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Friday, February 10, 2012

नाराज वैज्ञानिकों पर सरकार का मलहम, वैज्ञानिक समुदाय को राष्ट्रीय संपदा बताया

नाराज वैज्ञानिकों पर सरकार का मलहम, वैज्ञानिक समुदाय को राष्ट्रीय संपदा बताया

Friday, 10 February 2012 18:58

बेंगलूर, 10 फरवरी (एजेंसी) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन :इसरो: में उठे विवाद से नाराज चल रहे वैज्ञानिक समुदाय पर मलहम लगाते हुए सरकार ने आज अपना सुर नरम किया और कहा कि वैज्ञानिक समुदाय राष्ट्रीय संपदा है और उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसरो के देवास एंट्रिक्स सौदा मामले में सरकार ने हाल ही में चार अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को सरकारी पदों पर पुन:नियुक्ति से वंचित कर दिया है।
केंद्रीय कोरपोरेट मामले मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने आज यहां संवाददाताओं के सवाल के जवाब में बी के चतुर्वेदी के बयान का हवाला दिया । इस सौदे की जांच करने वाले चतुर्वेदी ने कहा है कि इस सौदे में कोई अपराधिता नहीं है और न ही धन की कोई हेराफेरी हुई है। चतुर्वेदी का बयान आज मीडिया की सुर्खिया है।
पूर्व कानून मंत्री मोइली ने कहा, ''हो सकता है कि इन :चारों: वैज्ञानिकों ने कुछ निश्चित प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं किया हो और इसीके कारण उनकी गलती मानी जा रही है।''
देवास एंट्रिक्स सौदे पर दो सरकारी जांच समितियोंं की रिपोर्टों के आधार पर सरकार ने इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर समेत चार अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को सरकारी पुन:नियुक्ति से वंचित कर दिया था। 

उसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने यह कहते हुए इस फैसले का बचाव किया था कि यह वैज्ञानिकों के लिए एक संदेश है कि कोई भी गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वैज्ञानिकों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
मोइली ने आज कहा, ''इसी के साथ मैं इस बात पर भी सहमत हूं कि हमें वैज्ञानिक समुदाय को राष्ट्रीय संपदा मानना होगा और राष्ट्रीय संपदा को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।''
उन्होंने कहा कि देवास के परिचालन की जांच का कोई प्रस्ताव उनके मंत्रालय में नहीं आया है। देवास का एंट्रिक्स के साथ सौदा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, ''मंत्रालय में अबतक इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं आया है।''
हालांकि उनका कहना था कि जब वह केंद्रीय कानून मंत्री थे तब यह राय दी गयी थी कि इस सौदे को रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

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