीरिक एवं मानसिक नुकसान, रिएक्शन करने पर प्रारंभिक लक्षण, शराब बनाने की विधियों आदि की जानकारी प्रदान की जाती है।

रोजगार की संभावनाएं
युवाओं में वाइन टेस्टिंग एक आकर्षक कैरियर के रूप में उभरकर सामने आया है। हॉस्पिटैलिटी से लेकर शराब बनाने वाली कंपनियों, वाइन शॉप, रेस्टोरेंट, बार आदि में बतौर वाइन टेस्टर काम किया जा सकता है। शराब का आयात-निर्यात करने वाली कंपनियां भी इन प्रोफेशनल्स को अपने यहां रखती हैं।

मुख्य संस्थान
एशिया वाइन सर्विस एंड एजुकेशन सेंटर, नई दिल्ली
मणिपाल यूनिवर्सिटी, मणिपाल
केबीआर स्कूल ऑफ वाइन, मुंबई
इंस्टीट्यूट ऑफ वाइन एंड बेवरेज स्टडीज, नई दिल्ली
वाइन एकेडमी ऑफ इंडिया, चेन्नई

(नमिता सिंह,अमर उजाला,10.8.11)

पीजी डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग ऐंड जीआईएस

Posted: 12 Aug 2011 03:30 AM PDT

नक्शा निर्माण और इससे जुड़े अन्य तकनीकी पक्षों में दिलचस्पी रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह कोर्स महत्वपूर्ण है।

रिमोट सेंसिंग और ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की उपयोगिता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। न सिर्फ सरकारी संस्थानों को, बल्कि निजी कंपनियों को भी इसके प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है। कई ऐसी फील्ड्स हैं, जैसे भौगोलिक नक्शे का निर्माण, टाउन प्लानिंग, फॉरेस्ट डेवलपमेंट, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, वेस्ट लैंड मैपिंग, एग्रीकल्चर एरिया मैपिंग, टूरिस्ट साइट मैनेजमेंट ऐंड प्लानिंग आदि, जहां इसके प्रोफेशनल्स की मांग बनी रहती है। ऐसे में इससे संबंधित कोर्स वर्तमान माहौल में काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसा ही एक कोर्स है पीजी डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग ऐंड ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस), जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा कराया जाता है।

पाठ्यक्रम की रूपरेखा
इस डिप्लोमा कोर्स की अवधि 1 साल की है और इस प्रोग्राम में कुल 20 सीटें उपलब्ध हैं।

शैक्षणिक योग्यता
इस कोर्स में दाखिला लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए जरूरी है कि वे किसी विषय में स्नातक हों। वैसे तो किसी भी संकाय के छात्र इस कोर्स में दाखिला ले सकते हैं, पर कंप्यूटर और मैथमेटिक्स के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।


चयन प्रक्रिया
जो अभ्यर्थी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना चाहते हैं, उनका चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा। लिखित परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप के मेंटल एबिलिटी व रीजनिंग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। 

कैसे करें आवेदन
आवदेन-पत्र मंगाने के लिए कोर्स को-ऑर्डिनेटर, पीजी डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग ऐंड जीआईसी के नाम इलाहाबाद में देय 350 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भेजें। इसे संस्थान की वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है(अमर उजाला,10.8.11)।

उत्तराखंडःबच्चों को पीटा तो रद्द होगी विद्यालय की मान्यता

Posted: 12 Aug 2011 01:25 AM PDT


स्कूलों में प्रधानाचार्य या शिक्षकों ने बच्चों के संग मार-पिटाई की तो स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अगर कोई शिक्षक बच्चों की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना का दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सेवा नियमावली के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी के साथ अगर स्कूल के प्रबंध तंत्र ने दोषी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की तो स्कूल की मान्यता भी रद कर दी जाएगी। बता दें कि 2009 में 'सपोर्टिंग पॉजिटिव अल्टरनेटिव फॉर रेजिंग काइंडनेस इन एजुकेशन' परियोजना के तहत शिक्षा विद भाजपा विधायक कैरन मेयर, बाल मनोविज्ञानी अपर्णा मैसी, अशोक मैसी और अर्चना मधवाल के ने उत्तराखंड, हिमाचल व दिल्ली के पब्लिक स्कूलों में शारीरिक दंड की स्थिति पर अध्ययन किया था। जिसमें यह निराशाजनक तथ्य सामने आया था कि स्कूलों के 64.4 फीसद बच्चे पिटते-पिटते, शिक्षकों से अपनी पिटाई को अपनी नियति मानने लगे हैं, यहां तक कि वे ये मानने लगे कि उनकी पिटाई उनके भले के लिए होती है। केवल 35.6 फीसद बच्चे ही स्कूल में शारीरिक प्रताड़ना का विरोध करते थे। अध्ययन में यह बात भी सामने आई थी कि सभी स्कूलों में विद्यार्थियों के छड़ी से पीटन, टेबल परखड़ा करना, मुर्गा बनाना, बेइज्जत करना, डस्टर फेंककर मारना, बाल खींचना, चिकोटी काटना, थप्पड़ मारना, स्कूल के मैदान के चक्कर लगाना, धूप में खड़ा करना जैसे शारीरिक व मानसिक दंड आम फहम हैं। पिछले दिनों प्रदेश में शिक्षकों द्वारा बच्चों के कान कतरने, दांत तोड़ देने, धूप में खड़ा कर देने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी तरह के स्कूलों में शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना पर पाबंदी लगाने वाला यह शासनादेश काफी महत्वपूर्ण साबित होगा(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,12.8.11)।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के बारे में जानिए

