कोलकाता, 20 अप्रैल (जनसत्ता)। वरिष्ठ लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी ने नोनाडांगा कांड पर बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ने का एलान किया है। इस आंदोलन में उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने की बात भी कही है। महाश्वेता ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि अविलंब नोनाडांगा के विस्थापित बस्तीवासियों के साथ बातचीत कर वह समस्या का हल निकाले। इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे लोगों को भी उन्होंने पूरा समर्थन देने की बात कही है। मालूम हो कि एक दिन पहले नोनाडांगा में विस्थापितों के समर्थन में एक कन्वेंशन का आयोजन किया गया था। उस कन्वेंशन में खुद उपस्थित नहीं होकर भी महाश्वेता ने आंदोलनकारियों के नाम एक पत्र भेजा था। इस पत्र में वरिष्ठ लेखिका ने कहा है कि नोनाडांगा से उजाड़े गए बस्तीवासियों के लिए राज्य सरकार को तुरंत पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि महानगर के पूर्वी छोर नोनाडांगा में ये बस्तीवासी वर्षों से यहां रह रहे हैं। सरकार अगर यह जमीन लेना चाहती है तो उसे पहले बस्तीवासियों के पुनर्वास का इंतजाम करना चाहिए। इस बाबत सरकार को उन्होंने बस्तीवासियों से बातचीत करने की सलाह भी दी है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों पर महाश्वेता देवी समेत 'परिवर्तनपंथी बुद्धिजीवी' राज्य की ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। पिछले साल विधानसभा चुनाव के पहले इन्हीं बुद्धिजीवियों ने सिंगुर व नंदीग्राम आंदोलन में ममता का खुलकर समर्थन किया था। यही नहीं, ममता के समर्थन में वे कई बार सड़कों पर भी उतरे थे। 'परिवर्तनपंथी बुद्धिजीवियों' में से एक अन्य शिक्षाविद सुनंद सान्याल ने भी नोनाडांगा कांड पर ममता बनर्जी के खिलाफ आवाज उठाई है। नोनाडांगा में बीते दिनों आयोजित कन्वेंशन में सान्याल भी उपस्थित थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के पूर्व हमने ममता बनर्जी का जो रूप देखा था, आज हम उनका बदला हुआ रूप देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ममता जब विपक्ष की नेता थीं तो विस्थापन के खिलाफ आंदोलन करती रहती थीं। उस वक्त ममता इस बात पर जोर देती थीं कि पुनर्वास का इंतजाम किए बगैर राज्य सरकार को लोगों को उनकी जमीन से हटाने का कोई अधिकार नहीं है। इसके लिए वे तत्कालीन वाममोर्चा सरकार की तीखी आलोचना करती थीं, लेकिन आज सत्ता में आने के बाद ममता यह सब भूल गई हैं। सान्याल ने कहा कि इस हालात को देखने पर यह बात सच लगती है कि लंका में जाने के बाद सब लोग रावण हो जाते हैं।
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