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Wednesday, March 2, 2016

करें ना हल्ला देश हवाले दल्ला! दिनदहाड़े पीएफ डकैती पकड़ी गयी तो बंधने लगी घिघ्घी,नकद लेनदेन पर टैक्स जो लगा,उसपर हल्ला हुआ नहीं है अभी। पीएफ पर टैक्स लगाया।अब नानाना,सचकभी ना कहना।


करें ना हल्ला देश हवाले दल्ला!

दिनदहाड़े पीएफ डकैती पकड़ी गयी तो बंधने लगी घिघ्घी,नकद लेनदेन पर टैक्स जो लगा,उसपर हल्ला हुआ नहीं है अभी।

पीएफ पर टैक्स  लगाया।अब नानाना,सचकभी ना कहना।



पलाश विश्वास


दिनदहाड़े पीएफ डकैती पकड़ी गयी तो बंधने लगी घिघ्घी,नकद लेनदेन पर टैक्स जो लगा,उसपर हल्ला हुआ नहीं है अभी।


फिलहाल दो लाख की लेन देन पर टैक्स लग रहा है।आप अपनी बचत के शफेद धन से कोई घर भी बनाने चले तो पहले टैक्स अलग रखें।यही लेनदेन टैक्स समरसता का अगला अध्याय है।जो पास हो गया तो फिर बाहैसियत करदाता अंबानी अडानी के बराबार हो जायेंगे हम।यह कर ढांचे का सरलीकरण है।


बाकी इस जहरीले बजटबुलेट कि मिथाइल आइसोसाइनाइट का किस्सा हम पहले ही बांच चुके हैं।


मिथाइल आइसोसाइनाइट जैसा निःशब्द कत्लेआम का इंतजाम यह बजट!

डाउ कैमिकल्स के वकील अब समूचे देश को भोपाल गैस त्रासदी में बदलने लगे!



पीएफ पर टैक्स  लगाया।अब नानाना,सचकभी ना कहना।


बगुला संप्रदाय के अर्थशास्त्र के मुताबिक फर्जी आंकड़ों के दल्ला राजकाज के फर्जी विकास की आर्थिक समीक्षा में सीना ठोंककर पीएप पर टैक्स लगाने की बात कही गयी थी।


बजट में पीएफ टैक्स का प्रावधान लागू करते वक्त था नहीं सोचने समझने का कि गांव,देहात,खेत,इत्यादि के बहाने जल जंगल जमीन के सफाया की सलवा जुड़ुम हुकूमत की  मेहनतशो और कर्मचारियों को,मध्यवर्ग को गरीबों और किसानों से अलग करने की हिंदुत्व राजनीति आखिर खुल्ला चांदमारी है और मेहनतश और सरकारी कर्मचारी संगठित ही नहीं हैं,चुनाव नतीजे बदल देने वाले लोग हैं।


थोड़ा सा शोर शराबा हुआ नहीं कि सुर बदल गया।


समझ लो भाइयों कि ये कायरों की जमात है।जो संकट की घड़ी में गिरगिट की तरह रंग बदलती है।यह दल्ला बहुतल्ला है।


दिनदहाड़े पीएफ डकैती पकड़ी गयी तो बंधने लगी घिघ्घी,नकद लेनदेन पर टैक्स जो लगा,उसपर हल्ला हुआ नहीं है अभी।


बीमा पहले से वे बाजार में डाल चुके हैं।

रोजगार आजीविका,जल जंगल जमीन सबकुछ बाजार में डाल चुके हैं बाजार के दल्ला।


बाकी रही जेबें,वे कट ही रही हैं।

दिल काट लिया,दिमाग काट लिया,वजूद किरचों में बिखेर दिया, जमीर का नामोनिशां मिटा दिया,इंसानियत जमींदोज हैं और कायनात कयामत है।


इस आलम में पीएफ और अल्प बचत बाजार में डालने का मौका उनने चुना तो डकैती पकड़ी गयी और फौरन घिघ्घी बांधते हुए सफाई कि असल पर नहीं,ब्याज पर टैक्स लगेगा।


हम उन्हें उल्लू के पट्ठे नजर आते हैं।


इसीलिए जिन मनुस्मृति की वजह से संघ परिवार की दुर्दशा भारत दुर्दशा है,उनहीं मनुस्मृति को मायावती के मुकाबले यूपी में ताजपोशी के लिए उछाला जा रहा है।


हम उन्हें उल्लू के पट्ठे नजर आते हैं।


क्योंकि हम बहुसंख्यक आस्थावान हिंदू हैं और आस्था हमारी ताकत नहीं,दुखती हुई रग है।


आस्था हमारा इहलोक नहीं है,परलोक है।

आस्था हमारी आत्मा नहीं है बल्कि आस्था हमारे लिए मुक्त बाजार का अनंत भोग है और हम सभी लोग कमोबेश बजरंगी हैं।


सोचना समझना हमारे बस में नहीं है।दल्ला की दलाली में हम धर्म कर्म न्यौच्छावर कर चुके हैं और यही हमारी देश भक्ति है।

इसीलिए हम उन्हें उल्लू के पट्ठे नजर आते हैं।




कोई उनसे पूछे ब्याज पर टैक्स लगेगा तो हम जैसे ईमानदार नागरिकों को क्या बाबाजी का ठुल्ल्लु मिलेगा।


इसी तरह एफडीआई और विनिवेश में जोर का झटका धीरे से लगाकर अब मल्टी ब्रांड खुदरा बाजार में सौ फीसदी एफडीआई है और पूरा देश ओएलएक्स पर विनिवेश के बहाने सेल पर है।


किसानों और कारोबारियों को ठिकाने लगाने के बाद अब मेहनतकशों और कर्मचारियों के मरी हुई आम जनता से अलग करने के लिए गरीबी का याह वसंत विलाप है,जिसका मकसद है,एक तीर से दो निशाने।


हम उन्हें उल्लू के पट्ठे नजर आते हैं।



गरीब तजिंदगी यह हिसाब जोड़ नहीं सते कि उन्हें क्या मिला,क्या नहीं मिला,उनके हिस्से ख्याली पुलाव।पढ़े लिखे तबके वैसे ही बुड़बक हैं जिनने बाबासाहेब को धोखा दिया और आम जनता को रगड़ने में वे हुकूमत के हाथ पांव हैं तो आम जनता को कुत्तों ने नहीं काटा कि उनका साथ देंगे।बाप का माल जो लाखों करोड़ पीएफ में है,वह इन ससुरों को देने के बजाय बाजार में झोंक देने का सही मौका है।


हम उन्हें उल्लू के पट्ठे नजर आते हैं।



हल्ला हुआ तो संबव है कि वे सच कह रहे हैं कि फिलहाल ब्याज तक कयामत रुकी हुई है और फिर मौत को न्यौता देने की जरुरत नहीं होती।बिना बजट आखेट का सिलसिला ही सुधार है।यही सिलसिला कत्ल का सिलसिला है।जिसका विरोध राजद्रोह है यानी हुकूमत के खिलाफ बगावत।