Posted: 12 Aug 2011 01:19 AM PDT

कॉमनवेल्थ मामले को लेकर पिछले दिनों आई रिपोर्ट के कारण कैग एक बार फिर से चर्चा में है।

भारत में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल - कैग) एक ऐसी संवैधानिक संस्था है जो केंद्र, राज्य सरकारों के विभागों और संघ एवं राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित संस्थानों के आय-व्यय की जांच करती है। यही संस्था सार्वजनिक धन की बरबादी के मामलों को समय-समय पर प्रकाश में लाती है।

कैग की नियुक्ति

कैग की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। कैग को उसके पद से तभी हटाया जा सकता है जब सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा पारित समावेदन राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। कैग भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी और पद पर नहीं होगा। कैग का वेतन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन के बराबर ही रखा गया है।

कैग की भूमिका
भारत में नियंत्रक-महालेखा परीक्षक संसद तथा राज्य विधान मंडलों की वित्तीय समितियों की कार्यप्रणाली में प्रमुख भूमिका निभाता है। कैग को उसके सांविधिक अधिकारों के दायरे तथा कामकाज के बारे में सलाह देने वाले नये 15 सदस्यीय लेखापरीक्षा सलाहकार बोर्ड का गठन हाल ही में किया गया है। भारत के कैग फिलहाल विनोद राय हैं। वह देश के 11वें कैग हैं। आजाद भारत के पहले कैग वी. नरहरि राव थे।

लेखापरीक्षा का स्वरूप
संवैधानिक दायित्वों को पूरा करते समय नियंत्रक-महालेखा परीक्षक सरकारी व्यय के विभिन्न पहलुओं की जांच करता है। केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की प्राप्तियों की लेखापरीक्षा करते समय नियंत्रक-महालेखापरीक्षक यह भी पता लगाता है कि कि राजस्व का निर्धारण, संग्रहण एवं आबंटन कानून के अनुसार किए गए हैं अथवा नहीं तथा राजस्व, जो कानूनी तौर पर सरकार के पास आना चाहिए, की कोई हानि तो नहीं हुई है।
(रूबी प्रसाद,अमर उजाला,10.8.11)

आईपीयू और एनएलयू में नए कोर्स में दाखिले शुरू

Posted: 12 Aug 2011 01:02 AM PDT

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में कई कोर्सो की शुरुआत की गई है। इन डिप्लोमा एवं एडवांस डिप्लोमा कोर्स कर नौकरी के लिए नई राहें खुल सकती हैं और नौकरीशुदा लोग प्रमोशन की दावेदारी कर सकते हैं।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेएजुएट डिप्लोमा इन अर्बन एनवायरमेंटल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत की गई है। इसमें दाखिला के लिए आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। इस कोर्स की शुरुआत करने के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और सेंटर फॉर एनवायरमेंटल लॉ के बीच करार हुआ है। ग्रेजुएट छात्र इस कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके साथ ही किसी संस्थान में काम करने वाले छात्र भी दाखिला ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें दो साल का अनुभव प्रमाण पत्र लगाना होगा। एनएलयू के रजिस्ट्रार श्रीकृष्णदेव राव ने बताया कि एक साल में कोर्स को पूरा किया जाएगा। मेरिट लिस्ट के आधार पर दाखिला होगा। पढ़ाई डिस्टेंस और ऑनलाइन दोनों स्तर पर कराई जाएगी। आईपीयू में भी बेसिक कोर्स इन बिहेवियर टेस्टिंग और एडवांस कोर्स इन बिहेवियर टेस्टिंग में दाखिला प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। इन दोनों कोर्सो में आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 28 अगस्त है। बेसिक कोर्स की अवधि दो महीने की है और एडवांस कोर्स की चार महीने की अवधि है। फॉर्म यूनिवर्सिटी की वेबसाइट www.ipu.ac.in पर डाउनलोड कर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में जमा कर सकते हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,11.8.11)।

जेएनयू : शैक्षणिक कॉम्प्लेक्स में शुरू हुआ वाई-फाई

Posted: 12 Aug 2011 01:01 AM PDT

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का शैक्षणिक कॉम्प्लेक्स पूरी तरह वाई-फाई कर दिया है। विश्वविद्यालय के सभी केंद्र और स्कूलों में अब इस सुविधा का प्रयोग किया जा सकेगा।

जेएनयू के हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर गंगा सहाय मीणा ने कहा कि जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों के लिए ये एक बड़ा तोहफा है। जेएनयू के शैक्षणिक कॉम्प्लेक्स कर देने से छात्रों और शिक्षकों को सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर छात्रवासों को भी वाई-फाई कर देना चाहिए।


जेएनयू के इंवायरनमेंट साइंस विभाग में पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने कहा कि जेएनयू ने एक बड़ी सुविधा प्रदान की है। विवि का ये कदम पढ़ाई को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगा(हिंदुस्तान,दिल्ली,11.8.11)।

आईआईटी दिल्ली में हो सकेगा हर प्रयोग

Posted: 12 Aug 2011 12:59 AM PDT

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली में अब हर तरह के प्रयोग संभव हो सकेंगे। जल्द ही आईआईटी में एक बहुउपयोगी प्रयोगशाला तैयार हो जाएगी। इस प्रयोगशाला में आईआईटी के बाहर के शोधकर्ता भी प्रयोग कर सकेंगे।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि एक नई तरह की प्रयोगशाला बनाई जाएगी, जिसमें हर तरह के प्रायोगिक उपकरण मौजूद होंगे। इस प्रयोगशाला का प्रयोग बाहर के लोगों के लिए भी होगा। उन्होंने कहा कि कई विषयों के प्रायोगिक उपकरण ऐसे होते हैं जो कि हर संस्थान या कॉलेज में उपलब्ध नहीं होते हैं। ऐसे में इस तरह की सुविधा शोध को बढ़ावा देने का काम करेगी। इस प्रयोगशाला को सेंट्रल रिसर्च फैसलिटी नाम दिया गया है।

