नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (एजेंसी) उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार से सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सितलवाड के खिलाफ आगे की जांच आज यह कहते हुए रोकने को कहा कि यह एक दुर्भावनापूर्ण तरीके से दायर मामला है। हालांकि गुजरात सरकार ने कहा कि मामले में आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है और इसमें अपराध बनता है। वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर प्रसाद ने न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की पीठ से कहा, ''इसमें मामला बनता है।'' प्रसाद ने यह बात तब कही जब पीठ ने कहा, ''आपने मामले में दायर प्राथमिकी जरूर पढ़ी होगी और प्राथमिकी ही अपने आप में मानवाधिकारों का उल्लंघन है।'' पीठ ने कहा, ''जिस तरह से प्राथमिकी दर्ज की गई और प्राथमिकी में जो आरोप लगाये गए हैं उनसे हम पूरी तरह से असंतुष्ट हैं। प्राथमिकी मानवाधिकारों का उल्लंघन है।'' पीठ सितलवाड की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी जो उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय के गत वर्ष 27 मई के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी जिसमें अदालत ने सितलवाड के खिलाफ पानम नदी के किनारे स्थित कब्रिस्तान से शवों को खोदकर निकालने को लेकर राज्य के पंचमहाल जिले के एक पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। |
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