हां, जी हुकूमत के खिलाफ बगावत राजद्रोह है।

हां, जी हुकूमत के खिलाफ बगावत  राजद्रोह है,राष्ट्रद्रोह नहीं है।

सत्ता के खिलाफ,जनसंहारी नीतियों के खिलाफ खड़ा होना राजद्रोह है,ऐसा राजद्रोह जो राष्ट्रहित में अनिवार्य है।

राष्ट्रहित में अनिवर्य राजद्रोह को वे राष्ट्रद्रोह बता रहे हैं।

हम उन्हें उल्लू के पट्ठे नजर आते हैं।



हमभी वही समझ रहे हैं क्योंकि हम अंध राष्ट्रवादी हैं और यह नहीं सझते कि राष्ट्र को बेजनेवाले दल्ला राज के खिलाफ विद्रोह अनिवार्य है और यह राजद्रोह राष्ट्रद्रोह नहीं है,राष्ट्रप्रेम है।

जनहितों से ऊपर राष्ट्र हित नहीं होता।


जनहित ही राष्ट्र है क्योंकि राष्ट्र जनता से बनता है अबाध विदेशी पूंजी से नहीं।अबाध विदेशी पूंजी के दल्लाराज के खिलाफ इसलिए विद्रोह अनिवार्य है।हुकूमत के खिलाफ इसी बगावत को वे राष्ट्रद्रोह बता रहे हैं और हम मान भी रहे हैं।फिर हम भीड़तंत्र में भेड़ हैं ।


रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या को छुपाने के लिए जेएनयू को निशाना बनाया तो विश्वविद्यालयों में आग लगी है,जिसमें झुलसने लगी मनुस्मृति तो वैशाली की नगरवधू का अवतार हो गया।


वर्धमान में मुंह की खानी पड़ी सत्ता को,जेएनयू में बजरंगी बवाल की वजह से दिवालिया बादशाह सरेआम राजपथ पर नंगे खड़े हैं और कड़ी शिकस्त के बावजूद घनघोर हिंदुत्व का रास्ता चुन रहे हैं और उन्हें अपनी इस नंगी सियासत में मजा भी खूब आने लगा है।


जयश्री राम के नारे फिर गूंजने लगे हैं।

फिर कारसेवा की तैयारी है।

कश्मीर में अलगाववादियों के साथ सत्ता शेयर करने की उतावली बेशर्म सियासत को कश्मीर शब्द के उच्चारण से ही सजग नागरिकों को राष्ट्रद्रोही करार देने में सत्ता की सुगंध मिल रही है।


जितना तेज हो रहा है आंदोलन,जितने गोलबंद हो रहे हैं देशभर में मनुष्य,उतने ही अंधेरे के जीवजंतु अंधियारा का कारोबार फैला रहे हैं।इस फैले हुए रायते में वे अपनी कब्र खोदने लगे हैं।


संसद में जनता की आवाज गूंजने लगी तो बेगुनाह इशरत जहां के मुसलमान होने का फिर फायदा यह कि एक और मुसलमान को गद्दार बनाकर खड़ा कर दिया क्योंकि जेएनयू के छात्रों को गद्दार साबित करने के सारे कारनामों का खुलासा हो गया है।


सामने फिर वही मुसलमान,और भारत देश के जनगण की देशभक्ति की सबसे पकी हुई जमीन है नफरत मुसलमानों के लिए।इसलिए  वे रोज नया नाया खेल करते रहेंगे और बुड़बक की तरह हम लोग आयं बांय बहस में उलझकर बुनियादी मुद्दों से भटकते रहेंगे और देश दल्ला हवाले।

वैशाली की नगरवधू और सोप ओपेरा में तब्दील लोकतंत्र का बेनकाब चेहरा


आज फिर लोकतंत्र में अभिनय दक्षता निर्णायक होती जा रही है।आवेश,आवेग और मुद्राओं का लोकतंत्र है यह,जहां चिंतन मनन सत्य असत्य मतामत सहमति विरोध जैसे तमाम लोकतांत्रिक शब्द बेमायने हैं।


संवाद और स्मृति और अभिनय के साथ मुद्राओं की पेशावर दक्षता से जनता का दिलोदिमाग दखल कर लो और यही निर्णायक है।


अब संसदीय बहस के लिए बेहद जरुरी है कि सभी पक्ष जनता की नुमाइंदगी के लिए पेशेवर अभिनेता और अभिनेत्रियों को चुन लें क्योंकि इस लोकतंत्र में फिर वही वैशाली की नगरवधू की पूनम की रात है।

Every other Indian is deshdrohi because every other Indian stands with JNU!That is why,no wonder,JNU row: Rahul, Kejriwal, Yechury, D Raja among 9 booked for sedition!

Sedition is the latest theme song for Manusmriti regime.Just speak out against the hegemony,just dare to lodge your dissent,just speak conscience,they would not spare you!

Absolute power unprecedented!

#Shutter Down JNU

#Shutter Down Jadavpur

#Shutter Down All Universities!

#Shutter down all Institutes!

#Invoke the KaalRatri

#Never cry freedom

#Never Cry Equality

#Never cry Justice

#Absolute Regime selects its People

#Guillotine waits for others

#Defend your daughters to be raped if you can

#Daughters hide your faces if you can

#Shutter down all doors and windows lest light might eneter the Hell losing that Hindutva turns out

#Watch Bardwan scenario where goons all those doors whereingirl students live and threatened that they should stop studies lest the might be raped!

#JNU breaks Manusmriti because it cries equality so Shut Down JNU

# JNU breaks Manusmriti because it cries justice so Shut Down JNU

#JNU breaks Manusmriti because it empowers girls sashing the Sati Rule of Hindutva so Shut Down JNU

Thus,JNU row: Rahul, Kejriwal, Yechury, D Raja among 9 booked for sedition!

क्या हम मनुष्य भी हैं?

क्या मनुस्मृति की निंदा काफी है,उनका क्या करें जो सेकुलर हैं और बेटियों को बख्श नहीं रहे हैं?

बंगाल में अब छात्राएं स्कूल कालेज छोड़कर घर जाकर मुंह छुपा रही हैं क्योंकि राजनीतिक गुंडे न सिर्फ उनसे मारपीट कर रहे हैं बल्कि उन्हें बलात्कार करने की धमकी दे रहे हैं,सरेआम।

हिंदू क्या हिंदू  राष्ट्र क्या,बुनियादी सवाल यह है कि हम हिंदू हों न हों,क्या हम मनुष्य भी हैं और जिस राष्ट्र के नाम यह कुरुक्षेत्र है,वह राष्ट्र क्या है,कहां है!


सच है कि यादवपुर विश्वविद्यालय के साथ साथ जेएनयू के पक्ष में कुछ विषैले जीवजंतुओं के अलावा पूरा बंगाल एकजुट है,तो सात मार्च को संभावित चुनाव अधिसूचना से पहले केसरिया मुहिम के तहत यादवपुर विश्वविद्यालय में दीदी ने पुलिस नहीं भेजा,लेकिन वर्दमान विश्वविद्यालय में पहले कैंपस में पुलिस बुलाकर छात्र छात्राओं को धुन डाला गया।फिर इसके खिलाफ जब वे अनशन पर बैठे तो तृणमूल कर्मियों ने रात में बत्ती बुझाकर उनकी खबर ली फिर मोटर बाइक पर सवार होकर घूम घूमकर  छात्रावासों और निजी आवासों में जाक छात्राओं को घुसकर बलात्कार कर देने की धमकी दे दी।


हालात ये हैं कि पूरे वर्दमान जिले में बलात्कार का शिकार होने के खतरे के मद्देनजर छात्राएं स्कूल कालेज छोड़कर घर में मुहं छुपाकर बैठने को मजबूर हैं।


कन्याश्री के राज में यह आलम है तो क्या सिर्फ मनुस्मति की निंदा करना काफी होगा?