उन्होंने बताया कि इस प्रयोगशाला में कई इंटरडिसिप्लनरी विषयों के साथ-साथ इंवायरनमेंट साइंस, बायोलॉजिकल साइंस, एटमॉस्फिरक साइंस आदि के नवीनतम उपकरण उपलब्ध होंगे। ज्ञात हो कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी ऐसी ही एक प्रयोगशाला एआईआरएफ (एडवांस इंस्ट्रुमेंटेशन रिसर्च फैसलिटी) नाम से बनी हुई है। प्रो. प्रसाद ने बताया कि आईआईटी में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इस बार आईआईटी को शोध के लिए अधिक फंड भी मिला है।


यह फंड 120-130 करोड़ रुपए का है। पिछले वर्ष ये फंड सौ करोड़ रुपए से कम था। उन्होंने बताया कि पीएचडी की संख्या में भी आईआईटी में इजाफा हुआ है। इस बार करीब 1400 पीएचडी का नामांकन आईआईटी में हुआ है।

आईआईटी के नए केंद्र
आईआईटी में नैनो फेब्रिकेशन और नैनो डिवाइस का एक केंद्र स्थापित होने जा रहा है। कि इस तकनीक पर काम करने वाला देश का तीसरा केंद्र होगा। आईआईटी मुंबई और आईआईएससी, बेंगलुरू सिलिकॉन डिवाइस पर काम करते हैं पर इस केंद्र में नॉन-सिलिकॉन डिवाइस पर काम होगा। इस केंद्र में नैनोटेक्नोलॉजी की सभी सुविधाएं जैसे कि नैनो डिवाइस का फेब्रिकेशन, लीथोग्राफी, इलेक्ट्रॉन, बीम आदि की जानकारी उपलब्ध होगी। इस केंद्र को बनाने का सबसे बड़ा मकसद ऐसी नैनो डिवाइस का निर्माण करना है जो समाज के लिए महत्वपूर्ण हो। इस केंद्र में मुख्यत: नैनो सेंसर, बायोलॉजिकल सेंसर, फ्यूल सेल आदि पर ध्यान दिया जाएगा(हिंदुस्तान,दिल्ली,11.8.11)

कानपुरःयूआईईटी में शिक्षक संकट गहराया

Posted: 12 Aug 2011 12:46 AM PDT

मनमाफिक वेतनमान न मिलने से नाराज यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) सीएसजेएम विश्वविद्यालय के 35 शिक्षकों ने कार्यभार नहीं संभाला है। रीडर, लेक्चरर पद पर नियुक्ति मिलने के बाद भी इन शिक्षकों ने नौकरी छोड़ दी है।

यूआईईटी में शिक्षकों का संकट और गहरा गया है। सबसे पहले कंप्यूटर अप्लीकेेशन के शिक्षक डा. गिरीश सिंह ने नौकरी छोड़ने का अप्लीकेशन दिया। अब साक्षात्कार से नियुक्ति पाने वाले 40 में से 35 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण करने से इंकार कर दिया है। शिक्षकों का तर्क है कि एआईसीटीई की अर्हता से चयन किया गया है। अब पांचवें वेतनमान और 19600 रुपए के फिक्स वेतनमान पर पढ़ाने का दबाव डाला जा रहा है। इस कारण आईटी डिपार्टमेंट के दो रीडर, चार लेक्चरर ने कार्यभार नहीं संभाला है। केमिकल इंजीनियरिंग, मैटेरियल साइंस, इलेक्ट्रानिक्स में नियुक्ति पाने वाले भी नहीं आए। मैथ में चार शिक्षकों ने कार्र्यभार संभाला था। इसमें से एक छोड़कर चले गए हैं। मेकेनिकल इंजीनियरिंग में कार्यभार संभालने वाली शिक्षक भी नौकरी छोड़कर चली गई हैं। नई व्यवस्था में तीन साल के अनुबंध का प्रावधान कर दिया गया है, जो ठीक नहीं है। शिक्षकों की कमी से शैक्षिक, शोध की गतिविधियां प्रभावित हैं। 
पांचवां, फिक्स वेतनमान मिलने से अच्छे शिक्षक नहीं आ रहे हैं। अब व्यवस्था बदलनी होगी, तभी शिक्षक आएंगे। सही तरीके से पढ़ाई कराई जा सकेगी। शिक्षकों का संकट बड़ा है। इसे लेकर ही 14 गेस्ट फैकल्टी बुलाई जा रही है। इससे समस्या थोड़ी कम होगी। 
डा. अर्पिता यादव, निदेशक यूआईईटी(अमर उजाला,कानपुर,12.8.11)

उत्तराखंडःबच्चों और मां-बाप की परीक्षा लेने पर 50 हजार तक दंड का प्रावधान,प्रारंभिक शिक्षा तक कोई बोर्ड परीक्षा नहीं

Posted: 12 Aug 2011 12:44 AM PDT

प्रदेश में किसी भी स्कूल में प्रवेश पर बच्चे या माता-पिता या अभिवावकों का टेस्ट लेने या स्क्रीनिंग और कैपिटेशन फीस पर पाबंदी लगा दी गई है। शासनादेश के मुताबिक बच्चे की स्क्रीनिंग करने पर पहली बार 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा जबकि इसके बाद हर बार उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया जाएगा। इसी के साथ स्कूल की फीस के अलावा अगर डोनेशन, अंशदान या अन्य भुगतान की मांग की गई तो स्कूल पर मांगे गए कैपिटेशन शुल्क का 10 गुना तक दंड वसूला जाएगा। शासन ने साफ किया है कि स्क्रीनिंग का अर्थ यह है कि प्रवेश के लिए ऐसी चयन की प्रक्रिया अपनाई गई हो जिसके आधार पर एक बच्चे को दूसरे पर वरीयता देकर प्रवेश दिया जा रहा हो।

