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Friday, August 5, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



---------- Forwarded message ----------
From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/8/5
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने कहा,नियुक्ति दिशा-निर्देश देना हाईकोर्ट के दायरे में नहीं

Posted: 04 Aug 2011 06:24 AM PDT

हरियाणा और पंजाब लोकसेवा आयोग के सदस्यों और चेयरमैन की नियुक्ति के लिए मापदंड तय करने की याचिका की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल ने हाईकोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट को इस बारे में कोई दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है। हरियाणा के एजी हवा सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार लोकसेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति में उचित मापदंड तय कर उच्च योग्यता वालों की ही नियुक्ति करती है। बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकार ने 20 जुलाई 2006 से 19 जुलाई 2011 तक लोकसेवा आयोग द्वारा भरे गए, उन पदों की जानकारी दी, जिनको कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई। इसके अनुसार, पिछले पांच साल में आयोग ने 404 पद भरे हैं। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली और न्यायमूर्ति के कानन की फुल बैंच ने केंद्र सहित पंजाब और हरियाणा सरकार को दोबार हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को पंजाब लोकसेवा आयोग के चेयरमैन पद पर हरीश राय ढांडा की नियुक्ति से संबंधित सभी ओरिजनल दस्तावेज कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार बताए कि अन्य राज्यों के लोकसेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्यों के लिए योग्यता का कोई पैमाना निर्धारित किया गया है। अगर किया गया है तो उसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। सोमवार 1 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने ढांडा को पंजाब लोकसेवा आयोग के चेयरमैन पद की शपथ लेने से रोक दिया था। पंचकूला के सलिल सबलोक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लुधियाना के विधायक ढांडा की आयोग के चेयरमैन पद पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। मामले की अगली सुनवाई सोमवार 8 अगस्त को होगी(दैनिक जागरण,चंडीगढ़,4.8.11)।

ओबीसी आरक्षण में नहीं कर सकते छेड़छाड़ःसुप्रीम कोर्ट

Posted: 04 Aug 2011 05:10 AM PDT

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी कोटे की सीटों में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित सीटें सामान्य वर्ग के छात्रों को नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन और एके पटनायक की खंडपीठ ने यह टिप्पणी बुधवार को आइआइटी चेन्नई के पूर्व निदेशक प्रोफेसर पीवी इंद्रेशन की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते समय की। प्रोफेसर इंद्रेशन की याचिका में अदालत से जवाहर लाल नेहरू विवि (जेएनयू), दिल्ली विवि (डीयू) व अन्य केंद्रीय विवि में ओबीसी के प्रवेश के मानक स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है। पीठ ने पक्षकारों को सोमवार तक अपनी लिखित दलीलें कोर्ट में रखने को कहा है। याचिकाकर्ता ने 7 सितंबर 2010 को दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें ओबीसी छात्रों के लिए कट ऑफ अंक, सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों से 10 फीसदी कम पर प्रवेश दिए जाने का आदेश था। याचिकाकर्ता के वकील केके वेणुगोपाल के यह कहने पर कि अदालत अगर उनके खिलाफ फैसला लेती है तब यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित 50 फीसदी सीटों पर ओबीसी छात्रों ने अतिक्रमण नहीं किया, भले ही उन्होंने (ओबीसी छात्रों) विवि में मेरिट के आधार पर प्रवेश लिया हो। इस पर न्यायमूर्ति रवींद्रन ने कहा कि ओबीसी सीटों को सामान्य सीटों में रूपांतरण करने की अनुमति नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि केंद्रीय विवि में प्रवेश में ओबीसी छात्रों को कट ऑफ अंक से दस अंक कम पर प्रवेश दिया जाएगा या फिर उन्हें सामान्य वर्ग के लिए निश्चित पात्रता अंकों से दस अंक कम पर प्रवेश मिलेगा। प्रोफेसर इंद्रेशन की ओर से दलील दी गई थी कि ओबीसी छात्रों को सामान्य वर्ग में प्रवेश पाने वाले अंतिम छात्र के कट ऑफ अंक से दस अंक कम पर प्रवेश दिया जाए। इंद्रेशन के वकील की दलील थी कि शिक्षा में आरक्षण को सही ठहराने वाले संविधान पीठ के फैसले में न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी ने कट ऑफ अंक से दस अंक कम पर प्रवेश की बात कही है। इसी तरह न्यायमूर्ति पसायत व सीके ठक्कर के फैसले में भी शिक्षा का उच्च स्तर बनाए रखने के लिए ओबीसी को सिर्फ 5 फीसदी कम अंकों पर प्रवेश देने का सुझाव दिया गया है, जबकि दूसरी ओर केंद्र सरकार की दलील थी कि ओबीसी छात्रों को कट ऑफ अंक से नहीं बल्कि सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित पात्रता अंकों से दस अंक कम पर प्रवेश दिया जाना चाहिए(दैनिक जागरण,दिल्ली,4.8.11)।

उत्तराखंडःपिछड़े वर्गों के लिए कालागढ़ में बनेगा पॉलीटेक्निक

Posted: 04 Aug 2011 05:08 AM PDT

समाज कल्याण मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने बताया कि इसी 29 जुलाई को प्रदेश सरकार ने पौड़ी जिले के कालागढ़ में सिंचाई विभाग के खाली पड़े वर्कशॉप भवन में राजकीय पॉलीटेक्निक खोलने को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने बताया कि यह पॉलीटेक्निक विशेष रूप से अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण देने के लिए स्थापित किया जाएगा(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,4.8.11)।

उत्तराखंड में प्री-स्कूल शिक्षा होगी मुफ्त!

Posted: 04 Aug 2011 03:32 AM PDT

इससे पहले कि केंद्र सरकार स्कूल पूर्व शिक्षा को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के दायरे में लाए, प्रदेश में इस योजना के बाबत विचार शुरू हो गया है। योजना है कि किंडरगार्डन (बालवाड़ी) यानी चार साल और छह साल तक की शिक्षा को भी आरटीई के दायरे में लाया जाए। संभव है कि आरटीई का दायरा कक्षा दस तक बढ़ा दिया जाए। इसके लिए आरटीई में संशोधन व नियमावली में जरूरी परिवर्तन की कवायद जारी है। पिछले दिनों यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने केंद्र सरकार को नर्सरी व किंडरगार्डन शिक्षा को भी आरटीई के दायरे में लाने की सलाह दी थी। इसके बाद केंद्रीय योजना आयोग के स्कूल शिक्षा के लिए एक उपसमूह गठित कर उसे अगली पंचवर्षीय योजना में स्कूल पूर्व शिाक्षा को आरटीई के दायरे में लाने की संभावना तलाशने को कहा है। इसी तरह मानव संसाधन मंत्रालय ने केंद्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद के उपसमूह को ने 10 वीं तक की शिक्षा को आरटीई के दायरे में लाने के बारे में विचार को कहा है। अगर दायरा बढ़ा तो महिला एवं बाल विकास विभाग की आईसीडीएस योजना से स्कूल पूर्व शिक्षा को हटाना होगा क्योंकि क्योंकि चार से छह साल के बच्चों की शिक्षा का काम आईसीडीएस के जरिए ही होता है। शासन के अधिकारी हालांकि इस बाबत चुप्पी साधे बैठे हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो इससे पहले कि केंद्र सरकार आरटीई का दायरा बढ़ा दे प्रदेश में यह पहले ही हो सकता है हालांकि इसमें धन की उपलब्धता आड़े आ सकती है क्योंकि आरटीई की धारा 12 सी के तहत प्रदेश में गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में भी कमजोर वगरे के बच्चों को सबसे छोटी कक्षा में 25 फीसदी सीटों पर आरक्षण दिया जाना है। इस तरह अपने पड़ोस के निजी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के इन बच्चों की स्कूल फीस यूनिफार्म और स्कूल आने जाने का खर्च सरकार को ही उठाना है। इसी के साथ ज्यादा दूरी वाले स्कूलों में बच्चों के आने जाने के लिए उनके साथ एक देखभाल करने वाले को भी धन दिया जाना है। इस साल तो हालांकि यह खर्च कम होगा क्योंकि एक अप्रैल से प्रदेश में लागू मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत स्कूल की सबसे छोटी कक्षा में ही प्रवेश दिया जा रहा है। लेकिन आने वाले वर्षो में यह बढ़ जाएगा क्योंकि तब अभी प्रवेश पाए बच्चे बड़ी कक्षा में जा चुके होंगे और नए प्रवेश हो जाएंगे। इसमें अगर आरटीई का दायरा प्रि स्कूल से 10वीं तक बढ़ जाता है तो ज्यादा धन की जरूरत होगी। वैसे अभी केंद्र इसके लिए धन मुहैया करा रहा है लेकिन प्रदेश में उससे पहले ही दायरा बढ़ाया गया तो प्रदेश सरकार के लिए प्री-स्कूल से 10 वीं तक प्रवेश पाने वाले ढेरों बच्चों को का खर्च उठाना आसान न होगा(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,4.8.11)।

मध्यप्रदेशःसंपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक न करने वाले आईएफएस के प्रमोशन पर लटकी तलवार!