पुरुष वर्चस्व  के आक्रामक लिंग से कैसे बचेंगी हमारी माताें,बहने और बेटियां जबकि सत्ता वर्ग के घरों में वे शायद हैं ही नहीं?

यह देश है वीर जवानों का। 2007 में असम में घटी थी यह घटना। दूरदर्शन पर इसे लेकर हंगामा हुआ था। इस औरत का नाम है लक्ष्मी ओरंग।



जेएनयू देखने में महिला विश्वविद्यालय लगता है,जहां करीब सत्तर फीसद छात्राएं तीश फीसद छात्रों के साथ पढ़ती हैं।


बनारस विश्वविद्यालय के साथ ही इसकी तुलना की जा सकती है।जेएनयू में दलित,ओबीसी और आदिवासी छात्र छात्राएं देश में जय भीम कामरेड का नारा बुलंद कर रही हैं।


इसी विश्वविद्यालय में अपने पूर्वोत्तर,हिमालय,कश्मीर,ओड़ीशा और असम जैसे पिछड़े इलाकों,द्रविड़ और अनार्य जनसमुदायों वाले दक्षिणात्य,लातिन अमेरिका और अफ्रीका के साथ साथ एशियाई मुल्कों के बच्चे पढ़ते हैं,लेकिन वहां कंडोम गिनने लगा है आरएसएस।


जो जन प्रतिनिधि ऐसा महान कर्म कर रहे हैं,उनने कभी अपने इलाके की कोई समस्या उठाया हो.मीडिया ने उसे इसीतरह फ्लैश क्यं नहीं किया ताज्जुब है।


दुनियाभर के लोग जानते हैं कि भारतीय राजनीति में सबसे विद्वान तीन लोग हैंःनेताजी,सुभाष और जवाहर।


हमारे शहीदे आजम भगत सिंह जैसे आजादी के लिए मर मिटे नौजवानों में भी विद्वता थी तो मां मनुस्मृति के हाथों बलि हुए दलित शोध छात्र की विद्वता की भी चर्चा दुनियाभर में है।


जेएनयू.यादवपुर विश्वविद्यालय समेत तमाम विश्विद्यालय, आईआईटी और आईआईएम समेत तमाम सरकारी उच्च शिक्षा संस्थान बंद करने के पीपीपी विकास माडल के तहत पतंजलि मार्का हावर्ड विश्वविद्यालय खोलने की मुहिम में बाकी देश को राष्ट्रद्रोही साबित करने पर आमादा मनुसमृति के सारस्वत वरद पुत्रों को अब नेहरु अपढ़ नजर आ रहे हैं.तो यह उनकी वैदिकी संस्कृति का ही प्रतिमान है,जिसके तहत कला साहित्य और ंस्कृति की तमाम विधाओं और माध्यमों में बहुजन अछूत और बहिस्कृत हैं।


बड़े अफसोस के साथ लिखना पड़ रहा है कि संसद में जिन सांसद सुगत बोस,नेताजी वंशज ने तृणमूल कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की डंका पीट दी,उनके राजकाज में हाल और बुरा है।


सच है कि यादवपुर विश्वविद्यालय के साथ साथ जेएनयू के पक्ष में कुछ विषैले जीवजंतुओं के अलावा पूरा बंगाल एकजुट है,तो सात मार्च को संभावित चुनाव अधिसूचना से पहले केसरिया मुहिम के तहत यादवपुर विश्वविद्यालय में दीदी ने पुलिस नहीं भेजा,लेकिन वर्दमान विश्वविद्यालय में पहले कैंपस में पुलिस बुलाकर छात्र छात्राओं को धुन डाला गया।


फिर इसके खिलफ जब वे अनशन पर बैठे तो तृणमूल कर्मियों ने रात में बत्ती बुझाकर उनकी खबर ली फिर मोटर बाइक पर सावर होकर छात्रावासों और निजी आवासों में जाक छात्राओं को घुसकर बलात्कार कर देने की धमकी दे दी।


हालात ये हैं कि पूरे वर्दमान जिले में बलात्कार का शिकार होने के खतरे के मद्देनजर छात्राएं स्कूल कालेज छोड़कर घर में मुहं छुपाकर बैठने को मजबूर हैं।


कन्याश्री के राज में यह आलम है तो क्या सिर्फ मनुस्मति की निंदा करना काफी होगा?


पुरुष वर्चस्व  के आक्रामक लिंग से कैसे बचेंगी हमारी माताें,बहने और बेटियां जबकि सत्ता वर्ग के घरोंमें वे सायद हैं ही नहीं?

हमारे गुरुजी ने आज लिखा हैः

मैं शत प्रतिशत भारतीय हूँ, राजनेताओं से भी अधिक भारतीय. भारतीयता मेरी अस्मिता है, व्यवसाय नहीं. जीवन के पिछ्ले ७५ सालों में मुझे हिन्दू होने या माने जाने से भी कोई गुरेज नहीं था. पर जब से इस देश में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ है हिन्दुत्व योगी आदित्यनाथ, सा्क्षी महाराज, तोगड़िया, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सनातन संस्था, और तमाम नामों से उभरती संस्थाओं के द्वारा व्याख्यायित होने लगा है, मुझे हिन्दू और हिन्दुस्तान शब्द में खालिस्तान, तालिबान जैसी अनुगूंज सुनाई देने लगती है. और मैं भारत और उसकी समन्वयमयी संस्कृति के भविष्य के बारे में चिन्तित हो उठता हूँ.

अभी मेरे गुरुजी को वे तमाम चीखें सुनायी नहीं पड़ी हैं,जिससे हिंदू क्या हिंदू  राष्ट्र क्या,बुनियादी सवाल यह है कि हम हिंदू हों न हों,क्या हम मनुष्य भी हैं और जिस राष्ट्र के नाम यह कुरुक्षेत्र है,वह राष्ट्र क्या है,कहां है!


हमारे गुरुजी ने आगे लिखा हैः

वैचारिक मतभेद, उन पर बहस, की संस्कृति के विकास में मुख्य भूमिका होती है. बहस करने और तर्क करने से ही किसी ्घटना या धारणा के मूल तक पहुँचने और नये तथ्यों के अन्वेषण में सहायता मिलती है. इसीलिए हमारे प्राचीन मनीषियों ने ' वादे-वादे जायते तत्वबोध: की सलाह दी थी. दुर्भाग्य से सामन्ती सोच वाला समाज और हर सत्ता इसे अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानती है और उसे हर तरह से दबाने की चेष्टा करती है. पर विचार तो चेतना है, वह कभी नष्ट नहीं होती, उसे दबाने वाले ही नष्ट हो जाते हैं. ऐसा समाज पिछड़ जाता है.