अब कोई नहीं होगा फेल

देहरादून। प्रदेश में बच्चों को किसी भी स्कूल फेल नहीं किया जा सकेगा। यही नहीं प्राथमिक शिक्षा पूरी होने तक उसे न तो किसी कक्षा में रोका जा सकेगा न स्कूल से निष्काषित किया जा सकेगा। अगर किसी निजी या सरकारी विद्यालय ने इस प्राविधान का उल्लंघन किया तो उसके प्रधानाचार्य और प्रबंधन के विरुद्ध लागू सेवा नियमावली के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

निजी टय़ूशन पर भी पाबंदी


देहरादून। शासनादेश के बाद अब प्रदेश में कोई भी शिक्षक निजी टय़ूशन नहीं पढ़ा सकेगा। शासन ने साफ किया है कि आरटीई कानून के तहत विद्यालय परिसर या परिसर के बाहर निजी टय़ूशन को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। अगर इसके बावजूद कोईशिक्षक टय़ूशन पढ़ाता पाया गया औरसके व उसके स्कूल के अधिकारियों या प्रबंध तंत्र ने मामला संज्ञान में आने के वावजूद कार्रवाई नहीं की तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक व सेवा नियमावली के तहत र्कावाई की जाएगी।

प्रारंभिक शिक्षा तक कोई बोर्ड परीक्षा नहीं

प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक बच्चों को कोई बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। शासन ने इस बाबत निर्देश जारी किए हैं। शासन ने प्रदेश के शैक्षिक प्राधिकारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नरेंद्र नगर को भी निर्देश दिए हैं कि वह शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्रारंभिक शिक्षा के पूरा होने पर शिक्षा के प्रमाण पत्र का प्रारूप तय करे(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,12.8.11)।

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालयःएलएलबी, एमएड की आनलाइन काउंसिलिंग आज से

Posted: 12 Aug 2011 12:42 AM PDT

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के एलएलबी, एमएड, बीपीएड और एमएससी बायोटेक सहित अन्य विषयों की आनलाइन काउंसिलिंग शुक्रवार से शुरू होगी। यह काउंसिलिंग 16 अगस्त तक चलेगी। विद्यार्थी चाहे साइबर कैफे या घर से विकल्प लॉक कर सकता है।

पूरा ब्योरा विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.kanpuruniversity.org पर उपलब्ध करा दिया गया है। इसके होम पेज पर बने लिंक online counseling2011 पर क्लिक करके choice filling की जा सकती है। सिस्टम मैनेजर डा. सरोज द्विवेदी ने बताया कि कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखने वाले सभी विकल्प लॉक करने होंगे। तभी काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होगी। जो विद्यार्थी विकल्प लॉक करेंगे, उन्हीं के शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन 17 अगस्त से होगा। 21 अगस्त देरशाम तक परिणाम जारी किया जाएगा। विकल्प लॉक करने वाले हर विद्यार्थी को प्रवेश परीक्षा फार्म के लॉगिन नेम, पासवर्ड का इस्तेमाल करना होगा। विकल्प लॉक करने वाले हर विद्यार्थी को दो प्रतियों का प्रिंट आउट निकालना होगा। यदि सीटों का विकल्प लॉक करने में दिक्कत हुई तो रि-काउंसिलिंग की सुविधा मिलेगी।
इन पाठ्यक्रमों की होगी काउंसिलिंग
एमएससी जूलोजी, माइक्रो बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स, इंडस्ट्रीयल केमिस्ट्री, बायो केमिस्ट्री, बाटनी, एलएलबी, बीएससी एजी, बीपीएड, बीसीए, एमपीएड, बीबीए, एमए होमसाइंस, भूगोल (प्रवेश परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थी), एमएससी बायोटेक (सामान्य, ओबीसी की 300 रैंक, एससी, एसटी और पीएच के सभी अभ्यर्थी), एमएससी मैथमेटिक्स (सामान्य, ओबीसी की 1000 रैंक, एससी, एसटी, पीएच के सभी अभ्यर्थी), एमएससी एजी (सामान्य, ओबीसी की 200 रैंक, एससी, एसटी, पीएच के सभी अभ्यर्थी), एमएड (सामान्य, ओबीसी के लड़कों की 600 रैंक, लड़कियों की 1000 रैंक, ओबीसी लड़कियों की 1500 रैंक, एससी के 2500 रैंक, एसटी, पीएच के सभी अभ्यर्थी)(अमर उजाला,कानपुर,12.8.11)।