Posted: 04 Aug 2011 03:29 AM PDT

मध्यप्रदेश काडर के एक चौथाई आईएफएस अधिकारियों के प्रमोशन और प्रतिनियुक्ति पर तलवार लटक गई है। केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद 271 आईएफएस अफसरों में से 67 ने समय पर अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है।

केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय (डीओपीटी) द्वारा 4 अप्रैल 2011 को जारी एक परिपत्र के अनुसार अखिल भारतीय सेवाओं के सभी अधिकारियों को अपनी संपत्तियों का ब्यौरा 31 मई 11 तक अपने विभाग को देना अनिवार्य किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि ऐसा न होने पर संबंधित अधिकारी के प्रमोशन और प्रतिनियुक्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।


हालांकि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) स्तर के 32 अधिकारियों में से तीन को छोड़कर सभी ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे दिया है। ब्यौरा नहीं देने वालों में अमरजीत सिंह जोशी (एपीसीसीएफ) महिमन सिंह गव्र्याल (एपीसीसीएफ) और एएस अहलावत (एपीसीसीएफ)प्रमुख हैं। वहीं मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) से लेकर वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) स्तर के 239 अधिकारियों में से 64 ने अपनी संपत्ति सार्वजनिक नहीं की हैं। 
1981 और 1988 बैच वाले रहेंगे मुश्किल में 
आने वाले समय में 1981 और 1988 बैच के आईएफएस अफसरों की डीपीसी होना प्रस्तावित है। संपत्ति का ब्यौरा नहीं देने वालों में 1981 बैच के प्रवीण कुमार चौधरी, 1988 बैच के सुनील अग्रवाल, वीएन अम्बाड़े, रमेश कुमार श्रीवास्तव, के रमन और असीम श्रीवास्तव शामिल हैं। 

हमारी जानकारी में केंद्र का ऐसा कोई भी परिपत्र नहीं है जिसमें संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किए जाने पर प्रमोशन रोकने की बात कही गई हो।
रमेश के. दवे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मप्र

केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के परिपत्र पर हमारा ध्यान नहीं जा पाया था। अब आपने बताया है तो इस पर तत्काल कार्रवाई करवाऊंगा।
स्वदीप सिंह, प्रमुख सचिव, वन(सचिन शर्मा,दैनिक भास्कर,भोपाल,4.8.11)

उत्तराखंडःहर अल्पसंख्यक महिला की ट्रेनिंग के लिए दस हजार देगी सरकार

Posted: 04 Aug 2011 03:27 AM PDT

अल्पसंख्यक वर्ग की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के कौशल प्रशिक्षण पर रहबर योजना के तहत हर प्रशिक्षु पर प्रदेश सरकार दस हजार रुपये खर्च करेगी। इसी के साथ अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र छात्राओं के लिए मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत हरिद्वार के रोशनाबाद और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में पॉलीटेक्निक स्थापित किए जाएंगे। समाज कल्याण मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में अल्पसंख्यक वर्ग की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए रहबर योजना के तहत कौशल वृद्धि प्रशिक्षण शुरू किया जाए। इसके लिए 20-20 महिलाओं के समूह बनाए जाएंगे। महिलाओं को मास्टर ट्रेनर के माध्यम से कम से कम तीन और अधिकतम छह माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित महिलाओं से और मास्टर ट्रेनर महिलाएं तैयार की जाएंगी जो दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी। हर प्रशिक्षणार्थी के प्रशिक्षण पर 10 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। विभिन्न तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बहुउद्देश्यीय वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से सस्ते कर्ज उपलब्ध कराए जाएंगे। समाज कल्याण मंत्री ने बताया कि हरिद्वार जिले के रोशनाबाद और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए एमएसडीपी के तहत पॉलीटेक्निक संस्थान स्थापित करने पर सहमति बन गई है(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,4.8.11)।

महाराष्ट्रःशिक्षण शुल्क विधेयक पारित

Posted: 04 Aug 2011 03:26 AM PDT

स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने वाला शिक्षण शुल्क विधेयक बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पास हो गया।

इस विधेयक के महत्व को देखते हुए सभी दलों के विधायकों ने एकमत से मंजूरी दी। शिक्षण शुल्क विधेयक के पास होने के बाद अब स्कूलों को फीस में वृद्धि करने से पहले अभिभावक संगठन से मंजूरी लेना अनिवार्य हो गया है।

इसके अलावा यदि कोई स्कूल गैरकानूनी ढंग से विद्यार्थियों से रकम जमा करने का दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान भी इस विधेयक में है।

शिक्षण शुल्क विधेयक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूलों को अब फी वृद्धि करने से पहले कम से कम छह महीने पहले उसके प्रस्ताव को तैयार करना जरूरी हो गया है।

.. तो जेल आने की आयेगी नौबत

राज्य में स्कूलों की मनमानी से जनता को निजात दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षण शुल्क विधेयक अमल में लाया है। इस विधेयक में किये गये प्रावधान के तहत गलत ढंग से पैसा इकट्ठा करने के दोषी पाये गये स्कूल के संचालकों से दो गुनी रकम दंड के रूप में वसूलने का प्रावधान है।


यदि जरूरत पड़ी तो उन्हें जेल में भी डाला जा सकता है। ध्यान रहे कि एक बार जो स्कूल अपनी फी में वृद्धि करेगा। उसे आने वाले दो वर्षो तक फी वृद्धि नहीं करने दिया जायेगा। 

फी वृद्धि के प्रस्तावों पर जिलास्तर पर निगरानी रखने के लिए जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति होगी। जबकि राज्यस्तर पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश निगरानी समिति के अध्यक्ष होंगे(दैनिक भास्कर,मुंबई,4.8.11)।

इंदौर में खाली पड़े हैं 20 फीसदी पद

Posted: 04 Aug 2011 03:24 AM PDT

नौकरी डॉटकॉम द्वारा मंगलवार को जारी एक सर्वे में कहा गया है कि देश में नौकरियों की कमी नहीं है लेकिन उनके लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं। सिटी भास्कर ने शहर प्रमुख एम्प्लायर्स से बात की तो यही चीज सामने आई। ज्यादातर कंपनियों में वैकेंसी है लेकिन सूटेबल केंडिडेट नहीं मिल पा रहे हैं।

कम्युनिकेशन स्किल, कॉन्फिडेंस व बेसिक नॉलेज की कमी शहर के फ्रेशर्स को जॉब से दूर कर रहे हैं। पेनासोनिक के फैक्टरी मैनेजर आर.एस. अय्यर कहते हैं पिछले साल हमारे यहां सात लोगों की जरूरत थी। तीन इंस्टिट्यूट में जाने के बाद सिर्फ तीन स्टूडेंट ही सूटेबल लगे।


सिस्कॉन इन्फॉर्मेशन सिस्टम के डायरेक्टर गौतम शर्मा बताते हैं पिछले साल कंपनी को 15 कर्मचारियों की जरूरत थी। इंस्टिट्यूट्स में डेढ़-दो सौ के टेस्ट लिए लेकिन सिर्फ दो ही सूटेबल लगे। इम्पेटस के वाइस प्रेसीडेंट इंजीनियरिंग मैनेजमेंट राजीव गुप्ता कहते हैं हमारे रिक्रूटमेंट तकनीकी ज्ञान, सीखने की क्षमता, जिज्ञासा और समस्या हल करने की एप्रोच के आधार पर होते हैं। कैम्पस सिलेक्शन के दौरान ज्यादातर स्टूडेंट्स में प्रोग्रामिंग स्किल देखने को नहीं मिलती। लैंग्वेज की भी पर्याप्त जानकारी नहीं होती। 