नये प्रवाह को रोकिये मत, केवल उसे सही दिशा में मो्ड़िये और खुद भी उसके साथ चलने का प्रयास कीजिये. क्यों कि समय पुरातनता की कैंचुल को अधिक दिन तक सहन नहीं करता. नित्य नूतनता ही जीवन है, जो पुराना हुआ उसे प्रकृति खुद ही मिटा देती है.


गुरुजी के कहे मुताबिक पुनरुत्थान समय के हिंदू राष्ट्र में  यह विवेक कहां है,जहां सहमति का विवेक हो और असहमति का साहस भी हो?



हमारे लोग जानते हैं कि हमने अपने पिता की कभी नहीं सुनी।उनसे मेरे मतभेद विचारधारा के मुद्दे पर भयंकर और सार्वजनिक थे।हालांकि मेहनतकशो की हर लड़ाई में हम उनके साथ थे और आज भी उनकी लड़ाई में मर मिटने का इरादा है।इसके अलावा हमारी कोई दूसरी तमन्ना नहीं हैं।


क्योंकि कैंसर को हराकर जीने वाले,लड़ने वाले और कैंसर के आगे आत्मसमपर्ण किये बिना सारा दर्द हंसते हुए आखिरी सांस तक दुनिया को बेहतर बनाने का ख्वाब देखने वाले पिता का पुत्र हूं।



पिता मेरे अपढ़ थे।अंबेडकरी थे और कम्युनिस्ट भी थे।मतभेद उनसे इसी अंबेडकरी मिशन को लेकर था।पिता अपढ़ थे और कोई भाषा उनके लिए दीवार न थी।


राष्ट्रपति ,प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री वगैरह वगैरह से बेखौफ अपने लोगों के लिए लड़ने वाले उस पिता ने शरणार्थी होकर भी इस देश के मुसलमानों को कभी भारत विभाजन का जिम्मेदार नहीं माना।


उनने असम से लेकर देश के कोने कोने में दंगापीड़ित मुसलमान इलाकों में जाते रहने की अपनी कवायद को राजनीति या धर्मनिरपेक्षता के साथ कभी न जोड़ा।


वे  तमाम अस्मिताओं से ऊपर थे और जयभीम कामरेड का नारे न लगाकर भी वे तजिंदगी लाल थे और नील भी।


फिर भी मैंने उनका कहा कभी नहीं सुना।उलट इसके उन्होंने मेरे मतामत को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी।


मेरी विश्वविद्यालयी शिक्षा दीक्षा मुझे अपने पिता से एक कदम भी आगे ले जा सके,तो यह उपलब्धि किसी पुरस्कार या सम्मान से बड़ी होगी।


तारा चंद्र त्रिपाठी जी ने मुझे कभी किसी कक्षा में पढ़ाया नहीं। जीआईसी नैनीताल में वे विज्ञान पढाने वाले शिक्षकों को हिंदी पढ़ाते थे और मैं हाीस्कूल पास करते ही साहित्यकार बनने की धुन में विज्ञान को अलविदा कह चुका था।


संजोग से हाफ ईअरली परीक्षा की मेरी हिंदी की कापी वे जांच रहे थे और वही देखकर उनने मुझे दबोच लिया और आज भी उन्हीं के कब्जे में हूं।


मेरे जीवन में वे ही एक मात्र व्यक्ति हैं,जिनका कहा मैंने हमेशा अक्षरशः पालन किया है जिनने पहली ही मुलाकात के बाद मुझे अपने घर परिवार में शामिल कर लिया।मैं जो कुछ भी हूं,अच्छा बुरा उन्हींकी बदौलत हूं।वे नहीं मिलते तो मैं कुछ भी हो सकता था,लेकिन आज जो मैं हूं,वह हर्गिज नहीं होता।


इस नाते से मैं ब्राह्मण भी हूं क्योंकि अगर धर्म है तो उस हिसाब से ताराचंद्र त्रिपाठी मेरे धर्मपिता हैं।


उन्ही ताराचंद्र त्रिपाठी का ताजा स्टेटस शेयर कर रहा हूं।हस्तक्षेप पर उनके इतिहास के पाठ जारी हैं।जो भी सही इतिहास पढ़ना चाहते हैं,हस्तक्षेप पर हमारे गुरुजी की कक्षा में उनका स्वागत है।

गुरुजी ने लिखा हैः


मैं शत प्रतिशत भारतीय हूँ, राजनेताओं से भी अधिक भारतीय. भारतीयता मेरी अस्मिता है, व्यवसाय नहीं. जीवन के पिछ्ले ७५ सालों में मुझे हिन्दू होने या माने जाने से भी कोई गुरेज नहीं था. पर जब से इस देश में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ है हिन्दुत्व योगी आदित्यनाथ, सा्क्षी महाराज, तोगड़िया, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सनातन संस्था, और तमाम नामों से उभरती संस्थाओं के द्वारा व्याख्यायित होने लगा है, मुझे हिन्दू और हिन्दुस्तान शब्द में खालिस्तान, तालिबान जैसी अनुगूंज सुनाई देने लगती है. और मैं भारत और उसकी समन्वयमयी संस्कृति के भविष्य के बारे में चिन्तित हो उठता हूँ.

अक्सर यह होता है कि राजनीतिक रूप से जीत हासिल करने वाला सांस्कृतिक रूप से हार जाता है. यूनानी जीते, यूनानी सेनापति हेलियोदोर जैसे अनेक यूनानी वैष्णव या बौद्ध हो गये. शक, कुषाण, हूण, और भी न मालूम कितने आक्रान्ता और इस देश में अपना राज्य स्थापित करने वाले हमारे धर्म और समाज में विलीन हो गये. पूरा मध्यकाल राजनीतिक रूप से मुस्लिम सत्ता का युग है. पर साहित्य और कला की दृष्टि से वह मुस्लिम परम्पराओं पर भारतीय परंपराओं की अनवरत विजय का युग भी है. अंग्रेज जीते पर हमारी सांस्कृतिक परम्पराएँ उन्हें अनवरत अभिभूत कर रही हैं. हमारे जन नायकों ने अंग्रेजों को भारत छोड़ कर जाने के लिए विवश कर दिया. यह हमारी विजय थी. पर जीत कर भी हम अंग्रेजियत के सामने हार गये. वे हमें गुलाम समझते हुए भी हमारी प्राचीन संस्कृति का ओर- छोर प्रकाशित कर गये. पिशेल जैसे प्राकृत भाषाओं के महान जर्मन वैयाकरणिक ने सदा यह कामना की यदि मेरा जन्म भारत में न ह॒आ हो, मेरी मृत्यु भारत में हो. भगवान ने उनकी सुनी और वे भारत में आने के कुछ ही दिन बाद मद्रास में उनके पंचतत्व यहाँ की माटी में विलीन हुए. लेकिन हमारे अन्दर आजादी के बाद कितनी गुलामी भर गयी है, यह हमारे नव धनिकों और उनकी देखादेखी सामान्य जन को भी संक्रमित कर चुकी है.



