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| यह तो लगभग सब ही जानते हैं कि हमारे देश में अधिंकांश नेताओं और गुंडों के बढ़े मधुर सम्बन्ध रहे हैं। कुछ लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि बिना ग़ुंडा हुए या बिना गुंडों से संबंध रखे नेता बनना खासा मुश्किल है। हाल ही में पूरे उत्तराखंड में चर्चित रहा कालाढूंगी कांड इन [ आगे पढ़ें.....] ![]() कालाढूंगी कांड ने उत्तराखडं पर एक बहुत बड़ा उपकार तो कर ही दिया है। इसने पार्टीगत राजनीति का चेहरा पूरी तरह उघाड़ कर रख दिया है। अपने आँख-कान खुले रखने वाले जागरूक लोग तो पहले भी यह जानते ही थे कि आखिर क्यों ऐसे लोग लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर ग्राम-प्रधान से लेकर सांसद तक [ आगे पढ़ें.....] पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। चारों धामों में धार्मिक पर्यटन कई सालों से चल रहा है। नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, देहरादून सहित अनेक ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो स्वतः ही लोगों को आकर्षित करते हैं। हाल के वर्षों में साहसिक पर्यटन और इको टूरिज्म की अवधारणा ने पर्यटन की संभावनाओं में नए आयाम जोड़े [ आगे पढ़ें.....] कहा जाता है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है। अक्टूबर 13 को चमोली ज़िले के देवसारी में गांव वालों के प्रस्तावित पिंडर नदी पर बांध तथा जल-विद्युत परियोजना का विरोध करने पर 11 के खिलाफ मुकदमे दायर कर दिए गए तथा अन्य 60, जिनके नाम नहीं दिए गए, के विरुद्ध भी कार्रवाही [ आगे पढ़ें.....] 'नैनीताल समाचार' का 15-30 सितम्बर एवं उससे पूर्व का अंक मिला। आप व नैनीताल समाचार की टीम को कड़ी मेहनत करने के साथ प्रखर पत्रकारिता के कार्य के लिए पुनः साधुवाद कि आपने इस भौतिकवादी दौड़ में समाचार पत्र का वह मूल्य जिन्दा रखा है, जो सभी समाचार पत्रों को रखना चाहिए था। नैनीताल समाचार [ आगे पढ़ें.....] ![]() Chandra Singh Rahi गढ़वाली लोक संस्कृति का लोहा मनवाने वाले चन्द्र सिंह राही आज भी आज भी अपने काम में जुटे हैं। प्रस्तुत हैं देहरादून में गढ़वाल सभा में इस संस्कृतिकर्मी से लक्ष्मण सिंह नेगी की छवीं बथ के अंश - प्रश्न:- अपने निजी जीवन के बारे में कुछ बतायें। उत्तर:- मेरा जन्म 1947 को गिवाली [ आगे पढ़ें.....] उसने अपनी जिन्दगी में सिर्फ तीन पहाड़ देखे स्थानीय व्यक्ति का अपने क्षेत्र में अधिकारी बन कर आना क्या वहाँ के लोगों के लिए हितकर होता है या नुकसानदेह ? इस पर अलग-अलग धारणाएँ हो सकती हैं। यहाँ पर मैं इसी तरह की एक नियुक्ति के बारे में कुछ लिखना चाहता हूँ। इस जोशीमठ सीमांत क्षेत्र में भारत-चीन के 1962 युद्ध के [ आगे पढ़ें.....] प्रस्तुति : राजेन्द्र गहतोड़ी 'पहाड़' के रजत जयन्ती समारोह कार्यक्रमों के क्रम में 26 व 27 अक्टूबर को चम्पावत में पहाड़ की माटी के अनेक रत्न जुटे। 26 अक्टूबर की शाम जवाहर नवोदय विद्यालय में वरिष्ठ पत्रकार गोविन्द पंत 'राजू' ने अंटार्कटिका के स्लाइड दिखाये। वे पृथ्वी के इस हिस्से में जाने वाले देश के [ आगे पढ़ें.....] प्रस्तुति : सतीश जोशी 'नैनीताल समाचार' की इस वर्ष की निबंध प्रतियोगिता में कनिष्ठ वर्ग (कक्षा 4, 5 व 6) के लिये विषय था, 'कैसा हो स्कूल हमारा'। यह विषय 11 वर्ष पूर्व 1998 में भी दिया गया था और तब गिर्दा ने विषय से प्रभावित होकर इसी शीर्षक से अपनी सुप्रसिद्ध कविता लिखी थी, [ आगे पढ़ें.....] | |||
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My father Pulin Babu lived and died for Indigenous Aboriginal Black Untouchables. His Life and Time Covered Great Indian Holocaust of Partition and the Plight of Refugees in India. Which Continues as continues the Manusmriti Apartheid Rule in the Divided bleeding Geopolitics. Whatever I stumbled to know about this span, I present you. many things are UNKNOWN to me. Pl contribute. Palash Biswas



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