एक फीसदी भी इंदौर के नहीं
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी कहते हैं सिलेबस इंडस्ट्रीज की जरूरत के मुताबिक नहीं है। पीथमपुर की विभिन्न कंपनियों की मैनेजरियल पोजिशन पर एक फीसदी कर्मचारी भी शहर के नहीं हैं। प्रतिभा सिंटेक्स में सीनियर क्वालिटी मैनेजर दिलीप रावत कहते हैं टेक्निकल लाइन में बाहर के लोग अधिक हैं। हम हर जगह रिक्रूट करते हैं लेकिन लोकल बच्चे ज्यादा समय नहीं टिकते। महिंद्रा टू व्हीलर्स के ट्रेनिंग हैड रजनीश सैनी कहते हैं नए कॉलेजों में दिक्कत ज्यादा है, क्योंकि वहां आमतौर पर एक्सपीरियंस फैकल्टी का अभाव रहता है(दैनिक भास्कर,इऩ्दौर,4.8.11)।

झारखंडःशिक्षकों की कमी दूर करने का निर्देश

Posted: 04 Aug 2011 03:23 AM PDT

मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अल्पसंख्यक शिक्षा और विद्यालयों में अल्पसंख्यक शिक्षकों की कमी को अविलंब दूर करने का निर्देश दिया है। अल्पसंख्यक शिक्षकों के पदों को समेकित रूप से चिन्हित कर प्रस्ताव उपस्थापित करने का निर्देश दिया है। साथ ही सीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भारत सरकार से मिलनेवाले अनुदानों को एकमुश्त लेने और इस मार्ग में आनेवाली बाधाओं को दूर करने का सख्त निर्देश दिया। चाहे वह प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, सर्व शिक्षा अभियान, साक्षरता मिशन, मॉडल स्कूल या अन्य शैक्षणिक योजनाएं हो। उन्होंने अधिकारियों को अल्पसंख्यक विद्यालयों को देय अनुदान का अविलंब भुगतान करने का भी निदेश दिया। इसके अलावा सीएम ने प्लस टू विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के पद सृजित करने और मदरसा व संस्कृत विद्यालयों के अनुदान के लिए भी प्रस्ताव देने को कहा है। 

सीएम ने कहा कि शिक्षा विभाग गुणवत्तायुक्त शैक्षणिक विकास के लिए रोड मैप तैयार करे। केवल 15 जिलों में ही मॉडल स्कूल खोले जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए सभी जिलों में ऐसे विद्यालय खोलने का आदेश दिया। 
बैठक में कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी, जैक अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह, शिक्षा सचिव बीके त्रिपाठी, सीएम के प्रधान सचिव डीके तिवारी व अन्य अधिकारी मौजूद थे।

सीएम ने जामताड़ा पथ प्रमंडल के तत्कालीन सहायक अभियंता शिव शंकर चौधरी के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति दी है। उनके विरुद्ध सीबीआइ ने 2010 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। इसके अलावा मेसो क्षेत्र पाकुड़ के तत्कालीन सहायक अभियंता राजेश कुमार गुप्ता और एनआरइपी गोड्डा के तत्कालीन सहायक अभियंता, छतरपुर के तत्कालीन अंचलाधिकारी के विरुद्ध भी अभियोजन की स्वीकृति दी है।

सीएम ने झारखंड योजना सेवा नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी। इससे योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग और परियोजना मूल्यांकन में सहुलियत होगी। इस सेवा के अंतर्गत सहायक योजना पदाधिकारी के 75 फीसदी पदों पर जेपीएससी से नियुक्ति होगी। 25 फीसदी पदों पर सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से नियुक्ति होगी(दैनिक भास्कर,रांची,4.8.11)।

बिहारः 'कालाजार' पाठ्यक्रम में शामिल

Posted: 04 Aug 2011 03:21 AM PDT

कालाजार एक ऐसी परजीवी बीमारी है, जो हर वर्ष सैकड़ों लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती है और कई लोगों की मौत का कारण भी बनती है। इस बीमारी के बारे में और इस बीमारी के वाहक मच्छर (सैंड फ्लाई) के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए बिहार के स्कूली पाठ्य पुस्तक में एक अध्याय शामिल किया जाएगा।

बिहार सरकार ने राज्य भर के सरकारी स्कूलों में कालाजार पर एक नया अध्याय शामिल करने का निर्णय लिया है।

अब तक 32 की हो चुकी है मौत

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित 38 जिलों में से 31 जिलों के विभिन्न अस्पतालों में लगभग 12000 मामले सामने आए हैं और आधिकारिक रूप से इस बीमारी के कारण इस वर्ष अबतक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले वर्ष सरकार और गैर सरकारी संगठनों की कोशिश के बावजूद कालाजार से बिहार में कम से कम 87 मौतें हुई थीं और 20,000 से अधिक लोग पीड़ित हुए थे। चिकित्सकीय भाषा में इस बीमारी का नाम 'विसरल लीशमैनिएसिस' है।


चल रहा कालाजार निरोधी अभियान

राज्य सरकार ने गंभीर रूप से प्रभावित 16 जिलों में सैंड फ्लाई के वेक्टर का प्रसार रोकने के लिए कालाजार निरोधी एक बड़ा अभियान शुरू कर रखा है। राज्य सरकार ने पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता सीपी ठाकुर के नेतृत्व में इस बीमारी के उन्मूलन के लिए काम करने हेतु एक कार्यबल गठित किया है। 

एनजीओ तैयार कर रहा सिलेबस

बिहार राज्य हेल्थ सोसायटी के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने कहा कि पटना के एक गैर सरकारी संगठन को कालाजार पर सामग्री तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कालाजार के बारे में विद्यार्थियों के बीच जागरूकता पैदा करने की रणनीति का एक हिस्सा है(दैनिक भास्कर,पटना,3.8.11)।

मध्यप्रदेशःक्लेट में 40 फीसदी मैथ्स के

Posted: 04 Aug 2011 02:29 AM PDT

एनएलआईयू में पढ़ने वाले शुभम केशरवानी कोटा से आईआईटी-जेईई की तैयारी कर रहे थे लेकिन तैयारी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वे इंजीनियरिंग में नहीं जाना चाहते। तभी इंटरनेट पर कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट के बारे में पढ़ा और भोपाल आकर कॉमन एडमिशन टेस्ट(क्लेट) की तैयारी में जुट गए।

इसी साल क्लेट की तैयारी कर रहे दृष्टांत अवस्थी ने भी मैथ्स में पढ़ाई के बाद आईआईटी-जेईई में जाने का विचार छोड़ लॉ में भविष्य देखा। स्ट्रीम बदलने का कारण स्टूडेंट्स बताते हैं कि आईआईटी-जेईई के बाद टॉप पोजिशन पाने के लिए स्टूडेंट्स एमबीए करते हैं। इसलिए नई दिशाएं तलाशने के बारे में सोचा।


आईआईटी की तरह लॉ की देश में राष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटीज और संस्थान हैं, जहां स्टूडेंट्स को इंटीग्रेटेड डिग्री के साथ बेहतरीन पोजीशन और पैकेज मिल पाता है। इस क्षेत्र में अनुभव हासिल कर खुद की लॉ फर्म शुरू की जा सकती है क्योंकि कानून विशेषज्ञों की जरूरत एक व्यक्ति से लेकर संस्था तक हर कदम पर पड़ रही है।

इंजीनियर नहीं बनना था
इस साल भोपाल से नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी(दिल्ली)में चयनित सुरभि लाल ने ऑल इंडिया रैंक 6वीं हासिल की। सुरभि कहती हैं, मैं मैथ्स स्ट्रीम की छात्रा रही लेकिन मुझे इंजीनियर नहीं बनना था। पीसीएम इसलिए पढ़ती रही क्योंकि फिजिक्स और केमेस्ट्री में मुझे काफी रुचि थी। सेंट जोसफ स्कूल की मेरी एक सीनियर छात्रा की जॉब लॉ करने के बाद लंदन की एक फर्म में लगी है। मैंने फेसबुक के जरिए उनसे संपर्क किया और तय कर लिया कि लॉ ही करना है। 

