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Monday, April 16, 2012

देहरादून में मजदूरों पर पुलिसिया कहर

देहरादून में मजदूरों पर पुलिसिया कहर



हीरो के वेण्डर कारखानों रॉकमैन व सत्यम के संघर्षरत  मजदूरों को राज्य के नये कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने चेतावनी देते हुए कहा था  कि वे राज्य को गुडगांव नहीं बनने देंगे. उनसे मिलने गये मजदूरों के एक प्रतिनिधिमण्डल से उन्होंने छूटते ही कहा था कि पांच हजार वेतन बहुत है...

जनज्वार. देहरादून के परेड ग्राउण्ड में धरने और आमरण अनशन पर बैठे रॉकमैन व सत्यम ऑटो  के मजदूरों पर आज पुलिस ने अपना रौद्ररूप दिखलाते हुए हमला बोल दिया. पुलिस बल ने 11 अनशनकारियों को जबरिया दून अस्पताल में भरती कर दिया और मौके पर मौजूद 326 मजदूरों को देहरादून के सिद्धीवालों जेल में ठूंस दिया, जिनपर शान्ति भंग की धाराएं थोप दी गयीं.

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उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में मजदूरों पर इस पुलिसिया कहर से नवगठित कांग्रेस सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों का आगाज हो गया. सरकारी मंशा  छह दिन पूर्व तब ही उजागर हो गयी थी जब हरिद्वार स्थित सिडकुल में हीरो के वेण्डर कारखानों रॉकमैन व सत्यम के  संघर्षरत  मजदूरों को राज्य के नये कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने चेतावनी देते हुए कहा था  कि वे राज्य को गुडगांव नहीं बनने देंगे. उनसे मिलने गये मजदूरों के एक प्रतिनिधिमण्डल से उन्होंने छूटते ही कहा था कि पांच हजार वेतन बहुत है.

दरअसल हीरो माटरसाइकिल की सहायक रॉकमैन के मजदूर प्रबन्धन के उत्पीड़न और वेतन वृद्धि को लेकर लम्बे समय से संघर्षरत  हैं. 19 मार्च से उनकी हड़ताल चल रही है. पुलिस व प्रशासन के कहर से तंग आकर यहां के 600 मजदूरों का राजधानी देहरादून के परेडग्राउंड में धरने के साथ एक समर्थक सहित 6 मजदूरों का 6 अप्रैल से आमरण अनशन भी जारी था.

उधर, हीरो की ही एक और वेण्डर सत्यम ऑटो के मजदूर भी लम्बे समय से आन्दोलनरत हैं. 22 मार्च को प्रबन्धन द्वारा अवैधरूप से गेट बन्दी के खिलाफ मजदूरों का आक्रोश  फूट पड़ा और समस्त 600 मज+दूरों ने काम बन्द कर दिया. कोर्ट के स्टे आर्डर के बहाने पुलिसिया हस्तक्षेप ने आन्दोलन को सड़क से हरिद्वार श्रम विभाग से होते हुए राजधानी देहरादून पहुंचा दिया था. जहां रॉकमैन के मदूरों के साथ यह संयुक्त आन्दोलन के रूप में चल रहा था. 9 अपै्रल से सत्यम के 5 मजदूर अनशन पर बैठे थे.

मुख्यमंत्री का उपरोक्त बयान और यह पुलिसिया दमन सरकार के रुख की एक साफ तस्वीर दिखलाता है. पूरे राज्य में कारखानेदारों की मनमानी, ठेकाकरण और श्रमकानूनों का खुलेआम उल्लंघन व मजदूरों की हर आवाज को कुचलने को मुस्तैद राज्य पुलिस की व्यवस्था को ही बढ़ावा देना भविष्य के लिए एक अशुभ संकेत है.

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