उत्तराखंडःजुड़े विषय घोषणापत्र में शामिल करने पर विचार

Posted: 12 Aug 2011 12:40 AM PDT


आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस चुनाव घोषणा पत्र समिति को उप समितियों की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। समिति ने बृहस्पतिवार को अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों की रिपोर्ट पर चर्चा की। समिति के सह संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि अल्पसंख्यकों के विकास के लिए संपूर्ण साक्षरता व तकनीकी शिक्षा से जुड़े विषयों को घोषणा पत्र में शामिल किए जाने पर गंभीरता से विचार किया गया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यशपाल आर्य की अध्यक्षता में राजपुर रोड स्थित एक होटल में चुनाव घोषणा पत्र कमेटी की पहली बैठक हुई। बैठक में कमेटी की संयोजक डा. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत, विधायक दिनेश अग्रवाल, राम सिंह सैनी, अब्दुल रज्जाक और डीएस मान ने भाग लिया। लोकसभा सत्र की वजह से कोई भी सासंद नहीं पहुंचा। सतपाल महाराज के प्रतिनिधि के रूप में पूर्व विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी व प्रदीप टम्टा के प्रतिनिधि के रूप में महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा ने बैठक में भाग लिया। कमेटी के सह संयोजक बिष्ट ने बताया कि अल्पसंख्यकों से जुड़ी प्रदीप टम्टा की अध्यक्षता वाली कमेटी, अवस्थापना सुविधाओं व योजनाओं से जुड़ी उप समिति व सेवा क्षेत्र से जुड़े पूर्व सैनिकों, कर्मचारियों से जुड़े मामलों की उप समिति की रिपोर्ट कमेटी को सौंपी गई(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,12.8.11)।

काशी विद्यापीठ में 24 से शुरू होगी काउंसिलिंग

Posted: 12 Aug 2011 12:30 AM PDT

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश के लिए 24 अगस्त से काउंसिलिंग शुरू होगी, जो 31 अगस्त तक चलेगी। वहीं, पिछले सत्र के बीएड विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा भी 23 अगस्त से शुरू होगी।
बेपटरी हुए विद्यापीठ के शैक्षणिक सत्र ने छात्र-छात्राओं को जहां मुसीबत में डाल दिया है, वहीं विवि के अफसरों को भी खरीखोटी सुननी पड़ रही है। पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में विभाग के आला अफसरों ने सत्र विलंबित होने पर खासी नाराजगी जाहिर की थी और बीएड समेत बचे हुए विषयों की वार्षिक परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया था। बैठक से लौटे अफसरों ने काम में तेजी दिखाई। आनन-फानन में ज्यादातर विषयों में प्रवेश की कटआफ लिस्ट जारी की गई। अब 24 से 31 अगस्त तक काउंसिलिंग कराकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। परीक्षा नियंत्रक प्रो. नंदलाल ने बताया कि विभागाध्यक्षों और संकायाध्यक्षों को सफल अभ्यर्थियों की सूची भेज दी गई है। वहीं 2010-11 में बीएड में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं 23 अगस्त से शुरू होंगी। कुलसचिव साहबलाल मौर्या का कहना है कि सत्र को किसी तरह पटरी पर लाना ही हमारी पहली प्राथमिकता है(अमर उजाला,वाराणसी,12.8.11)।

हरियाणाःअब गृह ज़िलों में जा सकेंगे जेबीटी शिक्षक

Posted: 12 Aug 2011 12:28 AM PDT

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में नियमित आधार पर कार्यरत जेबीटी तथा सीएंडवी शिक्षकों के लिए अंतर-जिला स्थानांतरण नीति स्वीकृत की है। इस नीति के तहत स्थानांतरण के इच्छुक शिक्षकों को 25 अगस्त तक आवेदन करने का समय दिया गया है। हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने बुधवार को यहां बताया कि व्यक्तिगत या पारस्परिक स्थानांतरण के लिए आवेदन फार्म विभाग की वेबसाइट पर भी पर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि इच्छुक शिक्षकों को संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों के पास ही अपने आवेदन जमा करवाने होंगे।

उन्होंने कहा कि पारस्परिक अंतर-जिला स्थानांतरण के आवेदन फार्म दोनों जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों/जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित होने चाहिएं। पारस्परिक स्थानांतरण के लिए दोनों शिक्षकों को अपने विचार लिखित में प्रेषित करने होंगे। उन्हें अपने शपथ-पत्र में लिखना होगा कि वे अपने गत जिलों की वरिष्ठता छोडऩे के लिए तैयार हैं तथा नए जिले की नई वरिष्ठता के लिए सहमत हैं। नए जिले में कार्यभार संभालने के बाद पुराने जिले का उनका हक स्वत: ही समाप्त माना जाएगा।

उन्होंने कहा कि नए जिलों में कार्यभार संभालने की तिथि से पारस्परिक स्थानांतरण प्रभावी होगा। यदि एक शिक्षक निर्धारित अवधि में कार्यभार नहीं संभालता है तो दोनों शिक्षकों की स्थानांतरण आधार पर नियुक्ति स्वत: ही रद्द हो जाएगी और दोनों को अपने पहले कार्य स्थलों पर ही कार्यभार संभालना होगा। ऐसे शिक्षक टीए या डीए के पात्र नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जिला मेवात के लिए केवल पारस्परिक स्थानांतरण आग्रहों पर ही विचार किया जाएगा।