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Tuesday, March 1, 2016

Open letter to Manusmriti from a conscious citizen of India. মাননীয়া স্মৃতি ইরানী মহাশয়াকে একটি খোলা চিঠিঃ

Open letter to Manusmriti from a conscious citizen of India.

মাননীয়া

স্মৃতি ইরানী মহাশয়াকে একটি খোলা চিঠিঃ

Smt. Smriti Zubin Irani

Minister of Human Resource Development

302-C, Shastri Bhawan, New Delhi.

 

মহাশয়া,

হায়দারাবাদ বিশ্ব বিদ্যালয়ের গবেষক ছাত্র রোহিত ভেমুলার বিরুদ্ধে ব্যবস্থা নেওয়ার জন্য কেন আপনি ওই বিশ্ববিদ্যালয়ের ভিসিকে একাধিক চিঠি লিখে ছিলেন তার জবাব জানার জন্য এই চিঠি নয়। আপনাদের অসহিষ্ণুতা, ষড়যন্ত্র ও অবজ্ঞার জন্য কার্ল সাগানের মত একজন ভাবী লেখক তার মায়ের হাঁসি মুখ দেখতে পেল না তার জন্যও আমরা কৈফিয়ত চাইছি না। আমরা এটাও জানতে চাইছি না যে লোকসভায় দাঁড়িয়ে যে কাগজটি দেখিয়ে আপনি দাবী করেছিলেন যে, রোহিতের মৃত্যুর পর পরের দিন (১৮ই জানুয়ারী ২০১৬) সকাল ৬:৩০টা পর্যন্ত তার লাশের কাছে পুলিশ ও ডাক্তারকে ঘেঁসতে দেওয়া হয়নি সেই কাগজটি তেলেঙ্গানা পুলিশের রিপোর্ট নয় আপনি ভারতের সংসদের উচ্চকক্ষ রাজ্যসভাকে অভিনয়ের মঞ্চ হিসেবে নিয়েছিলেন কি না সেটিও আমরা জানতে চাইছি না। কৈফিয়ত চাইছি না কেন আপনি রোহিত ভেমুলার মৃত্যু নিয়ে ৫ বার ভুল তথ্য দিয়ে মানুষকে বোকা বানাতে চাইলেন!        

 

উচ্চশিক্ষা মন্ত্রী হিসেবে আপনার কৃতিত্বকে খাটো করে দেখার  কোন ইচ্ছে আমাদের নেই বরং উচ্চ শিক্ষার ডিগ্রি না থাকা সত্ত্বেও আপনি উচ্চশিক্ষা মন্ত্রী, এমন কৃতিত্ব কম মানুষের হয় বলে আমরা বিশ্বাস করি। আপনার কৃতিত্ব অপ্রতিরোধ্যপদাধিকার,  দায়, দায়িত্ব ও গুরুত্বে আপনি মন্ত্রীসভার পাঁচ জনের এক জন। বহুজন সেবিত ভারতবর্ষের শিল্প,  সাহিত্য, সংস্কৃতি, ইতিহাস ও দর্শনের রক্ষণাবেক্ষণের দায় দায়িত্ব আপনারই বর্তায়  কেননা আপনি মানব সম্পদ কল্যাণ মন্ত্রীও বটে। যোগ্য ব্যক্তি হিসেবেই আপনি সুপ্রাচীন ভারতবর্ষের জনপুঞ্জের ঐতিহ্যকে জানবেন, অনুধাবন করবেন এবং  গুরুত্ব দেবেন বলেই আমরা মনে করে থাকি।  

রোহিত ভেমুলার মৃত্যু প্রসঙ্গে আপনি বহিন মায়াবতীকে কথা দিয়েছিলেন যে, আপনার বক্তব্যে সন্তুষ্ট না হলে আপনি নিজের মাথা কেটে বহিন মায়াবতীর পায়ের নিচে রাখবেন। এ হেন প্রত্যয় দেখে আমরা আপনার সদিচ্ছার উপর আস্থা রাখতে চেয়েছিলাম। বিশ্বাস করতে চাইছিলাম যে, রোহিতের "প্রাতিষ্ঠানিক হত্যা"র সুবিচার হবে। বুঝতে পারিনি যে আপনার এই প্রতিশ্রুতি ছিল পরিকল্পিত একটি নাটকের খসড়া। বুঝতে পারিনি যে আপনি পরের দিনই সেই নাটকের কালোবিড়ালটি বের করে আনবেন এবং এই বেড়ালের সাথে সাথেই বেরিয়ে পড়বে আরএসএস, বিশ্ব হিন্দু পরিষদ, বজরং দলের মৌলবাদী শক্তির গোপন দস্তাবেজ। বুঝতে পারিনি যে আপনি রোহিত ভেমুলা বা দিল্লীর জহরলাল নেহেরু ইউনিভার্সিটির প্রসঙ্গের জবাব দিতে গিয়ে " মহিষাসুর" প্রসঙ্গ টেনে আনবেন এবং  জহরলাল নেহেরু ইউনিভার্সিটির সাথে মহান ন্যায় পালক "মহিষাসুর"কেও রাষ্ট্র বিরোধী প্রমান করার জন্য যুদ্ধ ঘোষণা করে বসবেন

আপনি বলেছিলেন,                      

"What is Mahishasur Martyrdom Day, madam speaker? Our government has been accused…....

 Posted on October 4, 2014. A statement by the SC, ST and minority students of JNU. And what do they condemn? May my God forgive me for reading this.

"Durga Puja is the most controversial racial festival, where a fair-skinned beautiful goddess Durga is depicted brutally killing a dark-skinned native called Mahishasur. Mahishasur, a brave self-respecting leader, tricked into marriage by Aryans. They hired a sex worker called Durga, who enticed Mahishasur into marriage and killed him after nine nights of honeymooning during sleep."

Freedom of speech, ladies and gentleman. Who wants to have this discussion on the streets of Kolkata? I want to know. Will Rahul Gandhi stand for this freedom? I want to know. For these are the students. What is this depraved mentality? I have no answers for it.

জহরলাল নেহেরু ইউনিভার্সিটিতে অনুষ্ঠিত "মহিষাসুর সাহাদাত দিবস" পালনের এপ্যামপ্লেটটি হাতে নিয়ে আপনি ছাত্র ছাত্রীদের হুঁশিয়ারি দিয়েছিলেন,  "don't make education a battlefield" as the consequences could be grave. অর্থাৎ আপনারা যুদ্ধ লাগাবেন, প্রতিবাদী বা বিরোধী মত প্রকাশকদের জন্য শ্মশানের ব্যবস্থা করবেন, পরিশেষে  যুদ্ধের দায়ভার চাপিয়ে দেবেন তাদের ঘাড়ে যারা ভারতবর্ষ থেকে অজ্ঞানতা দূর করার জন্য, ন্যায়ের শাসন কায়েম করার জন্য শিরদাড়া খাড়া করে লড়াই করে চলেছে! আপনার অভিসন্ধির সত্যি তুলনা হয় না!