40 फीसदी मैथ्स संकाय से
रेस कोचिंग के सेंटर हेड राजेश जैन कहते हैं, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में से छोड़कर बेंगलुरू और दिल्ली जैसे शहरों से भी भोपाल आकर स्टूडेंट्स लॉ एंट्रेंस की तैयारी कर रहे हैं।

रोजगार मौके
इंटरनेशनल ट्रेड, इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट, बैंकिंग, इंश्योरेंस, रियल एस्टेट, ज्यूडिशियरी, एनवायरमेंटल लॉ, लॉ फर्म, लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिग कंपनियां, पॉवर कंपनी, शेयर ट्रेडिंग एजेंसी आदि।

एनएलआईयू भोपाल में 2010 में हुए कैंपस
आईसीआईसीआई बैंक, सिडबी, एमपीपीटीसी, टैरी, भारत पेट्रोलियम, ज्यूरिस कॉर्प, कोल इंडिया, अमरचंद-मंगलदास,मुंबई, खेतान एंड कंपनी, वेदांता रिसोर्सेज, कोचर एंड कंपनी, दिल्ली सहित कई नामी लॉ फर्म।

कोचिंग सेंटर पर भी बढ़े मैथ्स के छात्र
शहर में क्लेट की तैयारी करा रहे कोचिंग संस्थानों पर मैथ्स संकाय के छात्र भी बढ़ते नजर आ रहे हैं। हालांकि क्लेट की तैयारी कर रहे कॉमर्स के छात्र यहां मैथ्स स्ट्रीम के छात्रों के बढ़ते दखल से परेशान है। इस बारे में सी-लीड कोचिंग से सेंटर हेड दीपू कृष्णन कहते हैं, पिछले दो सालों में 10 में से 4 स्टूडेंट्स मैथ्स संकाय के होते हैं, हालांकि कॉमर्स के स्टूडेंट्स के लिए यह परेशानी का विषय है क्योंकि मैथ्स संकाय के छात्र क्लेट में 20 अंक के मैथ्स के पेपर और 45 अंक के लॉजिकल रीजनिंग के पेपर में ज्यादा अंक स्कोर करके अच्छी रैंक पा लेते हैं। गौरतलब है कि बायोलॉजी, कॉमर्स, मैथ्स और आर्ट्स किसी भी संकाय का छात्र क्लेट दे सकता है।

क्यों बना क्लेट क्रीमी ऑप्शन
- नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पांच साल बीए(एलएलबी)कोर्स की काफी डिमांड है। जिसकी वजह से मल्टीनेशनल कंपनियां कैंपस के लिए यहां आती हैं।
- अब वकील की पहचान बड़े कापरेरेट घरानों में कापरेरेट लॉयर के रूप में भी बन चुकी है।
- भोपाल स्थित एनएलआईयू के कैंपस प्लेसमेंट में शुरुआती पैकेज 5 लाख रुपए से लेकर 20 लाख रुपए सालाना तक ऑफर हुए हैं।
- बीए(एलएलबी)के बाद विभिन्न क्षेत्रों में पसंदीदा जॉब ऑफर मिल पाते हैं।
- मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने का सपना लॉयर बनकर भी पूरा किया जा सकता है।
- देश में 11 लॉ संस्थानों की 1100 सीट्स के जरिए पांच साल की इंटीग्रेटेड डिग्री में दाखिला मिल पाता है। जिसका स्तर आईआईटी संस्थानों के समतुल्य माना गया है(प्रीति शर्मा,दैनिक भास्कर,भोपाल,4.8.11)।

उत्तराखंडःसंस्कृत को लोकप्रिय बनाने के लिए अकादमी ने बीड़ा उठाया

Posted: 04 Aug 2011 02:27 AM PDT

देववाणी संस्कृत को सरल व लोकप्रिय बनाने के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने पहल की है जिसके तहत दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। दस दिवसीय सरल संस्कृत सम्भाषण शिविर का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि बुद्धदेव शर्मा सचिव उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है लेकिन आज सबसे अधिक पिछड़ गई है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को लोकप्रिय व सरल बनाने के लिए वि में संस्कृत भारती कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इस मौके पर विशिष्ठ अतिथि पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी मातृभाषा है। इसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि लोग इसकी महत्ता को समझ सकें। इस मौके पर विभाग संगठन मंत्री मनीष जुगरान ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला व कहा कि हमारे सभी वेद पुराण आदि संस्कृत में ही लिखे गए हैं। साउथ के कई गांवों में सभी संस्कृत बोलते हैं वहीं संस्कृत भारती संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए वि के 14 देशों में काम कर रही है और पूरे देश में भी प्रचार- प्रसार के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं(राष्ट्रीय सहारा,मसूरी,4.8.11)।

छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिलिंग: टॉपरों को भी छूटे पसीने

Posted: 04 Aug 2011 02:24 AM PDT

पीएमटी के फर्जीवाड़े का साया बुधवार को आयोजित काउंसिलिंग में छाया रहा। मेडिकल कॉलेज में आयोजित काउंसिलिंग में डाक्टरी की एक-एक सीट अच्छी तरह पड़ताल करने के बाद बांटी गई। टॉपरों की इतनी तगड़ी स्क्रीनिंग की गई कि उनके पसीने छूट गए।

पं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज के लेक्चर हाल में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा काउंसिलिंग का आयोजन किया गया था। तीनों मेडिकल कालेज के लिए काउंसिलिंग हुई। पीएमटी में पर्चा लीक का फर्जीवाड़ा होने के कारण सीटें आवंटित करने में बेहद सावधानी बरती गई।


इस बात को ध्यान में रखकर प्रत्येक उम्मीदवार की स्क्रीनिंग की गई। उसके बाद ही सीटें आवंटित हुईं। सुबह 9 बजे से शुरू हुई काउंसिलिंग में शामिल होने के लिए उम्मीदवार 8 बजे से ही मेडिकल कालेज परिसर में जमा होने लगे थे। हॉल के अंदर और बाहर पुलिस की कड़ी व्यवस्था की गई। खुफिया नजरें एक-एक उम्मीदवार पर टिकी थीं।

ऐसे बांटीं सीटें

कांउसिलिंग हॉल के भीतर उम्मीदवार के साथ केवल एक रिश्तेदार या प्रतिनिधि को प्रवेश दिया गया। प्रवेश देने से पहले मुख्य द्वार पर उपस्थित पुलिस कर्मियों ने प्रत्येक कॉल लेटर की जांच की। प्रत्येक स्तर पर दस्तावेजों की इतनी बारीकी से छानबीन की जा रही थी कि छात्रों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। 

पीएमटी में अच्छी रैंक होने के बावजूद उम्मीदवार इस बात को लेकर झिझक रहे थे कि कहीं कोई दस्तावेज गड़बड़ न हो जाए। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के डायरेक्टर डॉ. सुबीर मुखर्जी पूरे समय व्यवस्था का जायजा लेते रहे। 

उन्होंने समय-समय पर छात्रों को चेतावनी भी दी कि फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों को सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी। काउंसिलिंग प्रभारी रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एके शर्मा, बिलासपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसके मोहंती, जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद नेरल, डॉ. एनके गांधी, डॉ. सूरज अग्रवाल, डॉ. सिध्दार्थ पैकरा, डॉ. मानिक चटर्जी, डॉ. विजय कापसे डॉ. सुमित त्रिपाठी, डॉ. रेणुका गहिने उपस्थित थे।

वीडियोग्राफी और बायोमेट्रिक जांच से गुजरे छात्र

दस्तावेजों के परीक्षण के तुरंत बाद उम्मीदवारों को हॉल से दूसरे कक्ष में ले जाया गया। वहां परीक्षा के दौरान जिस परीक्षा केंद्र में छात्र ने परीक्षा दी थी उसके वीडियो की जांच की गई। इसमें छात्रों के चेहरे का मिलान किया गया। इसके अलावा छात्रों के अंगूठे के निशान लिए गए। अंगूठे के निशान की बायोमैट्रिक जांच की गई। परीक्षा केंद्र में लगाए गए अंगूठे के निशान और काउंसिलिंग के समय लिए गए अंगूठे के निशान की जांच के लिए फोरेंसिक लैब के विशेषज्ञ उपस्थित थे। म्यूजियम हॉल में इस जांच के लिए हाईटेक उपकरण लगाए गए थे।