जेबीटी तथा सीएंडवी शिक्षक कॉडर के तदर्थ, अनुबंध तथा गेस्ट शिक्षकों के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जब कभी भी रिक्ति उत्पन्न होगी तो वरिष्ठतम शिक्षक को अंतर-जिला स्थानांतरण के लिए अधिमान दिया जाएगा। ऐसे शिक्षकों की वरिष्ठता नए जिलों में संबंधित कॉडर के अंतिम छोर पर निर्धारित की जाएगी। उन्हें अपने गत जिले की वरिष्ठता छोडऩे के सम्बंध में शपथ-पत्र देना होगा तथा उन्हें संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी या जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को यह अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि वे गत जिले की अपनी सेवा के आधार पर वरिष्ठता का दावा नहीं करेंगे और इसकी एक प्रति संबंधित निदेशालय को भी भेजनी होगी। पात्रता मानदंड एवं अधिमान आदेश के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि शिक्षकों का पारस्परिक स्थानांतरण एक ही वर्ग या कॉडर में होगा। 70 प्रतिशत या इससे अधिक विकलांगता के लिए मेडिकल बोर्ड द्वारा और केंसर जैसी घातक बीमारियों से पीडि़त व्यक्ति के लिए सिविल सर्जन/पीजीआई से प्रमाण-पत्र जारी होना चाहिए। विधवा या कानूनी तौर पर तलाकशुदा शिक्षिकाएं,अवैवाहित शिक्षिकाएं तथा सेवारत सैनिकों की पत्नियां पात्र होंगी। इसके अतिरिक्त, ऐसी जेबीटी तथा सी एण्ड वी शिक्षिकाएं, जो शिक्षा विभाग के तहत जिला कॉडर में कार्यरत अपने पतियों के जिलों में स्थानान्तरण चाहती हैं और ऐसी सभी जेबीटी तथा सीएंडवी शिक्षिकाएं, जिनके पति अन्य विभागों में जिला कॉडर में कार्यरत हैं के मामलों पर भी इसी श्रेणी में विचार किया जाएगा। ऐसी जेबीटी तथा सीएंडवी शिक्षिकाएं, जिनका विवाह सेवा में आने के बाद होता है और वे ऐसे जिलों में स्थानांतरण की इच्छुक है, जहां उनके पति या ससुराल हैं। सेना तथा अर्द्ध-सैनिक बलों अर्थात जल, थल, वायु सेना, बीएसएफ, आईटीबीपी आदि के कर्मचारियों या अधिकारियों की पत्नियों के मामलों तथा ऐसी सभी जेबीटी तथा सीएंडवी शिक्षिकाएं जो ऐसे जिलों में स्थानांतरण की इच्छुक है, जहां उनके पति राज्य सरकार, केंद्र सरकार, स्थानीय निकाय तथा निगम के स्टेट कॉडर पदों पर कार्यरत हैं, के मामलों पर विचार किया जाएगा(दैनिक ट्रिब्यून,चंडीगढ़,12.8.11)।

गोरखपुर विश्वविद्यालयःअभी लटके रहेंगे सामूहिक नकल की रिपोर्ट वाले

Posted: 12 Aug 2011 12:26 AM PDT

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल की रिपोर्ट वाले कालेजों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। इससे संबंधित छात्र-छात्राओं का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है। हालांकि अभी विश्वविद्यालय की ओर से कालेजों की सूची सार्वजनिक नहीं की गयी है, लेकिन रिजल्ट न निकलने के कारण लगभग सभी को अंदाजा हो गया है। भागदौड़ भी शुरू हो गयी है, परन्तु विवि सूत्रों के अनुसार अभी कम से कम बीस दिन मामले के निस्तारण में लग सकते हैं।


परीक्षा के दौरान 78 कालेजों के 140 विषयों की परीक्षा (बंडलों) में सामूहिक नकल की रिपोर्ट की गयी है। एक ओर जहां रिजल्ट धड़ाधड़ निकले, वहीं 31 जुलाई के बाद सीधे कालेजों को अंकपत्र भेजे जा रहे हैं। इस बीच सामूहिक नकल की रिपोर्ट वाले विषयों का निस्तारण न होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक ओर जहां प्रवेश प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच रही है, वहीं इन फंसे रिजल्ट के छात्र-छात्राओं का क्या होगा, यह एक बड़ा सवाल है। यदि मामला निस्तारित होता और नकल की पुष्टि होती तो अंक कटौती के साथ रिजल्ट घोषित होता। भले ही कालेज डिवार होते, लेकिन छात्र अपने भविष्य तय करने की स्थिति में होते। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार स्टोर से अब बंडल निकलने लगे हैं।

जांच कर समिति देगी रिपोर्ट
संबंधित विषयों की कापियों को डीन, विभागाध्यक्ष व विषय विशेषज्ञ जांच करेंगे। यदि सामूहिक नकल की पुष्टि होती है तो रिपोर्ट परीक्षा समिति में जाएगी। यदि नहीं तो रिजल्ट निकाला जाएगा। नकल की पुष्टि होने पर नियमानुसार 40 फीसदी अंक कटौती के साथ रिजल्ट घोषित होंगे। सामूहिक नकल निस्तारण समिति की रिपोर्ट को परीक्षा समिति से संस्तुति मिल ही जाती है(अमर उजाला,गोरखपुर,12.8.11)।

सोनीपतःपासवर्ड हॉईजेक करके इंजीनियरिंग छात्रों का दाखिला करा दिया रद्द

Posted: 12 Aug 2011 12:24 AM PDT

दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग के 35 विद्यार्थियों के साथ उनका पासवर्ड हॉईजेक करके एडमिशन रद्द कराकर दूसरी काउंसलिंग में नाम डालकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है।
विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर मिलीभगत होने का अरोप लगाया है। इस संदर्भ में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आर. के. अरोड़ा का कहना है कि एडमिशन स्टेट काउंसलिंग पंचकूला द्वारा किये जाते हैं। एडमिशन में विश्वविद्यालय का कोई रोल नहीं है। अगर फिर भी विद्यार्थी जांच में विश्वविद्यालय से किसी प्रकार का सहयोग चाहते हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन इसके लिये तैयार है।
विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग करने के इच्छुक छात्रों को कहना है कि उन्होंने तो पहली काउंसलिंग के बाद नंबर आने पर विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित 44110 रुपये फीस भी जमा कर दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने 6-7 दिन तक विश्वविद्यालय में लगने वाली कक्षाएं भी अटैंड की हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि उनके पास एक मोबाइल से कॉल आई कि वे अपना पासवर्ड बता दें, जिस पर उन्हें संदेह हुआ तथा उन्होंने यह कह कर अपना पासवर्ड बताने से इंकार कर दिया कि वे फोनकर्ता के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते हैं। परन्तु फोनकर्ता ने जब विद्यार्थियों के बारे में उनके नाम सहित अन्य जानकारियों के बारे में अवगत करा दिया तो विद्यार्थियों को विश्वास हो गया कि विश्वविद्यालय से ही कोई विश्वसनीयव्यक्ति इसके बारे में जानकारी मांग रहा है। विद्यार्थियों का विश्वास था कि उनके बारे में उनके शैक्षणिक रिकार्ड की जानकारी तो हरियाणा टैक्निकल एजूकेशन तथा विश्वविद्यालय के अलावा केवल उनके पास ही है। अत: विद्यार्थियों ने विश्वास के बाद फोनकर्ता को अपना पासवार्ड बता दिया। इसके बाद जब उन्होंने अपनी मेल चैक की तो विद्यार्थियों ने पाया कि उनका विश्वविद्यालय से एडमिशन रद्द हो गया है तथा उनका नाम सेकिंड काऊंसलिंग में डाल दिया गया है(दैनिक ट्रिब्यून,सोनीपत,12.8.11)।