তবে আপনাকে আমরা ধন্যবাদ দিয়ে রাখি এই কারণে যে আপনি জ্ঞাতে হোক বা অজ্ঞাতে হোক সংসদে "মহিষাসুর" প্রসঙ্গ টেনে এনে ভারতবর্ষের মানুষদের দুটি সংঘাতরত শ্রেণীতে দাঁড় করিয়ে দিয়েছেন। একটি আক্রমণকারী, ষড়যন্ত্রকারী, ধ্বংসকারী, হত্যাকারী "দুর্গাবাহিনী" এবং অন্যটি  নিজের দেশের স্বতন্ত্রতা, শিল্প, সংস্কৃতি ও মর্যাদা রক্ষা করার "মহিষাসুর ব্রিগেড"।

জহরলাল নেহেরু ইউনিভার্সিটির "মহিষাসুর সাহাদাত দিবস" এর প্যামপ্লেটে দুর্গাকে কেন যৌনকর্মী  বা বেশ্যা বলে অভিহিত করা হয়েছে এবং মহিসাসুরকে কেন ন্যায় পালক হিসেবে বর্ণনা করা হয়েছে তা নিয়ে আপনি ক্ষোভ প্রকাশ করেছেন এবং এই ধরণের আলোচনাকে রাস্ট্র বিরোধী  আখ্যা দিয়ে হুঁশিয়ারি দিয়েছেন। অর্থাৎ আপনি মনুস্মৃতি প্রদর্শিত মাত্র ১৫% মানুষের(৩.৫% ব্রাহ্মণ, ৫.৫% ক্ষত্রিয় এবং ৬% বৈশ্য) জন্য ব্রাহ্মন্যবাদী বিধানকে রাষ্ট্রীয় বিধান হিসেবে চাপিয়ে দিতে চাইছেন এবং ৮৫% জনপুঞ্জের ভাষা, সংস্কৃতি, দর্শন ও ধর্মীয় বিশ্বাসকে রাষ্ট্রদ্রোহী চিহ্নিত করে এই মানুষগুলিকেই দেশদ্রোহী বলতে চাইছেন! চমৎকার!!

মানব সম্পদ উন্নয়ন মন্ত্রী হিসেবে আপনার কাছে থেকে আমারা আর একটু মেধা, বিবেচনা এবং সংযত আচরণ আশা করেছিলাম। আমরা আশা করেছিলাম যে, পরম কল্যাণকারী, প্রজাপালক রাজা "মহিষাসুর" সম্পর্কে সমগ্র ভারতবর্ষ জুড়ে যে লোকায়ত ইতিহাস রয়েছে তা আপনি জানবেন। রাজা মহিষাসুরের নামে "মহীশুর" রাজ্যের ইতিহাস আপনি শুনে থাকবেন। আপনি শুনে থাকবেন যে এই মহীশুর রাজ্যের মানুষেরা রাজা মহিষাসুরকে ভগবান হিসেবে পূজা করে। আপনার জানা উচিৎ ছিল যে, ভারতের সেন্সাস রিপোর্টে যে সম্প্রদায়গুলির তালিকা আছে সেখানে "অসুর" নামে একটি আদিম জাতি আছে যারা নিজেদের মহিষাসুরের বংশজ বলে দাবী করে। এই অসুর জাতি দেবীর (দুর্গার আসল নাম) মুখ দর্শন করেনা। দুর্গাকে বেশ্যা বলে এবং তাদের রাজার হত্যাকারী মনে করে। এই মানুষেরা ৫ দিন ধরে "দাশাই" পরবের মধ্য দিয়ে তাদের মহান রাজাকে স্মরণ করে। আপনার জানা উচিৎ ছিল যে, এই মহান রাজা মহিষাসুরের প্রচলিত নাম ছিল "হুদূড় দুর্গা"। আর্যরা ষড়যন্ত্র করে দেবী নামক এক বেশ্যার সাথে তাকে বিবাহ দেয়। এই দেবী মহিষাসুরকে সম্ভোগে আচ্ছাদিত করে তাকে খুন করে এবং তার শরীরকেও গোপনে পাচার করে দেয়। আজও দাশাই পরবের পাঁচদিন ধরে আদিবাসীরা ভুয়াং নাচের মাধ্যমে তাদের হারানো রাজাকে খুঁজে বেড়ায়। পুরানে  হুদুড় দুর্গা নামে অসুরকে বধ করার জন্য দেবীর নাম রাখা হ্য় দুর্গা তা আপনার জানা উচিৎ ছিল। আপনার জানা উচিৎ ছিল যে,  আর্যরা ভারতবর্ষ আক্রমণ করে যে সমস্ত মূলভারতীয় রাজাদের পরাজিত করেছিল তারা সকলেই ছিলেন অসুর। আপনার জানা উচিৎ ছিল যে ভারতবর্ষের জনপুঞ্জের ভাষা ছিল অসুর ভাষা। আপনার জানা উচিৎ যে ভারতের সমস্ত লোকসংস্কৃতির উৎসই হল অসুর সংস্কৃতি।

আসলে আপনাদের দুরভিসন্ধি আরো বেশি দ্বান্দ্বিক। আপনারা বুঝতে পেরেছেন যে, ভারতের মূলনিবাসীদের জ্ঞান চক্ষু খুলতে শুরু করেছে। তারা কেউ আর একলব্য হতে চাইছেনা। বরং শম্বূকের মতই রামরাজ্যের উত্থানের বিরুদ্ধে সোচ্চার হয়ে জীবন দিতেও পিছপা হচ্ছেনা। এক রোহিতের বলিদানে জেগে উঠেছে সহস্র কানাইয়া এবং উমর খলিদেরা। ক্ষুদ্রতার গণ্ডি ভাঙ্গতে ধেয়ে  আসছে প্রবল জলোচ্ছ্বাস। ক্যাম্পাসে ক্যাম্পাসে আলোড়ন তুলছে ছাত্রছাত্রীরা।

নিশ্চিত ভাবে এটি রামরাজ্য এবং মনুর শাসনের পরিপন্থী। তাই আপনারা শঙ্কিত হয়ে পড়েছেন। ধর্মদ্রোহ এবং দেশদ্রোহের নামে জড়িয়ে দিতে চাইছেন মনুবাদের থেকে মুক্তিকামী প্রজন্মকে। প্রশাসনকে ব্যবহার করে শুরু করেছেন মিথ্যাচার এবং বলপ্রয়োগ। নিজেদের পরিকল্পনা বাস্তবায়িত করার জন্যই সংসদের সর্বোচ্চ কক্ষকে কলুষিত করতে পিছপা হচ্ছেন না। মানব সম্পদ রক্ষা করার পরিবর্তে মানুষকে শ্মশানের চিতায় তোলার ধমকি দিচ্ছেন!

