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Tuesday, February 21, 2012

एनसीटीसी पर विपक्ष का हमला जारी, प्रधानमंत्री लिखेंगे मुख्यमंत्रियों को

एनसीटीसी पर विपक्ष का हमला जारी, प्रधानमंत्री लिखेंगे मुख्यमंत्रियों को

Tuesday, 21 February 2012 20:23

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (एजेंसी) राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र के गठन के केंद्र सरकार के फैसले पर हमला जारी रखते हुए विपक्षी दलों ने आज एक संसदीय समिति से इस पर रोक लगाने की सिफारिश करने के लिए कहा। वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने की योजना बनाई है।
गृह मामलों की संसदीय स्थाई समिति की बैठक में राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी कें्रद :एनसीटीसी: की स्थापना पर आपत्तियां सामने आईं। उधर आज ही कांग्रेस की सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस ने भी सरकार के कदम पर आपत्ति प्रकट की है।
गैर कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से भी आलोचना झेल रहे प्रधानमंत्री कें्रद के प्रस्ताव के बारे में स्पष्टीकरण के लिए उन्हें पत्र लिखने की सोच रहे हैं।
माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने प्रधानमंत्री को इस बाबत जानकारी दी है। प्रधानमंत्री कल यहां ममता बनर्जी के साथ बातचीत करेंगे, जिस दौरान एनसीटीसी का मुद्दा आ सकता है।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला भी आज आपत्ति जताते दिखे।
उमर ने श्रीनगर से 20 किलोमीटर दूर मागम में एक समारोह से इतर संवाददाताओं से कहा, ''एनसीटीसी के मुद्दे पर राज्य सरकार और कें्रद सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। मुझे लगता है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कें्रद सरकार के साथ राज्य सरकार की भावनाओं को निजी तौर पर साझा करने से पहले मुख्यमंत्री होने के नाते मेरे लिए इस बारे में सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है।''
सरकार संभवत: एनसीटीसी को लेकर एक मार्च से पहले सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की बैठक बुला सकती है। एक मार्च को एनसीटीसी के प्रभाव में आने की संभावना है।
संसदीय समिति की बैठक में गैर..कांग्रेसी दलों के सदस्यों ने एनसीटीसी के गठन के फैसले पर केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह से सवाल जवाब किये।
गृह सचिव के सामने सवाल किया गया कि केंद्र सरकार राज्यों से परामर्श के बिना आतंकवाद रोधी संस्था के गठन पर एकपक्षीय फैसला कैसे कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार विपक्षी सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष और भाजपा नेता एम. वेंकैया नायडू से कहा कि उन्हें गृह मंत्रालय से इस प्रस्ताव पर रोक लगाने की सिफारिश करनी चाहिए।
भाजपा, बीजद, अन्नाद्रमुक और वाम दलों के सदस्यों की राय है कि एनसीटीसी राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करेगा और संघीय ढांचे पर असर डालेगा।
दर्जन भर राज्यों के मुख्यमंत्री पहले ही एनसीटीसी के निर्माण पर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि इससे राज्यों के अधिकारों से समझौता होगा।
आज की बैठक में सदस्यों ने सिंह से कहा कि इकाई के गठन के फैसले से पहले राज्यों के साथ सलाह मशविरा होना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक कुछ सदस्यों ने कहा कि केंद्र की स्थापना से संघीय ढांचे के सिद्धांतों पर हमला होगा और केंद्र तथा राज्यों के बीच रिश्ते प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि बैठक में मौजूद कांग्रेसी सदस्यों ने इस मुद्दे पर व्यापक विचार विमर्श की वकालत की।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सरकार के फैसले की निंदा करते हुए कहा कि शासकीय आदेश के माध्यम से एनसीटीसी का गठन करना संघीय ढांचे का उल्लंघन है।
उन्होंने इस फैसले पर राज्यों के बीच आम सहमति होने तक रोक लगाने की मांग की।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र ने बिना राज्यों की सलाह के संस्था बनाने का फैसला किया।
उधर केन््रदीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि इस विषय को लेकर किसी भी गलतफहमी को दूर करने के लिए सरकार इसका विरोध कर रहे राज्यों से बातचीत करने को तैयार है।
सिब्बल ने लखनउच्च् में संवाददाताओं से कहा, ''यदि उन्हें कोई चिंता है तो बातचीत में कोई दिक्कत नहीं है। यदि कोई संदेह है तो कोई समस्या नहीं है, हम बातचीत कर सकते हैं। लेकिन केंद्र सरकार यह सब आतंकवाद निरोधक कार्रवाइयों के लिए कर रही है।''
उन्होंने कहा कि आतंकवाद रोधी कार्रवाइयों के लिए जो अधिकार पहले केंद्र सरकार के पास थे उन्हें एनसीटीसी को दिया जा रहा है।

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