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Saturday, April 14, 2012

पंजाबियत को सलाम करते हुए शुरू हुआ साहित्‍य सम्‍मेलन

पंजाबियत को सलाम करते हुए शुरू हुआ साहित्‍य सम्‍मेलन


 आमुखशब्‍द संगत

पंजाबियत को सलाम करते हुए शुरू हुआ साहित्‍य सम्‍मेलन

14 APRIL 2012 ONE COMMENT


Officials of Adab Foundation and literary experts at the ceremony organised to honour acclaimed Punjabi Poet Surjit Patar.

बैसाखी के मौके पर चंडीगढ़ में एक साहित्य सम्मेलन की शानदार शुरुआत हुई, चंडीगढ़ साहित्‍य सम्‍मेलन (सीएलएफ)। सेक्टर 37 के लॉ-भवन में यह सम्मेलन शुरू हुआ। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी बात थी पंजाबी के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर का सम्मान। यह समारोह एक सलाम था पंजाबियत और समृद्ध पंजाबी संस्कृति को। पातर को पिछले ही दिनों उनकी पंजाबी साहित्य के प्रति की गयी सेवाओं के लिए 'पद्मश्री' सम्मान से सम्मानित किया गया था। इस अवसर पर पंजाबी के जाने-माने लेखक गुलजार संधू और चंडीगढ़ की प्रसिद्ध नाटककार नीलम मान सिंह भी मौजूद थीं।

तीन दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन 'अदब फाउंडेशन' ने चंडीगढ़ में साहित्य की गतिविधियों को संस्थागत करने के लिए किया है। यह सम्‍मेलन जयपुर में होने वाले साहित्य सम्‍मेलन से प्रेरित है। इस सम्‍मेलन का प्रयास है भारतीय लेखकों, कवियों और कलाकारों को एक मंच प्रदान करना, जिसका आनंद चंडीगढ़ के साहित्य प्रेमी उठा सकें। इस सम्‍मेलन के दौरान साहित्य पर गंभीर चर्चा भी होगी। इसमें उभर रहे लेखकों के साथ-साथ स्थापित लेखक भी अपनी महक बिखेरेंगे। 'अदब फाउंडेशन' के अध्यक्ष मितुल दीक्षित का कहना है कि हमारा मकसद बिना किसी भी तरह की रुकावट के साहित्य पर खुल कर चर्चा करना है।

सम्मेलन में चर्चा की शुरुआत 'चंडीगढ़-बदलती पहचान' विषय से हुई। इस चर्चा में ली कार्बूजिए के साथ काम कर चुके 'आर्किटेक्ट' एसडी शर्मा ने भी भाग लिया। इसी चर्चा में सरकारी अधिकारी व लेखक विवेक आत्रे ने भी अपनी बात कही। इस चर्चा को चलाया प्रोफेसर रजनीश वत्स ने।

बैसाखी के जोश में, सम्मेलन में मौजूद लोगों ने कवियों और कविताओं का खूब आनंद उठाया। इससे यह एहसास भी हो गया कि चंडीगढ़ के क्षेत्र में अच्छे कवियों और कविताओं की कोई कमी नहीं। यह मंच उन लेखकों और कलाकारों की आवाज बन रहा है, जो अभी उभर नहीं पाये हैं। पहले दिन का विषय यहां क्षेत्रीय ही रहा, लेकिन 14 और 15 अप्रैल को पूरे भारतवर्ष से आये विद्वानों के विचार और उनका काम देखने को मिलेगा। अगले दो दिनों में कुल 13 'सेशन' चलेंगे।

कुछ खास वक्ताओं में 'पान सिंह तोमर' फिल्म के लेखक संजय चौहान, एनडीटीवी के रवीश कुमार, अभिनेता-गीतकार-गायक पीयूष मिश्रा, 'कविता कोष' के ललित कुमार, उर्दू कवि सुलतान अंजुम व पलाश महेरोत्रा ('द बटरफ्लाई' के लेखक) शामिल हैं। इनके अलावा और भी कई जाने-माने लेखक इस सम्मेलन में अपने विचार रखेंगे।

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