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Sunday, June 16, 2013

मजदूरों से पहले कोल इंडिया के अफसरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया!

मजदूरों से पहले कोल इंडिया के अफसरों ने हड़ताल का  ऐलान कर दिया!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​  


मजदूरों से पहले कोल इंडिया के अफसरों ने हड़ताल का फैसला कर लिया है।कोल माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमओएआइ) राष्ट्रीयकरण की शुरुआत से ही मजबूत संगठन रहा है और अब उसकी  एपेक्स बॉडी के सदस्यों ने रविवार को कोल इंडिया प्रबंधन, कोयला मंत्रालय व संबंधित विभागों को चरणबद्ध आंदोलन का नोटिस दिया है।कोल इंडिया के लगभग 20 हजार अफसरों का आंदोलन 5 अगस्त से शुरू होगा, जो 24 सितंबर, 2013 तक चलेगा। आंदोलन के स्वरूप में काला बिल्ला लगाना, भूख हड़ताल करना, धरना प्रदर्शन व सीआइएल मुख्यालय में भूख हड़ताल, सामूहिक अवकाश शामिल है।कोल अफसरों का आंदोलन प्रदर्शन आधारित भुगतान (पीआरपी), न्यू पेंशन स्कीम, प्रोन्नति, ग्रेर्ड ई-6 से ई-7 की पदोन्नति नीति में संशोधन, 1 जनवरी, 2012 से वेतन पुनरीक्षण करने सहित अन्य मामले को निपटाने की मांग सालों से की जा रही है।


विनिवेश और पुनर्गठन का विरोध कर रही मजदूर यूनियनों ने पहले ही बेमिादी हड़ताल की धमकी दे दी है। मजदूर हड़ाल पर 24 जून को कोलकाता में फैसला होगा लेकिन इससे पहले अफसरों की हड़ताल का फैसला हो जाने से कोल इंडिया की मुसीबतें और बढ़ जायेगां। प्रबंधन से जुड़े अफसरों के हड़ताल पर चले जालने से उत्पादन पर असर होना लाजिमी है।


केंद्र सरकार व कोल इंडिया प्रबंधन की नीतिया मजदूर, किसान व विस्थापितों के विरोधी है। श्रमिकों की उपेक्षा हो रही है। मजदूर, किसान व कोयलांचल के लोग बड़ी लड़ाई के लिए तैयार रहें। तभी श्रमिकों, किसानों व गरीबों की रक्षा हो सकती है। यह बातें बीसीकेयू के महामंत्री एसके बख्शी ने रविवार को मानबाद स्थित कार्यालय में बीसीकेयू की बैठक में कहीं।


अध्यक्षता निताई महतो ने की। यूनियन के नेता सह निरसा के विधायक अरूप चटर्जी को प्रबंधन की ओर से झूठे मुकदमें में फंसाये जाने की निंदा की गयी। कहा गया कि विधायक की अविलंब रिहाई नहीं हुई तो यूनियन आंदोलन को बाध्य होगी। 22 जून को कुजामा में असंगठित मजदूरों व तीन जुलाई को भौंरा में होने वाले विस्थापितों के सम्मेलन में संघर्ष की रणनीति बनेगी। सीटू नेता सह पूर्व विधायक दिलीप सरकार की हत्या पर दुख जताया गया। पूर्व विधायक अजीत पांडेय एवं सतपाल सिंह डांग के निधन पर शोक व्यक्त किया गया।


एक ओर जहां केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज दोहराया कि सरकार कोल इंडिया की 10 फीसदी की हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी, वहीं दूसरी ओर यूनियन इस कदम का विरोध करते नजर आ रहे हैं। कोल इंडिया के 3.50 लाख से ज्यादा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी वर्कर्स यूनियन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी है और अब यूनियन ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कोलकाता में संयुक्त सम्मेलन का आह्वान किया है।


सीटू से मान्यताप्राप्त ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव जीवन रॉय ने कहा, हम पहले ही कह चुके हैं कि अगर सरकार सीआईएल की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगी तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। 24 जून को पांचों वर्कर्स यूनियन का संयुक्त सम्मेलन होगा और इसमें मामले को उठाया जाएगा। विरोध में शामिल होने वाले अन्य यूनियन हैं इंडियन नैशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन (इंटक से मान्यताप्राप्त), इंडियन माइन वर्कर्स फेडरेशन (एटक से मान्यताप्राप्त) और हिंद खदान मजदूर फेडरेशन (एचएमएस से मान्यताप्राप्त)।


यूनियन ने दावा किया कि साल 2010 में सीआईएल के शेयर बिक्री के समय तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आश्वासन दिया था कि सरकार की और हिस्सेदारी नहीं बेची जाएगी। रॉय ने कहा, साल 2011 में यूनियनों ने कोयला मंत्रालय के साथ इस बाबत समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले कोयला क्षेत्र अलग है। कोल इंडिया के साथ सरकार ऐसा नहीं कर सकती। कोल इंडिया के प्रस्तावित पुनर्गठन के जरिए इसकी सभी सहायक कंपनियों को स्वतंत्र कंपनियां बनाने का भी वे विरोध कर रहे हैं। यूनियन के विरोध पर टिप्पणी करते हुए चिदंबरम ने कहा, मसले के समाधान के लिए कोयला मंत्रालय ट्रेड यूनियन से बातचीत करेगा। नई दिल्ली में उन्होंने कहा, 'अगर मैं कोल इंडिया का विनिवेश करता हूं और इससे 20,000 करोड़ रुपये मिलते हैं तो पूरी रकम सार्वजनिक क्षेत्र में जाएगी। मैं इस रकम का इस्तेमाल मौजूदा खर्च के लिए नहीं कर रहा हूं। इसलिए कोल इंडिया के यूनियन से मेरी अपील है कि डरने की कोई बात नहीं है कि हम इस रकम का इस्तेमाल किसी और काम में करेंगे।'



अफसरों के आंदोलन का स्वरूप :


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सहायक कंपनियों के मुख्यालय के समक्ष :


काला बिल्ला : 5 से 9 अगस्त, 2013 तक


भूख हड़ताल : 19 से 23 अगस्त, 2013 तक


धरना प्रदर्शन : 23 अगस्त, 2013


सामूहिक अवकाश : 24 सितंबर,2013


कोल इंडिया मुख्यालय के समक्ष :


काला बिल्ला : 5 से 9 अगस्त, 2013 तक


भूख हड़ताल : 9 से 13 सितंबर, 2013 तक


धरना प्रदर्शन : 13 सितंबर, 2013


सामूहिक अवकाश : 24 सितंबर, 2013


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