इलाहाबाद विवि की फर्जी डिग्रियों का भंडाफोड़

Posted: 12 Aug 2011 12:03 AM PDT

आंध्र प्रदेश से आई सीआईडी टीम ने गुरुवार को न्यू कटरा में रहने वाले कैरियर काउंसलर प्रवीण कुमार बंसल को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने कर्नलगंज थाने में लंबी पूछताछ की। सीआईडी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियों का भंडाफोड़ किया है। फर्जी डिग्री पर ही आंध्र प्रदेश के एक इंस्टीट्यूट में कई दाखिले कराए गए। मामले का खुलासा होने पर सीआईडी ने जांच शुरू की तो प्रवीण बंसल का कारनामा सामने आया। दाखिले के नाम पर उनके एकाउंट में चार लाख रुपये डाले गए थे। इस मामले में सीआईडी को कई और लोगों की तलाश है।
मामला वर्ष 2009 का है। आंध्र प्रदेश के विजयबाड़ा जिले के श्रीलंका थाने में इस फर्जीवाड़ा की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जांच सीआईडी को मिली तो परत दर परत खुलने लगी। गुरुवार को सीआईडी इंस्पेक्टर आरजी जयसूर्या टीम के साथ इलाहाबाद पहुंचे और कैरियर काउंसलर और व्यवसायी प्रवीण बंसल के न्यू कटरा स्थित घर पर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सीआईडी ने कर्नलगंज थाने में पूछताछ की। इंस्पेक्टर कर्नलगंज सीडी गौड़ के मुताबिक, इविवि की फर्जी डिग्री के आधार पर प्रवीण ने छात्रों का दाखिला आंध्र प्रदेश के ए वन एजूकेशनल इंस्टीट्यूट में कराया। गोलमाल की पोल खुली तो जांच के घेरे में प्रवीण आए। उनके एकाउंट चेक होने पर दाखिले के नाम पर लिए गए चार लाख रुपये की पोल खुली। इस मामले में धारा 420, 468, 471, 420 बी, तथा 34 आईपीसी के तहत केस दर्ज है। सीआईडी उन्हें आंध्र प्रदेश ले जाने की तैयारी में है। उन्हें शहर के कई और लोगों की तलाश है। इसके लिए दबिश दी जा रही है। शुक्रवार को प्रवीण को अदालत में पेशी के बाद रिमांड पर ले जाया जाएगा(अमर उजाला,इलाहाबाद,12.8.11)।

प्रताप युनिवर्सिटी देगी सौ राष्ट्रीय छात्रवृत्ति

Posted: 11 Aug 2011 10:20 PM PDT

अब मेधावियों के लिए आर्थिक गरीबी पढ़ाई में आड़े नहीं आएगी। महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन (एमपीजीआई) की जयपुर में खुल रही प्रताप युनिवर्सिटी ऐसे सौ मेधावियों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति देगी। इसमें उनकी शिक्षा के साथ व्यापक व्यक्तित्व विकास पर आने वाला खर्च भी उठाया जाएगा। दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की मौजूदगी में इसकी घोषणा की गई। एमपीजीआई के सचिव शैलेंद्र भदौरिया ने बताया कि इंजीनियरिंग, प्रबंधन सहित दूसरे पाठ्यक्रमों के ऐसे सौ मेधावी छात्र छात्राओं का चयन किया जाएगा जो पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते। प्रताप यूनिवर्सिटी ऐसे मेधावियों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करेगी। यह योजना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि प्रताप युनिवर्सिटी उच्च शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण में एक बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है। युनिवर्सिटी इन मेधावियों को शिक्षा के साथ दूसरे क्षेत्रों की सृजनात्मक गतिविधियों के लिए मंच मुहैया करायेगी। इस प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर छात्र छात्राओं की प्रतिभा को उड़ान के लिए नया आसमान मिल सकेगा। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी ने गुरु शिष्य एवार्ड की भी शुरुआत की है। पहला सम्मान दिल्ली में हुए भव्य समारोह में क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव व उनके गुरु देशप्रेम आजाद को लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति की घोषणा करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि मानव संसाधन मंत्री सिब्बल भी मानते हैं कि प्रताप यूनिवर्सिटी की यह पहल दूसरे शैक्षिक संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी(दैनिक जागरण,कानपुर,12.8.11)।

सीबीएसई ने बदला 12वीं इतिहास का प्रश्नपत्र पैटर्न

Posted: 11 Aug 2011 10:17 PM PDT

सीबीएसई के कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को इतिहास के परचे में अधिक अंक पाने के लिए थोड़ी और मेहनत करनी होगी। गत दिनों सीबीएसई बोर्ड ने विषय के प्रश्न पत्र के प्रारूप में बदलाव किया है।

