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तेंदुलकर को दिया जा सकता है आराम, लेकिन क्या भारत के लिये कारगर होगा रोटेशन?

तेंदुलकर को दिया जा सकता है आराम, लेकिन क्या भारत के लिये कारगर होगा रोटेशन?

Friday, 10 February 2012 11:59

 

एडिलेड, 10 फरवरी (एजेंसी) सचिन को अगले मैच में आराम दिया जा सकता है।

लेकिन अगर बीते रिकार्ड को देखा जाये तो यह कदम टीम परेशानियों से जूझ रही टीम के लिये नुकसानदायक साबित हो सकता है । 
पिछले 22 वर्षों में भारत ने आस्ट्रेलिया में मेजबान टीम के खिलाफ पांच मैचों में जीत दर्ज की है और इन सभी में हमेशा तेंदुलकर खेले हैं और उन्होंने जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है । 
वर्ष 1991...92 में भारत ने आस्ट्रेलिया को पर्थ में वाका में 107 रन के अंतर से शिकस्त दी थी । 
तेंदुलकर तब 65 गेंद में 36 रन बनाकर दूसरे शीर्ष स्कोरर रहे थे जबकि अभी मुख्य चयनकर्ता की भूमिका निभा रहे के श्रीकांत ने 60 गेंद में 60 रन बनाये थे । 
भारत को दोबारा आस्ट्रेलिया को हराने में 12 साल लगे और इससे पहले उसे लगातार 11 मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा । वर्ष 2003...04 में भारत ने गाबा में आस्ट्रेलिया को 19 रन से हराया था ।

तेंदुलकर ने इस मैच में 95 गेंद में आठ चौके से 86 रन बनाये थे और भारत ने 300 रन से ज्यादा का स्कोर बनाया था । 
भारत ने अगले तीन मैच 2007...08 श्रृंखला में जीते थे जिसकी शुरूआत मेलबर्न में हुई थी । भारत ने 159 रन के स्कोर का पीछा करते हुए पांच विकेट रहते जीत दर्ज की थी जिसमें तेंदुलकर 54 गेंद में तीन चौके से 44 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे थे । भारत ने इसके बाद लगातार दो फाइनल जीतकर आस्ट्रेलिया में अपनी पहली एक दिवसीय श्रृंखला में जीत दर्ज की थी । 
सिडनी में पहले फाइनल में तेंदुलकर ने 120 गेंद में 10 चौके की मदद से 117 रन की पारी खेली थी जिससे भारतीय टीम ने छह विकेट और 25 गेंद रहते 240 रन का लक्ष्य हासिल किया था । 
दो दिन बाद दोनों टीमें एडिलेड में फिर एक दूसरे के आमने सामने थीं । भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 258 रन बनाये जिसमें तेंदुलकर ने 121 गेंद में सात चौके जमाकर 91 रन जोड़े थे । 
इन आंकड़ों से दो बातें पता चलती हैं कि तेंदुलकर अब भी आस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में भारत की जीत के लिये अहम 

हैं और दूसरी भारतीय टीम सलामी बल्लेबाजों :किसी एक सलामी बल्लेबाज: के आक्रामक प्रदर्शन के बिना कभी भी आस्ट्रेलिया को नहीं हरा पायी है । 
इससे दोनों सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की भूमिका पर भी सभी की नजरें लगी होंगी ।

सहवाग ने तीन दौरों में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 10 मैच खेले हैं । उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 37 रन से अधिक का नहीं रहा है । उन्होंने इन 10 मैचों में 18 के औसत से 180 रन बनाये हैं । 
इसके विपरीत गंभीर का औसत सहवाग से कहीं बेहतर है । उन्होंने मेजबान देश के खिलाफ सात मैचों में 32.86 के औसत से 320 रन बनाये हैं । उन्होंने 2007...08 के पिछले दौरे के दौरान सिडनी में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 113 रन की शतकीय पारी भी खेली थी । 
विराट कोहली, रोहित शर्मा, सुरेश रैना और मनोज तिवारी के बीच अगर देखा जाये तो आस्ट्रेलिया में मेजबान टीम के खिलाफ इन सभी का अनुभव मिलाकर 10 मैच से ज्यादा का नहीं है । 
रोहित शर्मा ने 2008 में पिछली त्रिकोणीय श्रृंखला के पहले फाइनल में अर्धशतक जमाया था, उन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ सात मैच खेले हैं । अन्य खिलाड़ियों ने केवल एक एक मैच खेला है जिसमें इन्होंने केवल 37 रन ही जोड़े हैं ।
रोटेशन प्रणाली के साथ या इसके बिना भारतीय बल्लेबाजों के लिये आस्ट्रेलिया के खिलाफ बचे हुए लीग मैच काफी चुनौतीपूर्ण ही साबित होंगे । 
आस्ट्रेलिया के खिलाफ बचे हुए तीन लीग मैच 12 फरवरी को एडिलेड, 19 फरवरी को ब्रिसबेन और 26 फरवरी को सिडनी में आयोजित होंगे । 
अगर रोटेशन प्रणाली कारगर रहती है, अभी तक टीम प्रबंधन की रणनीति के अनुसार, तो तेंदुलकर एडिलेड मैच से बाहर रह सकते हैं और फिर ब्रिसबेन और सिडनी में खेलेंगे । 
लेकिन अब समय आ गया है कि भारतीय टीम तेंदुलकर के बल्ले के बिना किसी अन्य खिलाड़ी की बल्लेबाजी से आस्ट्रेलिया में उसके खिलाफ जीत दर्ज करे । 
यह बात जग जाहिर है कि उनका स्थान भरना काफी मुश्किल होगा लेकिन हर बल्लेबाज को अपनी काबिलियत साबित करने के लिये कोशिश तो करनी ही होगी ।

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