इन सीटों का आवंटन

पहले दिन की काउंसिलिंग में मेरिट क्रमांक 1 से 100 तक के छात्रों के अलावा आरक्षित वर्ग की सीटों के लिए क्रमांक से 1 से 10 तक के उम्मीदवारों को आमंत्रित किया गया था। सबसे पहले रायपुर मेडिकल कॉलेज की सीटों का आवंटन किया गया। दो घंटे में ही एमबीबीएस की सामान्य सीटों का आवंटन कर दिया गया। इसी तरह पहले दिन ही जगदलपुर मेडिकल कॉलेज की (ऑल इंडिया कोटे की छोड़कर) सभी 18 सीटों का आवंटन कर दिया गया।

स्क्रूटनी से शुरू हुई प्रक्रिया

काउंसिलिंग की शुरुआत उम्मीदवारों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी के साथ हुई। दोपहर 12 बजे तक फॉर्म की स्क्रूटिनी और जांच होती रही। ऑडिटोरियम के मंच पर उपस्थित डीएमई, रायपुर और बिलासपुर मेडिकल कॉलेजों के अफसरों ने छात्रों को माइक पर बुलाना शुरू किया। 

उम्मीदवार के मंच पर पहुंचने के साथ ही उससे एक फॉर्म भरवाया गया। इसमें व्यापमं को दी गई समस्त जानकारी थी। इस फॉर्म में दी गई जानकारी और ओएमआर फॉर्म में दी गई जानकारी को क्रास चेक किया गया। किसी भी तरह की जानकारी पर संदेह होने पर छात्र के साथ-साथ प्रतिनिधि से भी कई सवाल किए गए। इसमें माता-पिता का नाम, स्कूल की पढ़ाई, निवास स्थान आदि से संबंधित कई सवाल पूछे गए।

रायपुर मेडिकल कॉलेज (60 सीटों का आवंटन)

- नो क्लास की 37, फीमेल की 19, फ्रीडम फाइटर की 2 और सैनिक कोटे की 2 सीटों का आवंटन किया गया। 

- बिलासपुर मेडिकल कॉलेज (26 सीटों का आवंटन) 

- नो क्लास की 26, फीमेल 12 और फ्रीडम फाइटर कोटे की 1 सीट का आवंटन। 

- जगदलपुर मेडिकल कॉलेज (18 सीटों का आवंटन) 

- इसमें नो क्लास, महिला और कुछ आरक्षित वर्ग की सीटें शामिल हैं।

अव्यवस्था ने किया बुरा हाल

कई तरह की जांच होने की वजह से काउंसिलिंग स्थल पर अव्यवस्था छाई रही। छात्रों को एक हॉल से दूसरे हॉल में ले जाने और फिर वापस लाने में काफी समय लगा। इससे उम्मीदवारों के साथ आए उनके अभिभावकों ने नाराजगी भी जाहिर की। पालकों का कहना था कि कुछ फर्जी छात्रों की वजह से सभी को परेशान होना पड़ रहा है। 

काउंसिलिंग के दौरान ही विकलांग छात्रा मनीषा गुप्ता के विकलांगता सर्टिफिकेट को लेकर अफसरों और छात्रा के बीच बहस होती रही। मनीषा ने अंबिकापुर शिविर में लगे चिकित्सा शिविर से जारी विकलांगता सर्टिफिकेट से सीट का आवंटन चाहा, लेकिन अफसरों ने कहा कि डीएमई या जिला चिकित्सा बोर्ड से जारी सर्टिफिकेट ही मान्य किया जाएगा। इस वजह से छात्रा को सीट का आवंटन नहीं किया गया।

आज इनकी काउंसिलिंग

4 अगस्त को रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों में आरक्षित वर्ग की सीटों का आवंटन किया जाएगा। इसके बाद 5 अगस्त को डेंटल कॉलेजों की सीटों का आवंटन करने के बाद 6 अगस्त को सभी खाली सीटों के लिए उम्मीदवारों को आमंत्रित किया गया है(दैनिक भास्कर,रायपुर,4.8.11)।

मप्र में कम हो जाएगा प्रोफेसरों का वेतन

Posted: 04 Aug 2011 02:21 AM PDT

उच्च शिक्षा कमिश्नर के नए आदेश से प्रदेश के ढाई हजार प्रोफेसरों का वेतन पैंतीस हजार रुपए तक कम हो जाएगा। इतना ही नहीं इन पर रिकवरी की तलवार भी लटकने लगी है। यही वजह है कि अब इन प्रोफेसरों के बीच हड़कंप मच गया है।

हैरत की बात ये है कि कमिश्नर ने ये आदेश प्रदेश मंत्रिमंडल के निर्णय और केंद्र सरकार के निर्देशों के खिलाफ निकाला है। दरअसल शासन ने इस साल 16 जून को प्रोफेसरों के वेतनमान के संबंध में आदेश निकाला था। इस आदेश में बताया गया था कि प्रोफेसरों की सेवा में तीन वर्ष पूरे होने पर उनके स्थानन (फिक्सेशन) की कार्रवाई उच्च शिक्षा कमिश्नर करेंगे।

लेकिन जब उच्च शिक्षा कमिश्नर ने आदेश निकाला तो उसमें बताया गया कि जिन प्रोफेसरों की सेवा के तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं, उनके स्थानन की कार्रवाई कमिश्नर करेंगे। इस आदेश का पालन होने पर प्रदेश के लगभग ढाई हजार प्रोफेसरों के वेतन से लगभग पैंतीस हजार रुपए कटने की नौबत आ गई है। प्रोफेसरों को ये वेतन 1 मई 2010 से दिया जा रहा है और आदेश के कारण प्रोफेसरों से रिकवरी भी की जाएगी।

डॉक्टरों का भी कटा था वेतन

हाल ही में राज्य सरकार के प्रस्ताव पर वित्त विभाग के इनकार के बाद प्रदेश के तीन हजार डॉक्टरों का वेतन भी कम कर दिया गया था। लेकिन मामले में मुख्यमंत्री के दखल के बाद सरकार ने न ही वेतन में कटौती की, न ही किसी तरह की रिकवरी। 

ऐसे हुआ था स्थानन
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2008 को आदेश दिए थे कि देश के उन सभी शिक्षकों का वेतनमान 12,400-18,000 रुपए के ग्रेड से 37,000-67,000 रुपए के ग्रेड में कर दिया जाए, जो 1 जनवरी 2006 को सेवा में तीन वर्ष पूरे कर चुके हैं। इसके बाद प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद पिछले साल 1 मई 2010 को प्रदेश में भी लागू कर दिया था। 

ये होता है स्थानन
जब कोई शासकीय सेवक सेवा के दौरान सरकार के निर्धारित मापदंड को पूरा कर लेता है तो उसे अगला ग्रेड मिल जाता है। जिससे उसके वेतन में वृद्धि हो जाती है। 

यदि कमिश्नर आदेश वापस नहीं लेते हैं तो संघ उच्च शिक्षा मंत्री से मिलकर आदेश वापस लेने की मांग करेगा। कमिश्नर के नए आदेश से ढाई हजार से ज्यादा प्रोफेसर प्रभावित होंगे।
डॉ. कैलाश त्यागी, अध्यक्ष, प्रदेश प्राध्यापक संघ

शासन के निर्देश के बाद मैंने आदेश निकाले गए हैं। अपनी तरफ से मैंने कोई आदेश नहीं दिया है।
वीएस निरंजन, कमिश्नर, उच्च शिक्षा(अभिषेक दुबे,दैनिक भास्कर,भोपाल,4.8.11)

उत्तराखंडःडिप्लोमा इंजीनियर्स की अधिकांश मांगों पर सहमति

Posted: 04 Aug 2011 02:19 AM PDT

डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ग्रामीण अभियंतण्रसेवा की अधिकांश मांगों पर सरकार ने सहमति जता दी है। इस पर जल्द कार्यवाही की जाएगी। संघ की मांगों पर बुधवार को विभागीय मंत्री गोविंद सिह बिष्ट की अध्यक्षता में विधानसभा में त्रिस्तरीय वार्ता हुई। वार्ता के बाद संघ की सेवा नियमावली, वेतन विसंगति, वरिष्ठता के अनुसार प्रोन्नति, प्रतिनियुक्ति नीति, विभाग का नाम बदलकर ग्रामीण निर्माण विभाग करना, प्रशासनिक अधिकार और पर्याप्त बजट आदि मांगों को मान लिया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ मांगों पर शासन को परीक्षण करने को कहा गया है। इस असवर पर विभागीय सचिव विनोद फोनिया, मुख्य अभियंता बीएस कैड़ा, संघ की ओर से प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर नवीन काण्डपाल, महासचिव एपी काला, उपाध्यक्ष वीएस रागड, आरपीएस नेगी और डीएस बागडी आदि उपस्थित थे(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,4.8.11)।

