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Thursday, February 23, 2012

मुलायम के लौटने की आहट से इटावा के नौजवान बमबम

मुलायम के लौटने की आहट से इटावा के नौजवान बमबम



hursday, 23 February 2012 09:37

अंबरीश कुमार/दिनेश शाक्य इटावा, 23 फरवरी। होरी तै रुक जाइयो भइयो नेताजी आउत है...। इटावा जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर गुलाबपुरा गांव में हर नौजवान दूसरे नौजवान दूसरे से यह कहता मिला।

यह कोई होली आने की सूचना नहीं बल्कि सत्ता में समाजवादी पार्टी के लौटने की आहट से से पैदा हुए यादव युवक का दंभ, उत्साह और चेतावनी सभी है। इटावा के आसपास के यादव बहुल गांवों का दौरा कर लें, तो पता चलेगा यहां बिरादरी के नौजवान और बूढ़े सभी उस होली का इंतजार कर रहे है, जो चुनाव नतीजों के बाद आने वाली है ताकि मुलायम की ताजपोशी का जश्न रंगों के साथ मनाया जा सके। 
मुलायम के गढ़ में उनके सत्ता से जाने के बाद उनकी बिरादरी के उन लोगों को कई तरह की परेशानी का भी सामना करना पड़ा है, जो सपा की राजनीति के वाहक रहे हैं। पढ़ाई, नौकरी और फर्जी मुकदमे से लेकर जब्त हुई बंदूकें भी इन समस्यायों में शामिल हैं। यहां बंदूकें आतंक से ज्यादा सम्मान का प्रतीक हैं। वे भी रखते है जिन्होंने सालों से एक परिंदा भी नहीं मारा होगा। मुलायम सिंह के सत्ता में लौटने को लेकर विरोधी दलों के लोग लखनऊ से इटावा तक प्रचार कर रहे हैं, यादव तो अभी से लाठी को तेल पिलाने लग गए हैं। 
पिछड़ी जातियों में सबसे मुखर और आक्रामक यादव ही माने जाते हैं, जिनमें से बहुत से पिछले साढ़े चार साल से पिट भी रहे हैं। यह दूसरा सच भी है। यह अनायास नहीं है कि हर सभा में अपनी पार्टी के लोगों को भी आगाह करते हुए  मुलायाम सिंह कह रहे हैं-गुंडई अगर पार्टी के लोगों ने की, तो फौरन बाहर कर दूंगा। अपने इलाके और बिरादरी का मिजाज मुलायम सिंह यादव से ज्यादा कौन जानता होगा। इसी गुंडागर्दी का ठप्पा लगा कर मायावती ने उन्हें सत्ता से बाहर भी किया था और मायावती अपनी सभाओं में उसी गुंडागर्दी की यादें ताजा करा रही हैं।  पर दूसरा तथ्य यह भी है कि मुलायम राज की पांच साल पुरानी गुंडागर्दी पर मायावती राज का भ्रष्टाचार भारी पड़ रहा है। हालांकि मैनपुरी में सपा उम्मीदवार ने फिर वही आचरण दिखाया, जिससे लोग आशंकित हो जाते हैं।
होरी तै रुक जाइयो भइयो नेता जी आउत है, कुछ ऐसी ही देसी जुबान में सैफई यानी मुलायम के गांव के आसपास के लोग भी बोल रहे हैं। गांव में जब कोई बाहरी आदमी का आगमन होता है, तो गांव के परिचित से इन शब्दों के जरिए जानने की कोशिश करते हैं। गांवों के आसपास के खेतो मे गेहंू ही गेहूं दिखता है। इटावा का अधिकतर इलाका पछार बोला जाता है जहां पानी की बहुतायत रहती है। इस वजह से गेहूं और धान का ज्यादा प्रचलन है। लेकिन कुछ किसान घरेलू उपयोग के लिए सरसों और लहसुन की खेती भी कर लेते हैं।
ऐसे कई गांव का दौरा करने पर मुलायम सिंह को लेकर बिरादरी के लोगों में काफी उत्साह दिखाई पड़ रहा है। यहां गुरुवार को मतदान होगा। समाजवादी पार्टी के छोटे बडेÞ नेताओं ने इस इलाके में सपा की नैया को पार लगाने के लिए चुनाव से पहले ही कसरत शुरू कर दी थी, जो चुनाव आते आते एक अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। अब मुलायम का इलाका सपा के लिए जहां प्रतिष्ठा का सवाल तो बना ही हुआ है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और बसपा भी अपने आप को कम नहीं मान रही है। क्योंकि कांग्रेस महासचिवराहुल गांधी और बसपा की मुखिया मायावती भी अपने लोगों में जोश भर गई हैं। 

कई सर्वेक्षण रपट के बाद इस इलाके के यादव बहुल गांवों में खासा जोश देखा जा रहा है। उदयपुरा, गंगापुरा, केशवपुरा, अडूपुरा और गुलागबपुरा के किसी भी यादव नौजवान से बात कर लें, वह सपा का समर्थक नजर आएगा। सत्ता विरोधी व्यापक लहर और बसपा के खिलाफ बने माहौल ने मुलायम के पक्ष में हवा बना दी  है। 
चुनाव से पहले बसपा में हिस्सेदारी करने वाले गंगापुरा गांव के प्रधान अरविंद यादव पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा के पक्ष में थे लेकिन अब बसपा की नीतियों से उनका मोहभंग हो चुका है। अब वे समाजवाद का  झंडा उठाए हुए हैं और लोहिया के नारे लगते हैं। 
अरविंद यादव ने जनसत्ता से कहा- बहुजन समाज पार्टी की वर्तमान सरकार ने राज्य के हित में या राज्य के लोगों के लिए कोई काम नहीं किया। इस सरकार में सिर्फ पार्क और मूर्तियां बनीं। जितने भी सरकारी ठेके थे, वे उनके मंत्रियों के चेलों  के अलावा किसी और को नहीं दिए। हम किसी भी सरकारी दफ्तर में जाते हैं, तो बिना पैसे के काम नहीं होता। 
उदयपुरा गांव के 70 साल के बजुर्ग सुंदरलाल यादव का कहना है कि मुलायम सिंह यादव पर हमेशा विरोधी दलों के निशाने पर रहे हैं। यह आरोप गलत है कि मुलायम सिंह ने सिर्फ अपने इलाके में ही विकास कार्य कराया। सही तो यह है कि हर इलाके में विकास कराया है। गंगापुरा के अमरवीर सिंह यादव ने कहा- मुलायम सिंह यादव हमेशा जनता के बीच में रह कर काम करते हैं और हमेशा जनता के सुख दुख में शामिल रहते हैं। 
चौधरी चरण सिंह पोस्ट ग्रेजुएट कालेज के प्रवक्ता डा अरविंद यादव ने कहा, इटावा और मुलायम सिंह यादव का गहरा नाता है लेकिन सत्ता की दूरी ने एक दूसरे को मुश्किल में डाल दिया है। दोनों की इसी में भलाई हो सकती है कि एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता मे मुलायम सिंह यादव के दल का प्रभाव बने, तभी इटावा और मुलायम दोनों का भला संभव है। 
मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई के प्रधान दर्शन सिंह यादव   ने कहा-बसपा की सरकार में ऐसे ऐसे काम किए गए हैं, जिसकी वजह से लोग मुलायम के करीब आ रहे हैं। ऐसे में मुलायम सरकार न बनने की कोई संभावना नजर नहीं आती है। गुलाबपुरा गांव के विनोद कुमार यादव का कहना है कि सत्ता विरोधी लहर ने मुलायम के पक्ष में माहौल बना दिया है।

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