আমরা আপনার এই অভব্য আচরণে বিভ্রান্ত হলেও হতাশ নই। কেননা আপনি সংসদের একেবারে উচ্চ কক্ষে দাঁড়িয়ে চিনিয়ে দিয়েছেন আপনি কে। আপনার সংগঠন এবং তাদের গোপন দস্তাবেজ কি? আপনি জানিয়ে দিয়েছেন যে আপনার রাজনৈতিক দল বিজেপি এখনও মূলভারতীয় সংস্কৃতিকে নিকৃষ্ট অসুর সংস্কৃতি মনে করে। ৮৫% মূলনিবাসী দলিত বহুজনকে দুষ্কৃতি মনে করে। দুষ্কৃতির বিনাশই আপনাদের কাজ। এই চরম সত্য প্রকাশ করার জন্য আপনাকে ধন্যবাদ জানাই।

নমস্কারান্তে    

শরদিন্দু উদ্দীপন   

সচেতন বাংলা,

সোনারপুর, কোলকাতা। 


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कविता - हमारे शासक / ~मंगलेश डबराल

कविता - हमारे शासक / ~मंगलेश डबराल
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हमारे शासक ग़रीबी के बारे में चुप रहते हैं
शोषण के बारे में कुछ नहीं बोलते
अन्याय को देखते ही वे मुंह फेर लेते हैं
हमारे शासक ख़ुश होते हैं जब कोई उनकी पीठ पर हाथ रखता है
वे नाराज़ हो जाते हैं जब कोई उनके पैरों में गिर पड़ता है
दुर्बल प्रजा उन्हें अच्छी नही लगती
हमारे शासक ग़रीबों के बारे में कहते हैं कि वे हमारी समस्या हैं
समस्या दूर करने के लिए हमारे शासक
अमीरों को गले लगाते रहते हैं
जो लखपति रातोंरात करोड़पति जो करोड़पति रातोंरात
अरबपति बन जाते हैं उनका वे और भी सम्मान करते हैं
हमारे शासक हर व़क़्त देश की आय बढ़ाना चाहते हैं
और इसके लिए वे देश की भी परवाह नहीं करते हैं
जो देश से बाहर जाकर विदेश में संपति बनाते हैं
उन्हें हमारे शासक और भी चाहते हैं
हमारे शासक सोचते हैं अगर पूरा देश ही इस योग्य हो जाये
कि संपति बनाने के लिए बाहर चला जाये
तो देश की आय काफ़ी बढ़ जाये
हमारे शासक अक्सर ताक़तवरों की अगवानी करने जाते हैं
वे अक्सर आधुनिक भगवानों के चरणों में झुके हुए रहते हैं
हमारे शासक आदिवासियों की ज़मीनों पर निगाह गड़ाये रहते हैं
उनकी मुर्गियों पर उनकी कलाकृतियों पर उनकी औरतों पर
उनकी मिट्टी के नीचे दबी हुई बहुत सी चमकती हुई चीज़ों पर
हमारे शासक अक्सर हवाई जहाज़ों पर चढ़ते और उनसे उतरते हैं
हमारे शासक पगड़ी पहने रहते हैं
अक्सर कोट कभी-कभी टाई कभी लुंगी
अक्सर कुर्ता-पाजामा कभी बरमूडा टी-शर्ट अलग-अलग मौक़ों पर
हमारे शासक अक्सर कहते हैं हमें अपने देश पर गर्व है।
(साभार -નિમિશ પંડ્યા)
Gopal Rathi's photo.

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तुमने कहा - अरहर की दाल दो । उसने नारा दिया -एक के बदले दस सर काट कर लाएंगे । अरहर भूल गए , लगे ताली बजाने । जमूरे ने कहा सौ दिन में अगर काला धन वापस नहीं लाया तो फांसी दे देना, बस एक वोट देदो , । तुमने उसे काठ की कुर्सी दे दी । तुमने याद दिलाया - काला धन ? उसने जवाब दिया - जे यह यु देशद्रोहियो का अड्डा है । तुम किस काम में लग गए , सब देख ही रहे हो । कोइ कंडोम गिन रहा है , कोई वेश्याओं की फेहरिस्त बनाने में व्यस्त है ।


कल की पोस्ट में हमने भारत पाक रिश्ते का सवाल उठाया और भुट्टो का जिक्र किया । एक संघी तिलमिला कर बोला कि वही भुट्टो जो ललकारता था की हजार बार लड़ेंगे भारत से ? यह पोस्ट उसी का जवाब है । 
पाकिस्तान के सदरे हुकूमत रहे जुल्फिकार अली भुट्टो का वह बयान जिसे आपने तावेर्ज की तरह बाँध रखा है , वह बयान भारत के लिए नहीं था , वह उनकी अपनी जनता के लिए था , । ऐसे बयानात ऐसे ही होते हैं और अपनी नालायकी छिपाने के लिए दिए जाते है , ऐसे बयान 'देश प्रेम ' के नाम पर उठाये जाते हैं , मूढ़ जनता कुछ छण के लिए उत्तेजित भी होती है और ताली पीट कर अपने रहनुमा के नारे लगाती है । रहनुमा इस मूर्खता पर मुस्कुराकर अभिवादन लेता है । अपना उदाहरण देख लो - तुमने कहा - अरहर की दाल दो । उसने नारा दिया -एक के बदले दस सर काट कर लाएंगे । अरहर भूल गए , लगे ताली बजाने । जमूरे ने कहा सौ दिन में अगर काला धन वापस नहीं लाया तो फांसी दे देना, बस एक वोट देदो , । तुमने उसे काठ की कुर्सी दे दी । तुमने याद दिलाया - काला धन ? उसने जवाब दिया - जे यह यु देशद्रोहियो का अड्डा है । तुम किस काम में लग गए , सब देख ही रहे हो । कोइ कंडोम गिन रहा है , कोई वेश्याओं की फेहरिस्त बनाने में व्यस्त है । 
कम अक्ल लोगो , पाकिस्तान तुम्हारा दुश्मन नहीं है । यह बात सत्ता जानती है । दोनों तरफ की । वह पडोसी मुल्क है । भारत के मुकाबले हर मायने में वह बहुत पीछे है । इसे वह जान भी चुका है । दोनों मुल्कों को बाहरी दुश्मन खोजने की जरूरत नहीं है , अंदरूनी ताकते ही देश को तोड़ने में लगी हैं । दोनों मुल्कों क हालात एक जैसे हो गए हैं । कल तक ऐसा नहीं था । पाकिस्तान ने अपने को जब इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया , और मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देने लगी तो मुल्क के भीतर एक दूसरी सत्ता भी बन गयी , कट्टर पंथ के नाम पर और मुल्क के क़ानून के ऊपर उनका क़ानून चलने लगा । कल तक भारत उस की मुखालफत करता रहा , लेकिन आज का भारत उसी डगर पर ,और उससे भी तेज गति से उसी राह पर है । हिन्दू का हवाले से , सत्ता द्वारा पोषित गिरोह आज क़ानून को दबा कर अपना क़ानून लाद रहा है ।और सबसे ज्यादा जुल्म नौजवानो पर हो रहा है । 
चलो अगली पोस्ट में एक नया पन्ना खोलते हैं , जब भारत के नौजवानो ने भुट्टो का साथ दिया था । हैरान मत हो , इसमें काशी विध्वविद्यालय , जे यन यु , इलाहाबाद , समेत तमाम विश्वविद्यालय के छात्र एक साथ थे । सुनोगे गिरोहियो?

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अच्छे दिनों का बजट **************************** ईपीएफ से 60% की निकासी पर टैक्स लगेगा.