हिमाचलःशिक्षा विभाग में प्लस टू पास ही बन पाएंगे क्लर्क

Posted: 04 Aug 2011 02:18 AM PDT

शिक्षा विभाग में अब प्लस टू पास चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही क्लर्क बन पाएंगे। विभागीय स्तर पर ऐसे 130 कर्मियों की सिनियोरिटी लिस्ट को जारी कर दिया गया है, जिनमें से क्लर्क बनाए जाएंगे। ऐसे कर्मचारियों से प्लस टू का प्रमाण पत्र जमा करवाने को कहा गया है, ताकि पदोन्नति प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके।


सिनियोरिटी लिस्ट में शामिल नाम: विभागीय स्तर पर तैयार की गई सिनियोरिटी लिस्ट में 130 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के नाम हैं, जिनके पास प्लस टू की शैक्षणिक योग्यता होने पर उनको क्लर्क बनाया जा सकता है। इसमें रमेश लाल, कुलदीप चंद, सितार मोहम्मद, कमला देवी, जयपाल, हीरा सिंह, प्रेम सिंह, रूप चंद, जय लाल, रमेश कुमार, प्रेम पाल, खोदरू राम, नेक राम, तारा देवी, रमेश कुमार, बुद्ध राम, मीना कुमारी, ओम प्रकाश, विपिन कुमार, मदन लाल, सुरेंद्र कुमार, यशवंत सिंह, अनीता देवी, कमल कौर, उगम राम, कंठी राम, राजपाल, मदन लाल, मनोज कुमार, कुंज लाल जगदीश कुमार, वीना महाजन, मनोहर लाल, सुरेंद्र कुमार, मकहान सिंह, हिमावती, प्यारे लाल, विजय कुमार, पवन कुमार, गीता शर्मा, बृज लाल, लीला धर, राजेंद्र कुमार, सीमा कुमारी, किशोरी लाल, कृष्णा नंद, नरेश कुमार, संतोष देवी, बलवीर सिंह, सरला देवी, अनिल कुमार, राकेश कुमार, नरेंद्र सिंह, अश्विनी कुमार, कश्मीर सिंह, बंता देवी, रमेश चंद, जगन देवी, नील चंद, चेतराम, मीरा देवी, सुरेंद्र दत्त, बारू राम, बलवंत सिंह, तेजेंद्र सिंह, सुभाष चंद, सुनीता देवी, गोपी राम, रणजीत सिंह, सुदेश कुमारी, जगत राम, गुलाब सिंह, कांता शर्मा, विद्या सिंह, पवन कुमार, 
प्रदीप कुमार, भगत राम, रणजीत सिंह, मदन लाल, राकेश कुमार, पदम सिंह, लीला देवी, राज कुमार, अत्तर सिंह, ओम प्रकाश, लीला राम, सोम नाथ, अजय कुमार, सोहन लाल, राम गोपाल, भगत राम, नोख राम, नरेश कुमार, ओम प्रकाश, शर्मिला देवी, देवकी नंदन, हीरो देवी, लुदर चंद, प्रदीप कुमार, मोहिंद्र सिंह, नरेश कुमार, विजय कुमार, प्रेम लाल, अशोक कुमार, शारू राम, दुर्गा देवी, रंभा देवी, कंवर सिंह, नरेश चंद, बिट्टू राम, जोगिंद्री देवी, संजीव कुमार, मनोहर लाल, माया देवी, सतीश कुमार, सुरेश चंद, सुधीर कुमार, केशव राम, मिन्टो शर्मा, चंपा देवी, रक्षा कुमारी, मुकेश चांद, देविंद्र, जया राम, बाबू राम, भगत राम, दौलत राम, जीत सिंह, स्वर्ण कुमार एवं चंद्र कला शामिल है। 

सप्ताह में जमा करवाए प्रमाण पत्र

चतुर्थ श्रेणी कर्मी से क्लर्क बनने के लिए प्लस टू प्रमाण पत्र को सप्ताह के भीतर जमा करवाना होगा। यदि कर्मचारी प्लस टू पास नहीं है, तो उसे पदोन्नत नहीं किया जाएगा(कुलदीप शर्मा,दैनिक भास्कर,शिमला,4.8.11)।

एम्स परीक्षाओं की गड़बड़ी में 4 नए मामले दर्ज

Posted: 04 Aug 2011 06:22 AM PDT

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)की एमबीबीएस और पीजी की प्रवेश परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं और नतीजों में गड़बड़ियों को लेकर सीबीआई ने बुधवार को चार नए मामले दर्ज किए हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि एम्स के वरिष्ठ अधिकारी इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं। इसके पूर्व 2 जून को सीबीआई ने 8 मई को हुई एम्स की पीजी प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर मामला दर्ज कर छह लोगों को गिरफ्तार किया था।

इस सिलसिले में दर्ज किए गए नए मामले

-जनवरी 2010 की पीजी परीक्षा में सात परीक्षार्थियों की कॉपियां बदलने का आरोप है। इन सभी सात का अन्य कॉलेजों में एमडी या एमएस में चयन हो गया। एम्स की पीजी प्रवेश परीक्षा से दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी चयन होता है।

-जून 2010 में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में छह कॉपियों में फेरबदल किया गया। संबंधित छह छात्रों में से एक को प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश मिल गया। 


- नवंबर 2010 में हुई पीजी परीक्षा में आठ छात्रों की कॉपियों में गड़बड़ी की गई। सभी आठ मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में कामयाब रहे। इनमें से ही तीन को एम्स में एमडी या एमएस में ही प्रवेश मिल गया। 

- जनवरी 2011 में हुई पीजी प्रवेश परीक्षा में चार उम्मीदवारों की कॉपियों में गड़बड़ी की गई। चारों को विभिन्न मेडिकल कालेजों में एमडी या एमएस कोर्स में प्रवेश मिल गया(दैनिक भास्कर,दिल्ली,4.8.11)।

दैनिक जागरण की रिपोर्टः
मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षाओं पर सवालिया निशान लग गया है। 2010 और 2011 के दौरान एम्स द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाते हुए सीबीआइ ने चार एफआइआर दर्ज की हैं। इसके पहले मई 2011 में हुई पीजी प्रवेश परीक्षा में हुई धांधली के आरोप में सीबीआइ एफआइआर दर्ज कर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। सीबीआइ के अनुसार इनके पीछे भी इसी गिरोह का हाथ है। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जनवरी 2010 से जनवरी 2011 के बीच एम्स द्वारा आयोजित चार प्रवेश परीक्षाओं में धांधली के सबूत मिले हैं। इनमें 25 छात्रों को फर्जी तरीके से पास कराने के सबूत मिले हैं। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके लिए इन छात्रों से 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक की रिश्वत ली गई थी। इन सभी परीक्षाओं में इस गिरोह का काम करने का तरीका एक ही था। पैसे देने वालों छात्रों की कम्प्यूटर से पढ़ी जाने वाली (ऑप्टिकल मार्क रीडर-ओएमआर) उत्तर पुस्तिकाओं को ही बदल दिया जाता था। सीबीआइ ने इन बदली हुई उत्तर पुस्तिकाओं को ढूंढ निकाला है। जिन मामलों में सीबीआइ ने एफआइआर दर्ज की है, उनमें पहली जनवरी 2010 में हुई पीजी प्रवेश परीक्षा है। इसमें कुल सात छात्रों को रिश्वत लेकर इस गिरोह ने पास करा दिया था। इसके आधार पर इन सभी छात्रों को देश के विभिन्न मेडिकल कालेजों में एमडी और एमएस कोर्स में नामांकन मिल चुका है। इसके बाद इस गिरोह ने जून 2010 में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए हुई परीक्षा में ही छह छात्रों को रिश्वत लेकर उत्तीर्ण करा दिया था। इसी तरह नवंबर 2010 और जनवरी 2011 में पीजी प्रवेश परीक्षाओं में भी इस गिरोह ने आठ और चार छात्रों को पैसे लेकर पास कराया था। लेकिन मई 2011 में हुई पीजी प्रवेश परीक्षा में इसी तरह की धांधली की भनक सीबीआइ को लग गई और उसने दो जून को एफआइआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। इस सिलसिले में सीबीआइ सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

