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Wednesday, June 13, 2012

मनरेगा पर मनमानी

http://www.janjwar.com/society/consumer/2741-2012-06-13-05-20-54

सिंदरी टोला के ग्रामीणों ने एक परिवाद दायर कर यह गूहार लगाया है कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को मजदूरी करने नही दिया जा रहा है बल्कि मनरेगा कार्यों को मशीन के जरीए करा दिया जाता है और मजदूरों की बहाली व उसका मेहनताना कागजों पर कर दिया जाता है…

राजीव

मनरेगा प्रावधानों की धज्जियां उड़ाते हुए जमशेदपूर के पटमदा प्रखंड़ के लखराकोदा गांव में जेसीबी मशीन से तालाब बनाने का कार्य किया जा रहा है. हालांकि मनरेगा कर्मी हलधर महतो manregaने पटमदा प्रखंड़ के प्रखंड़ विकास पदाधिकारी मनेन्द्र भगत को समय पर उक्त अनियमितता की जानकारी दे दिया और जब प्रखंड़ विकास पदाधिकारी स्थल पर पहुंचे तो पाया कि 2.66 लाख का तालाब प्रोजेक्ट जिसे 2011-12 वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत जारी किया गया था के अतंर्गत 100 फीट लंबाई व चैडाई तथा 15 फीट गहराई वाले एक तालाब की कटाई जेसीबी मशीन से मनरेगा प्रावाानों की धज्जियां उड़ाते हुए किया जा रहा था. इस योजना के तहत 78000 रूपए की निकासी भी कर ली गयी है परंतु उक्त योजना के क्रियान्वयन से सबंधी मस्टर रोल जांच करने पर भी उपलब्ध नहीं हो सका था.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह तो सिर्फ एक नमूना है जो पकड़ में आ गया. वैसे मनरेगा प्रावधानों की धज्जियां उड़ाते हुए कई ऐसे लोगों की एक बड़ी जमात है जो अपने स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ के लिए ऐसा करते आ रहे है. सिंदरी टोला के ग्रामीणों ने एक परिवाद दायर कर यह गूहार लगाया है कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को मजदूरी करने नही दिया जा रहा है बल्कि मनरेगा कार्यों को मशीन के जरीए करा दिया जाता है और मजदूरों की बहाली व उसका मेहनताना कागजों पर कर दिया जाता है. हांलाकि प्रखंड़ विकास पदाधिकारी ने मशीन से तालाब कटाई करने वाले लाभुक हिकीम मांझाी, मजदूरों के ठेकेदार सोहन मुर्मू व देवीलाल रजक तथा जेसीबी मशीनके मालिक, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है, के खिलाफ प्राथ्मिकी दर्ज करवा दिया है.

गौरतलब है कि जब प्रखंड़ विकास पदाधिकारी शिकायत के बाद स्थल जांच पर पहंुचे तो एक अजीबोगरीब दृश्य सामने आया जब लखराकोदा गांव के गामीणों ने सिंदरी टोला के गामीणों पर तोहमत लगाते हुए कहा कि ये लोग हम लोगों के विश्वास को तोड़ा है. जब सिंदरी टोला के ग्रामीणों ने अपने-अपने कुंओं को मशीन से खुदवाया था तब तो हम लागों ने कहीं शिकायत नहीं किया और आज कड़ी मिटटी होने के कारण व उफनती गर्मी और धूप में मजूदरों से तालाब कटाई करवाना संभव नहीं इसलिए जेसीबी मशीन से तालाब कटाई की जा रही थी तो लखराकोदा गांव के ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कर दिया. मिटटी कड़ी हो या गर्मी के कारण मजदूरो से काम लेना संभव नहीं हो तो मनरेगा के तहत मशीन से कटाई और खुदाई नहीं की जा सकती, मनरेगा अधिनियम इसकी इजाजत नहीं देता.

बहरहाल इतना तो तय है कि मनरेगा के तहत पटमदा प्रखंड के कई गांवों में मशीन से कुओं की खुदाई की जा चुकी है और तालाब की कटाई मशीन से की जा रही है. गांव वालों के सहमति से या असहमति से, प्रश्न यह नहीं है, प्रश्न है कि क्या मनरेगा अधिनियम के तहत मशीन से कुंए खुदवाए गए, इसकी जानकारी प्रशासने को क्यों नहीं है ?

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