अच्छे दिनों का बजट
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ईपीएफ से 60% की निकासी पर टैक्स लगेगा.
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यानी जब आपको पैसे की सबसे ज्यादा ज़रूरत होगी, तभी आपकी चमड़ी खींच ली जाएगी.
जहां तक मेरी जानकारी है यह पहली बार हुआ है कि एम्पलॉई जो पैसा हर महीने अपने वेतन से बचत करता है, उसी की निकासी पर टैक्स लग गया है.
यह पैसा बचाने का उद्देश्य होता है कि बच्चों की पढ़ाई और शादी आदि की व्यवस्था में उसे किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े. और रिटायर होने से पहले कम से कम सर पर एक छत हो जाए.

जब भी पीएफ से बड़ी निकासी एम्पलॉई करता है तो ऎसी ही कोई बड़ी ज़रूरत या मजबूरी होती है . इसी दिन के लिए पैसा बचाने के लिए वह अपनी कुछ इच्छाएँ मारता चलता है.
पीएफ निकासी पर टैक्स माने हमारे बच्चों के भी सपने मारना, जब बच्चे की पढ़ाई के लिए पैसा निकालें तो सरकार जी आपको गुंडा टैक्स दें !
जब बेटी की शादी के लिए पैसा निकालें तो सरकार जी आपको टैक्स दें !!
और जब जीवन में कुल जमा एक घर का जुगाड़ करें तो भी सरकार जी आपकी बंदरबाँट ही सहें.

वह भी तब जब कि आप यह भी साफ़ कर चुके हैं सरकार जी कि आप हमारे बच्चों को पेंशन भी नहीं देने वाले. हमारा बुढापा तो कट जाएगा पर हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा !

पीएफ के अपनी कमाई के पैसे पर टैक्स वसूलना खुली लूट है.

क्यों सरकार जी, किसलिए !! जब आप कारपोरेट को मोटे मोटे कर्ज देते हैं, और उनके डकार जाने पर वह कर्ज (बैड डेब्ट) आप खरीद कर हमारे ही सर पर डाल देते हैं. पाप उनका, ढोयें हम !!
और हमारी अपनी ही कमाई पर आपकी टेढ़ी नज़र ! सरकार जी सुना है बुरी आत्मा भी सात घर छोड़ देती है. आप तो अपने बनाने वालों पर ही टेढ़े हो गये !-
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(संध्या निवेदिता की वाल से.मार्फत -Mahesh Punetha )

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Bastar villagers forced to surrender as Naxals’ #WTFnews


Bastar villagers forced to surrender as Naxals' #WTFnews

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The outlawed Communist Party of  (Maoist) has said that "goons and anti-social elements" are creating havoc in the Bastar region of in the name of anti-Maoist operations.

A recent press statement issued by Mohan, the new secretary of south Bastar divisional committee of the CPI (Maoist), also claimed that the recent attacks on  activists and journalists in Bastar were orchestrated at the behest of right-wing groups.

"The atrocities on Bastar tribals are at their peak due to the 's policy to loot minerals and land of Bastar tribals. It is all a part of a bigger conspiracy to render the indigenous Tribals landless. Tribal  are being gang-raped. There is no such thing as administration in Sukma, Dantewada and Bijapur district of Bastar," said the statement said from Mohan, who has reportedly replaced senior leader Ganesh Uike as the secretary of South Bastar divisional committee of the Maoists.

"Innocent civilians are being killed and branded as Maoists and propaganda is being carried out in the media. Villagers from interior areas are being threatened with arrests and being made to surrender as Maoists," he added.

The Maoist leader also claimed that the police killed an eight-year-old child in Hurra village of Bastar on February 19. While appealing to the people of Bastar to condemn the attacks on human right activists and journalists, the Maoist leader asked the government to dissolve the District Reserve Guard (DRG), a recently formed special anti-Maoist unit of Bastar police, consisting largely of local tribal youth but including some former dreaded Maoist leaders.

The atrocities on tribals are at their peak due to the BJP government's policy to loot minerals

Mohan,CPI(M)

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PF taxed!Transaction tax introduced. It is FDI strategy all the way! It is Chandmari against workers and employees and the peasantry is used as cover it.Once it is passed as law with the financial bill,it would be the same story of disinvestment and FDI which might be extended time and again! epf, ppf Palash Biswas

PF  taxed!Transaction tax introduced. It is FDI strategy all the way!


It is Chandmari against workers and employees and the peasantry is used as cover it.Once it is passed as law with the financial bill,it would be the same story of disinvestment and FDI which might be extended time and again!


epf, ppf


Palash Biswas

PF is taxed!

Transaction tax introduced.

Once it is passed as law with the financial bill,it would be the same story of disinvestment and FDI which might be extended time and again!


However, the government claims that PPF remains tax exempt; EPF interest post April 1 to be taxed!


What an eye washing!


 They speak Hindutva for the agenda of total Privatization.


Now they stand with the peasantry to kill both the birds,the Peasantry as well as the working class including the employees.


It is yet another partition ploy to intensify ethnic cleansing.


Jal Jangal Jameen se bedakhali Jaari hai.


Harvestiong in India has become disastrous as agrarian crisis is elevated to the sky with free flow of foreign capital and foreign interest thanks to the Desh Bhakta Hindutva Biradari.


Whoever speaks against this genocide culture is simply charged with Sedition.

No one spared.

Not even a Chief Minister of an Indian State,Delhi,Arvind Keriwal!


Not even the vice president of Congress.


Not even the General Seretary of Communist Party of India Marxist.


So no one should lodge dissent against anti people governance of fascism as protest against governance is branded as Sedition.


It is ABSOLUTE Power!

It is ADHARNA all the way!

It is immoral all the way

It is against humanity!

It is against Nature!

It is against science!

It is against knowledge!


Every scream is branded as Sedition!

Civic and human right suspended sine die!


Right to information denied!

Freedom of speech deleted!

Fundamental rights do not stand!


Conscience is curbed.

ASATYAMEV Jayate all on the name of Hindutva!

 

In these circumstances,ironically,the most organised sector of working class and employees have been selected as target.


The Dow Chemicals Lawyer and his Bagula Bhagat experts do die to introduce transaction tax so tehe taxation would be SAMARAS.


It should be flat and the masses should bear the burden of taxation.

This budget has introduced transaction tax as a pilot project.


 Transaction would be taxed if it is over two lac.


The limit would vansih very soon as the FDI limits vanished all the way.


Revenue Secretary Hasmukh Adhia said the Budget proposal to tax 60 per cent of employee provident fund (EPF) withdrawal will affect less than one-fifth of employees with high salaries.


Never mind,it is also a pilot project once it is successful with due legislation the rest would be taxed as well.


Mind you,the Budget is the trap which means merciless hunting separating the working class and employees from the rest of masses.


As this class has already been uprooted and has no link with the masses,no common men or women would stand with them in the Killing scenario.


Thus,the most honest taxpayers have been sacrificed to showcase making in and it would be Sukhilala`s wold all the way.


Seeking to dispel fears of the salaried class, the government today said PPF will not be taxed on withdrawal and only the interest that accrues on contributions to employee provident fund made after April 1 will be taxed while principal will continue to be tax exempt. 


In an interview to PTI, Revenue Secretary Hasmukh Adhia said the Budget proposal to tax 60 per cent of employee provident fund (EPF) withdrawal will affect less than one-fifth of employees with high salaries.  


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