BPSC परीक्षा में धांधली, छात्रों की भूख हड़ताल शुरू

Posted: 04 Aug 2011 02:12 AM PDT

बीपीएससी की 53वीं से 55 वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा परिणाम में धांधली का आरोप लगाते हुए बीपीएससी कार्यालय के मुख्य द्वार पर छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की। पांच अगस्त शाम पांच बजे यह अनशन खत्म होगा। भूख हड़ताल एआईएसएफ के तत्वावधान में आयोजित किया गया। छात्र मौजूदा परीक्षा परिणाम को रद्द करने व संशोधित परीक्षा परिणाम प्रकाशित करने की मांग कर रहे थे।

बताते चलें कि मंगलवार को छात्रों ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसके अतिरिक्त गुरुवार को छात्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, बिहार के राज्यपाल, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य सक्षम लोगों को त्राहिमाम संदेश भेजेंगे(दैनिक भास्कर,पटना,4.8.11)।

उत्तराखंडः1300 प्रवक्ताओं की जल्द होगी भर्ती

Posted: 04 Aug 2011 02:11 AM PDT

शिक्षा विभाग में जल्द ही 1300 प्रवक्ताओं की भर्ती की जाएगी। इस संबंध में प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को इसी सत्र में लैपटाप उपलब्ध कराए जाएंगे। बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में 80 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र- छात्राओं को नि:शुल्क लैपटॉप देने की घोषणा के अमल पर हो रही देरी पर नराजगी व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा सचिव को निर्देश दिये कि बच्चों को इसी सत्र में लैपटॉप उपलब्ध करा दिये जाए, ताकि वे उनका उपयोग कर सके। इसके लिए आकस्मिकता निधि के बजट की व्यवस्था की जाए। इस शिक्षा सत्र में कोई भी स्कूल बंद नही रहना चाहिए। जिन स्कूलों में अध्यापक प्रशिक्षण अवधि में है, उन स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि अध्यापकों के प्रशिक्षण में होने के चलते कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की प्रशिक्षण के लिए ऐसी नीति बने की बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने निर्देश दिये कि जनवरी 2011 से अब तक जूनियर हाई स्कूलों और हाई स्कूलों के उच्चीकरण के संबंध में की गई 108 घोषणाओं को तत्काल लागू किया जाय। इसके लिए आगामी 10 दिनों में शासनादेश जारी कर इसी सत्र से इन स्कूलों का उच्चीकरण कर दिया जाय। उन्होंने शिक्षा महकमें में मानव संसाधन प्रबंधन व्यवस्था को भी मजबूत करने के निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने इस बात की भी रिपोर्ट ली कि जिन प्रवक्ताओं को पदोन्नत किया गया है उनमें से कितनों की तैनाती कर दी गई है। उन्होंने जिलाधिकारियों के स्तर पर भी प्राथमिक विद्यालयों एवं जूनियर हाईस्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिये। सचिव शिक्षा मनीषा पंवार ने बताया कि विभाग में अगले 10 दिनों में लगभग 1300 प्रवक्ताओं की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इसके साथ ही 1800 से अधिक एल़टी़ ( ऋ चित्रा नाग स् उत्तराखंड रक्षा मोर्चा की रणनीति 14 अगस्त को डिफेंस कालोनी में रैली निकालकर वृहद सम्मेलन आयोजित करना प्रदेशभर में जन जागरण अभियान चलाना और जन सभाएं आयोजित करना, जनपदवार समितियों का गठन कर बैठकों का दौर शुरू करना राजनीतिक मंच स्थापित करने के लिए जन समर्थन जुटाना सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर सिपाही स्तर के पूर्व सैनिकों को एकजुट करना भ्रष्टाचार के खिलाफ सूचना के अधिकार को हथियार बनाना सामंजस्य बढ़ाने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करनाप्रवक्ताओं द्वारा शीघ्र ही अपना पदभार ग्रहण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हाईस्कूल व इंटरमीडियेट परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले लगभग 450 बच्चे है, जिन्हें नि:शुल्क लैपटॉप दिये जाएंगे(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,4.8.11)।

हिमाचलःशिक्षकों की बैचवाइज भर्ती के इंटरव्यू शुरू

Posted: 04 Aug 2011 02:09 AM PDT

शिक्षा विभाग में 4 अलग-अलग श्रेणियों के 510 शिक्षकों के पद बैचवाइज आधार पर भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कुल 1020 पदों में से 50 फीसदी पद बैचवाइज आधार पर भरे जाने हैं। इतने ही पद भरने की प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड ने भी शुरू कर दी है। रोजगार कार्यालयों से नाम मंगवाने के बाद यह प्रक्रिया 9 अगस्त से शुरू होगी। जिन जिलों में खाली पद ज्यादा हैं वहां इंटरव्यू दो हफ्ते तक चलेंगे।


रोजगार कार्यालयों ने सभी बैचवाइज शिक्षकों के नाम की सूची शिक्षा विभाग को भेज दी थी, लेकिन पदों के हिसाब से संबंधित डिप्टी डायरेक्टर कार्यालयों ने हर पद के हिसाब से 4 गुणा ज्यादा उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए कॉल किया है। इनमें अलग-अलग श्रेणियों के लिए बैचवाइज आधार का वर्ष भी अलग-अलग तय किया गया है। हमीरपुर में शास्त्री पदों में एससी के लिए 1994, ड्राइंग टीचर्स के लिए जनरल श्रेणी में 1980, एससी 1982 तक के उम्मीदवार बुलाए हैं। एसएसएसबी ने भी इनके पदों को चयन प्रक्रिया से भरने के लिए 22 और 31 अगस्त को इनकी लिखित छंटनी परीक्षा की तारीख तय की है(दैनिक भास्कर,शिमला,4.8.11)।

छत्तीसगढ़ पीईटी एडमिशन : पहले चरण में 6933 सीटें हुईं फुल

Posted: 04 Aug 2011 02:08 AM PDT

प्रदेश के 50 इंजीनियरिंग कॉलेजों की लगभग 20 हजार सीटों में से 6933 सीटें बुधवार की शाम तक भर गई थीं। पहली अलॉटमेंट लिस्ट में 11 हजार 953 सीटों का आवंटन हुआ था। पहले राउंड में प्रवेश लेने का गुरुवार को अंतिम दिन होगा। बुधवार तक सबसे अधिक प्रवेश शंकराचार्य कॉलेज में हुए।

यहां 502 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो गई। शंकराचार्य के बाद रूंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज में 379, छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 334, बीआईटी में 356 और आरआईटी में 189 प्रवेश हो चुके थे। यह संयोग ही है कि तीनों सरकारी कॉलेजों में प्रवेश का आंकड़ा एक ही है।


रायपुर, जगदलपुर और बिलासपुर के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेजों में बुधवार तक 195-195 प्रवेश हो चुके हैं। गुरुवार को पहले राउंड की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। बची हुई सीटों के लिए काउंसिलिंग का दूसरा राउंड 6 अगस्त से शुरू होगा, जो छात्र अपने अलॉटमेंट से संतुष्ट नहीं हैं, वह 6 से 9 अगस्त के बीच में दोबारा काउंसिलिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। सीट अलॉमेंट की दूसरी लिस्ट 10 अगस्त को जारी होगी।

पीईटी के साथ राज्य के फार्मेसी कॉलेजों के लिए भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया बहुत सुस्त तरीके से हो रही है। लगभग आठ सौ सीटों के लिए बुधवार तक सिर्फ 418 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और च्वॉइस फिलिंग की है। डाक्यूमेंट्स चेक कराने के लिए सिर्फ 170 प्रतिभागी सेंटर्स तक पहुंचे हैं। फार्मेसी में पांच अगस्त तक च्वॉइस फिलिंग और डाक्यूमेंट्स के परीक्षण का काम चलेगा। पहली अलॉटमेंट लिस्ट 6 अगस्त को जारी होगी(दैनिक भास्कर,रायपुर,4.8.11)।

मुंबईःएफवाइ जूनियर कॉलेज में कहीं टेंशन बन न जाएं बेटरमेंट ऑप्शन?