इसकी सूचना सभी स्कूलों को भेज दी गई है। कक्षा 12 वीं की मार्च 2012 में होने वाली बोर्ड परीक्षा में नए प्रारूप के अनुसार परचा होगा। बोर्ड के इस फैसले से स्कोरिंग विषय के रूप में विद्यार्थियों की पसंद रहा यह विषय उन्हें अब कठिन लगने लगा है।

दरअसल विषय के प्रश्न पत्र के प्रारूप में तीन ऐसे बदलाव हैं जिसके कारण विद्यार्थी विषय में अधिक स्कोर नहीं कर पाएंगे। सीबीएसई बोर्ड की शिक्षा अधिकारी सुगंध शर्मा द्वारा स्कूलों को भेजे गए पत्र और प्रश्नपत्र के नए प्रारूप के मुताबिक प्रश्न पत्र तीन घंटे का होगा।

कुल अंक 100 निर्धारित किए गए हैं। सबसे बड़ा बदला दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में किया गया है। एक ओर प्रश्न के अंतर्गत विद्यार्थियों को दिए जाने वाले अंक को 8 से बढ़ाकर 10 कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर उत्तर लिखने की शब्द सीमा 500 शब्दों की कर दी गई है।


पहले यह शब्द सीमा 250 शब्दों की थी। दूसरा बदलाव लघु उत्तरीय प्रश्नों में किया गया है। नए प्रारूप के अनुसार इस खंड के तहत कुल 8 प्रश्न रहेंगे। प्रत्येक प्रश्न पर विद्यार्थियों को 5 अंक मिलेंगे। तीसरा बदलाव अति लघु उत्तरीय प्रश्नों के खंड में किया या है। 
इस खंड के अंतर्गत पूछे जाने वाले कुल प्रश्नों की संख्या 5 से घटाकर तीन कर दी गई है। एक प्रश्न का उत्तर लिखने पर विद्यार्थियों को 2 अंक दिए जाएंगे। इस तरह खंड के तीन प्रश्नों को हल करने पर विद्यार्थियों को 6 अंक दिए जाएंगे, जबकि पुराने प्रारूप के अनुसार विद्यार्थियों को 5 प्रश्न हल करने पर 10 अंक मिलते थे। 

इसके अलावा पास बेस्ड प्रश्न खंड में 3 प्रश्न पूछे जाएंगे। कुल अंक 8 निर्धारित किए गए हैं। स्किल मॅप प्रश्न खंड के अंतर्गत 2 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए हैं। नए बदलाव को लेकर विद्यार्थियों में नाराजगी है, जबकि स्कूल शिक्षकों ने इसे विद्यार्थियों के हित में बताया। 

ये है नया प्रारूप

विद्यार्थियों को दिए जाने वाले अंक को 8 से बढ़ाकर 10 कर दिया गया है।

उत्तर लिखने की शब्द सीमा 500 शब्दों की कर दी गई है।

लघुत्तरीय खंड के तहत कुल 8 प्रश्न रहेंगे। प्रत्येक प्रश्न पर विद्यार्थियों को 5 अंक मिलेंगे। 

अति लघु उत्तरीय प्रश्नों के खंड में पूछे जाने वाले कुल प्रश्नों की संख्या 5 से घटाकर तीन कर दी गई है(दैनिक भास्कर,नागपुर,12.8.11)।

झारखंडः122 डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू 26-27 को

Posted: 11 Aug 2011 10:14 PM PDT

ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत 122 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए 26-27 अगस्त को इंटरव्यू होगा।

इससे पहले वर्ष 2010 में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। हालांकि सरकार को आवश्यकता के हिसाब से आधे विशेषज्ञ डॉक्टर ही मिल पाए। नियुक्त होने वाले डॉक्टरों को 40-50 हजार रुपए वेतन दिया जाना है।

अपने ही संकल्प को भूल गया विभाग

राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रपति शासन के दौरान 28 फरवरी 2009 को स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक संकल्प निकाला गया। इसके तहत सेवानिवृत्त हो चुके डॉक्टरों की सेवा लिए जाने की बात कही गई। कैबिनेट की अनुमति भी इस पर मिली।


संकल्प के अनुसार 60 साल में सेवानिवृत्त हुए डॉक्टरों को 65 साल की उम्र तक के लिए अनुबंध पर रखा जा सकता है। वर्ष 2007 से लेकर अब तक करीब 200 डॉक्टर 60 साल में सेवानिवृत्त हुए हैं। इनमें से कई अपनी सेवा देना चाहते हैं। 
हालांकि सरकार इसपर विचार नहीं कर रही। बताते चलें कि राज्य सरकार ने अब डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति उम्र सीमा को भी बढ़ाकर 65 कर दिया है। 

केवल पांच डेंटल सर्जन

राज्य में पांच दंत चिकित्सक ही कार्यरत हैं। राज्य में दंत चिकित्सकों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 24 दंत चिकित्सकों की बहाली के लिए जेपीएससी को अधियाचना भेजने जा रही है। राज्य में 29 दंत चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। 

नियमित करने की मांग

अनुबंधित डॉक्टरों के बाद अब राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत नियुक्त महिला चिकित्सकों ने सेवा नियमित करने की मांग की है। महिला डॉक्टरों ने कहा है कि वे लोग 21 जनवरी 2009 से अपनी सेवा दे रही हैं। ऐसे में उनकी सेवा भी नियमित की जानी चाहिए(दैनिक भास्कर,रांची,12.8.11)।
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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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