Posted: 04 Aug 2011 12:37 AM PDT

एफवाइ जूनियर कॉलेज में ऐडमिशन लेने के बाद से ही कई स्टूडेंट्स ने बेटरमेंट ऑप्शन के चलते अपना ऐडमिशन रद्द कर दिया है। यहां तक कि ये स्टूडेंट्स अपने प्रोविजनल ऐडमिशन को कंर्फम होने का भी इंतजार नहीं कर रहे। इस तरह से हो रहे कैंसलेशन से मुंबई के कई कॉलेजों के प्रिंसिपल चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

उनका कहना है कि ऑनलाइन ऐडमिशन के बाद कई कॉलेजों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जबकि , कई स्टूडेंट्स ने तो अंतिम वक्त में अपना इरादा बदलते हुए कॉलेज भी बदल डालें हैं , क्योंकि उनके पास फर्स्ट कट ऑफ लिस्ट में जिन कॉलेजों का नाम आया था उससे बढि़या कॉलेज दूसरी कट ऑफ लिस्ट में मिला हैं। हालांकि , प्रिंसिपलों के पास इस सवाल का कोई उचित जवाब नहीं हैं।


कुछ ऐसा ही कहना है आर . डी . नैशनल कॉलेज , ब्रांद्रा के प्रिंसिपल डॉ . दिनेश पंजवानी का। बकौल पंजवानी , हम लोग चिंतित रहते हैं कि आखिरी लिस्ट की घोषणा होने के बाद कितने स्टूडेंट्स एफवाइ में निश्तित तौर से ऐडमिशन लेते हैं और कितने नहीं। इस तरह से हो रही समस्याओं को लेकर हम लोग अथॉरिटीज को एक पत्र लिखने का प्लान बना रहे हैं। कैं सिल हो रहे आवेदन पत्रों में साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स भी शामिल हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ दूसरी कट ऑफ लिस्ट आने के बाद ही इस तरह की समस्याएं आईं है। 
संभावना तो यह भी है कि जब आठ अगस्त को तीसरी लिस्ट निकलेगी तो उसके बाद भी इस तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती है। उदाहरण के लिए विले पार्ले स्थित साठ्ये कॉलेज को लें तो वहां चौदह स्टूडेंट्स ने सेकंड लिस्ट की घोषणा होने के अगले दिन ही अपने प्रोविजनल कॉलेज ऑप्शन को कैंसल कर दिया। इसके पीछे वजह सिर्फ ये रही कि इन स्टूडेंट्स को फर्स्ट लिस्ट में मिले कॉलेज से बढि़या कॉलेज सेकंड लिस्ट में मिल गए। 

आंकड़ों पर गौर करें तो जैसे ही जूनियर कॉलेज के लिए जनरल कैटिगरी की सेकंड लिस्ट घोषित हुईं , उसके अगले ही दिन 1386 स्टूडेंट्स ने पहले कट ऑफ लिस्ट में मिले कॉलेज कैंसल कर दिए। बता दें कि फर्स्ट लिस्ट में अंतिम तौर पर 86,881 स्टूडेंट्स ने ऐडमिशन लिए थे। 

फर्स्ट लिस्ट के अंतर्गत आए हुए नाम के आधार पर स्वामी विवेकानंद कॉलेज में ऐडमिशन पाने वाले राजीव सिंह कि मानें तो वे दूसरी लिस्ट आने के बाद खुश हैं , क्योंकि इनका नाम अपने मनपसंद कॉलेज आर . एन . रूईया में आ चुका हैं। जानकारों की मानें तो बेटरमेंट ऑप्शन के चलते दो परेशानियों का सामना कॉलेज ऐडमिनिस्ट्रेशन के साथ - साथ अथॉरिटीज को भी होता है। इससे कैंसलेशन और रि - ऐडमिशन की प्रवृति स्टूडेंट्स में दिनों दिन बढ़ती जाएंगी। 

क्या है बेटरमेंट ऑप्शन ? 
एफवाई जूनियर कॉलेज में ऐडमिशन की फर्स्ट लिस्ट में जिन स्टूडेंट्स का नाम आ जाता है , वे सेकंड और थर्ड लिस्ट का इंतजार करते हैं। इस लिस्ट में अगर फर्स्ट लिस्ट की अपेक्षा बढि़या कॉलेज में ऐडमिशन के लिए उनका नाम आता है , तो वे प्रोविजनल यानी फर्स्ट लिस्ट के नाम को कैंसिल कर सेकंड और थर्ड लिस्ट में आए कॉलेजों में ऐडमिशन ले लेते हैं(मनीष झा,नवभारत टाइम्स,मुंबई,4.8.11)।

उत्तराखंडःशिक्षकों की तबादला नीति को नहीं मिली मंजूरी

Posted: 04 Aug 2011 12:36 AM PDT

शिक्षकों की तबादला नीति मंजूर न होने से 40 हजार शिक्षकों के उम्मीदों पर पानी फिर गया है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत तबादला नीति में शिक्षा विभाग से संशोधन करने के लिए कहा गया है। शिक्षा मंत्री खजान दास ने कहा कि तबादला नीति को अभी मंजूरी नहीं दी गई है। इसे संशोधन के साथ कैबिनेट की अगली बैठक में रखा जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस सत्र में स्थानांतरण नहीं किए जाएंगे। प्रशासनिक व मेडिकल आधार पर आवश्यकता के अनुसार तबादले किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त मंडल स्तर पर स्वेच्छा से गढ़वाल से कुमाऊं और कुमाऊं से गढ़वाल तबादला चाहने वाले शिक्षकों से आवेदन मांगे गए है। इसके लिए इन शिक्षकों को वरिष्ठता से हाथ धोना पड़ेगा। जिस मंडल में इनकी तैनाती होगी वहां इनकी वरिष्ठता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभाग को ऐसे करीब 250 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। शिक्षा विभाग की तबादला नीति के विषय में उन्होंने कहा कि कैबिनेट के समक्ष इसको रखा गया था, लेकिन कुछ बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे। तबादला नीति को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कैबिनेट की ओर से कुछ सुझाव भी आए हैं(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,4.8.11)।

डीयू सख्त : महंगी पड़ेगी कैंपस में पोस्टरबाजी

Posted: 04 Aug 2011 12:35 AM PDT

नए छात्रों के स्वागत करने के नाम पर छात्र संघ की राजनीति करने वाले छात्र नेताओं को अब पोस्टरबाजी महंगी पड़ सकती है। कैंपस की दीवारों व कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान लगाए गए आक र्षक दिशा-सूचक बोर्ड को बदरंग करने वाले इन पोस्टरों और पर्चियों से नाराज दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब इनकी वीडियोग्राफी करनी शुरू कर दी है।

प्रशासन वीडियोग्राफी की मदद से छात्रनेताओं को छात्रसंघ चुनाव की दौड़ से बाहर करने के साथ ही उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस में बंगाल एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की तैयारी में है।

डिप्टी प्रोक्टर डॉ.मनोज अरोड़ा ने बताया कि उत्तरी हो या फिर दक्षिणी परिसर विश्वविद्यालय में कहीं भी प्रिंटेट पोस्टर चिपकाने की इजाजत नहीं है। वॉल ऑफ डेमोक्रेसी को छोड़ कैंपस में कहीं भी पोस्टर लगाना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है।


इसी के मद्देनजर विश्वविद्यालय में नए सत्र की शुरुआत के साथ नजर आए पोस्टरों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराई जा रही है। इस बात के सबूत जुटाए जा रहे हैं कि कौन छात्र पोस्टरबाजी में लिप्त रहा है। एक चरण की रिकॉर्डिग करा ली गई और अब दूसरे चरण का काम जारी है।
 
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह सबूत उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनेंगे, जो चुनाव लड़ेंगे। प्रोक्टर कार्यालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नाराजगी पोस्टरबाजी और संगठनों के नामों को कैंपस के पेड़ों पर गोदने को लेकर भी है। 

यही वजह है कि मुख्य सुरक्षा अधिकारी को खासतौर पर इस बात की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह उत्तरी व दक्षिणी परिसर में पोस्टरबाजी की न सिर्फ वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी कराए बल्कि देर रात व सुबह-सुबह उन लोगों की भी धरपकड़ करे जो इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हैं(दैनिक भास्कर,दिल्ली,4.8.11)।
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Palash Biswas
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